

बंधुआ मजदूरी (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 और बंधुआ मजदूरों के पुनर्वास के लिए संचालित केंद्रीय योजना को देशभर में एकसमान तरीके से लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 2 नवंबर, 2026 को कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह की पीठ ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह 14 मई, 2026 को जारी संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को पूरे देश में एकसमान रूप से लागू करना सुनिश्चित करे।
सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एसओपी लागू करने और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करने के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे। इसके लिए उन्हें छह महीने का समय दिया गया है। वहीं, केंद्र सरकार को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के परामर्श से तीन महीने के भीतर आवश्यक पूरक दिशानिर्देश जारी करने होंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने बंधुआ मजदूरों की पहचान और उन्हें मुक्त कराने की प्रक्रिया के लिए एकसमान व्यवस्था बनाने का निर्देश दिया है।
अदालत ने कहा कि बंधुआ मजदूरी से संबंधित शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर सत्यापन किया जाना चाहिए। सामान्य परिस्थितियों में यह सत्यापन 24 घंटे के भीतर पूरा होना चाहिए। इसके बाद, जहां आवश्यक हो, तत्काल बचाव अभियान चलाया जाए।
बंधुआ मजदूर की पहचान होने के बाद सक्षम प्राधिकारी बिना देरी के आवश्यक जांच करे और पहचान की पुष्टि होने के सामान्यतः 24 घंटे के भीतर मुक्ति प्रमाणपत्र जारी करे।
सुप्रीम कोर्ट ने मुक्ति प्रमाणपत्र का एक समान प्रारूप तैयार करने का भी निर्देश दिया है, जिसे सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश मान्यता दें। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अलग-अलग राज्यों की प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण मुक्त कराए गए मजदूरों के पुनर्वास में बाधा न आए।
आर्थिक सहायता और पुनर्वास के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि पुनर्वास योजना के तहत पात्र बंधुआ मजदूरों को मिलने वाली तत्काल आर्थिक सहायता मुक्ति प्रमाणपत्र जारी होने के सात दिनों के भीतर वितरित की जाए।
अदालत ने पुनर्वास योजना में संशोधन की आवश्यकता भी बताई और केंद्र सरकार को इस संबंध में निर्णय लेने का निर्देश दिया। प्रस्तावित संशोधनों में
तत्काल आर्थिक सहायता की राशि बढ़ाना, पुनर्वास की प्रक्रिया को सरल बनाना, दूसरे राज्य में बंधुआ मजदूरों की पहचान और पुनर्वास के मामलों में राज्यों की जिम्मेदारियां स्पष्ट करना, पुनर्वास संबंधी लाभ मिलने में देरी होने पर मजदूरों को अंतरिम गुजारा भत्ता उपलब्ध कराना जैसे मुद्दे शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश और बिहार को 17 मजदूरों की आर्थिक सहायता की जांच का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश और बिहार सरकारों को संयुक्त रूप से उन 17 बंधुआ मजदूरों को मिलने वाली आर्थिक सहायता की स्थिति का सत्यापन करने का निर्देश दिया, जिन्हें याचिकाकर्ता सुरेंद्र मांझी के साथ मुक्त कराया गया था।
सुरेंद्र मांझी को 28 फरवरी, 2019 को उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर स्थित एक ईंट भट्ठे से मुक्त कराया गया था।
अदालत ने दोनों राज्यों को एक महीने के भीतर सत्यापन पूरा करने और यदि कोई आर्थिक सहायता बकाया है तो उसे जल्द से जल्द वितरित करने का निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे बंधुआ मजदूरी उन्मूलन अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार जिला और उपमंडल स्तर पर सतर्कता समितियों का गठन करें और उनके प्रभावी संचालन को सुनिश्चित करें।
इन समितियों को बंधुआ मजदूरों की पहचान, मुक्ति और पुनर्वास की स्थिति की समय-समय पर समीक्षा करनी होगी।
इसके अलावा, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि जिला स्तर पर पुनर्वास कोष उपलब्ध हों और उनका प्रभावी इस्तेमाल किया जाए, ताकि पात्र मजदूरों को समय पर आर्थिक सहायता मिल सके।
नवजीवन पोर्टल के प्रभावी संचालन पर जोर
अदालत ने केंद्र सरकार को बंधुआ मजदूरों की पहचान, बचाव, मुक्ति और पुनर्वास से संबंधित जानकारी दर्ज करने और उसकी निगरानी के लिए नवजीवन पोर्टल का प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिगों से जुड़े मामलों में बच्चों की सुरक्षा और पुनर्वास पर भी विशेष जोर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को चार महीने के भीतर अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसमें पुनर्वास योजना में प्रस्तावित संशोधनों पर लिए गए निर्णयों और एसओपी को देशभर में एकसमान रूप से लागू करने के लिए उठाए गए कदमों का विवरण देना होगा।
सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को छह महीने के भीतर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करना होगा। इसके बाद दो सप्ताह के भीतर उन्हें अपना-अपना अनुपालन हलफनामा दाखिल करना होगा। इसमें उठाए गए कदमों, निर्देशों के क्रियान्वयन की स्थिति और यदि कोई कमी बाकी है तो उसके कारणों का उल्लेख करना होगा।
अदालत ने केंद्र सरकार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा किए गए अनुपालन की एक समेकित स्थिति रिपोर्ट भी रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया है।