

मध्य प्रदेश के डिंडोरी वनमंडल में साल बोरर कीट ने एक बार फिर कोहराम मचाना शुरू कर दिया है। वनमंडल के करंजिया और बजाग रेंज में साल के पेड़ों के नीचे भारी मात्रा में बुरादे का ढेर लगना शुरू हो चुका है। वन विभाग के अधिकारी और वैज्ञानिक इसे हर 30 वर्ष के अंतराल पर साल के पेड़ों पर लगने वाली महामारी से जोड़कर देख रहे हैं।
2025 में भी इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में साल के पेड़ कीट से प्रभावित हुए थे। वन विभाग ने ऐसे करीब 1.5 लाख पेड़ों की मार्किंग की थी। पिछले महीने इन पेड़ों को काटने की अनुमति मिलने के बाद इनकी कटाई शुरू हो चुकी है और अब तक 45,000 से ज्यादा पेड़ काटे चुके हैं। इनमें से ज्यादातर पेड़ करंजिया क्षेत्र में जगह-जगह कटे पड़े हैं।
डिवीजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (डीएफओ) उत्पादन भारती ठाकरे ने डाउन टू अर्थ को बताया कि कटाई का काम अधिकतम दिसंबर तक पूरा हो जाएगा । हालांकि उनका यह भी मानना है कि कुछ बड़े कूपों में जहां प्रभावित पेड़ों की संख्या अधिक है, वहां कटाई जनवरी-फरवरी तक चल सकती है। कटे हुए पेड़ों को रखने के लिए करीब 60 किलोमीटर दूर सागरटोला में एक अस्थायी डिपो बनाया गया है।
डिंडोरी वनमंडल में सब डिवीजनल ऑफिसर (एसडीओ) सुरेंद्र जाटव ने डाउन टू अर्थ को बताया कि पेड़ों की कटाई के दौरान क्षेत्र का दौरा करने पर हमने देखा है कि इस साल भी बड़ी मात्रा में साल बोरर का प्रकोप दिख रहा है। वह आगे बताते हैं कि हमने अपने अधीनस्थ स्टाफ को वस्तुस्थिति का सर्वे करने और रिपोर्ट प्रस्तुत को कहा है। उसके बाद वैज्ञानिक संस्थानों को सूचित किया जाएगा।
सोनतीरथ गांव में रहने वाले 60 वर्षीय कार्तिक राम ने 1990 के दशक में साल बोरर कीट की महामारी देखी थी। वह मानते हैं कि मौजूदा स्थिति उससे भी बदतर है। उनका कहना है कि कीट कम होने के बजाय लगातार बढ़ते जा रहे हैं। उनका कहना है कि जुलाई से सितंबर तक जंगल से सटे उनके घर में बड़ी संख्या में कीड़े रोशनी से आकर्षित होकर लगातार पहुंचते रहे। उन्हें डर है कि कीट उनका जंगल खत्म न कर दे क्योंकि जंगल खत्म हुआ तो पानी और जड़ी बूटियां खत्म हो जाएंगी।
कपोटी गांव में रहने वाले बुध सिंह पट्टा बताते हैं कि पूरे जंगल में कीट लग चुका है। उनका कहना है कि उसके गांव के आसपास पिछले वर्ष साल बोरर प्रभावित ऐसे बहुत से पेड़ों की कटाई नहीं हुई, जिनमें मार्किंग की गई थी। वह इसे कीड़े के फैलने की एक अहम वजह मानते हैं।
सोनतीरथ गांव में रहने वाले हीराभाई कहते हैं कि उनके गांव के लगे 76-79 कंपार्टमेंट में 5,000 से अधिक पेड़ चुके हैं। इनमें से हर कंपार्टमेंट में 15,000-20,000 पेड़ों की कटाई होनी है। उनका कहना है कि साल बोरर प्रभावित पेड़ कटाई के दौरान गैर संक्रमित पेड़ों से टकरा रहे हैं जिससे वे टूटकर गिर रहे हैं।
डाउन टू अर्थ ने 27-28 अक्टूबर को प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया और इस दौरान ज्यादातर लोगों का यही मानना था कि साल बोरर का प्रकोप पिछले वर्ष से अधिक है। बहुत से लोगों ने यह भी बताया कि मौजूदा स्थिति तीन दशक पहले फैली महामारी से भी बदतर है।