पुनीत सोनकर डिंडोरी के डिवीजनल फॉरेस्ट ऑफिसर हैं

2026-27 में साल बोरर का चक्र लौटने की आशंका

पहले संकेत के तौर पर कीट घरों की लाइट के पास इकट्ठा होने लगते हैं। 5 साल पहले वे नहीं आते थे लेकिन अब आने लगे हैं - पुनीत सोनकर
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नवंबर में वन विभाग पुनर्जनन सर्वे होता है। हर 4–5 वर्षों में यह सर्वे किया जाता है। इस बार निर्देश है कि वृद्धि के साथ-साथ यह भी बताया जाए कि कितने पेड़ इस वर्ष प्रभावित हुए हैं। इससे हमें अधिक सटीक आंकड़े मिलेंगे। अभी कोई निश्चित आंकड़ा बताना कठिन है, क्योंकि ऐसा कोई आंकड़ा अभी आया नहीं है। जो भी हम कह रहे हैं, वह संकेतों के आधार पर है। पहला संकेत गांव से मिलता है। पास के गांवों में कीटों की संख्या बढ़ने लगती है। कीट घरों की लाइट के पास इकट्ठा होने लगते हैं। 5 साल पहले वे नहीं आते थे लेकिन अब आने लगे हैं। अध्ययन बताते हैं कि इसका एक प्राकृतिक चक्र है जो लगभग 30 वर्षों का होता है। 1997 में इसका प्रभाव बहुत अधिक था। उससे पहले 1967–68 के आसपास था। इसलिए 30 वर्षों बाद 2026–27 में इसके बढ़ने की आशंका है।

यदि परिपक्व पेड़ हैं तो हमारी सिल्वीकल्चर प्रक्रिया में एससीआई कूप के तहत मार्किंग और फेलिंग (कटाई) की जाती है। कार्ययोजना में पहले से यह निर्धारित है कि सभी परिपक्व पेड़ों में से 33 प्रतिशत पेड़ों को काटकर डिपो में बेचा जाता है। हमारा पहला काम यह है कि सभी परिपक्व और साल बोरर से प्रभावित पेड़ों को पहले चिह्नित कर काटा जाए। स्वस्थ पेड़ों को काटने की बजाय प्रभावित पेड़ों को काटा जाएगा। इससे 33 प्रतिशत का लक्ष्य भी पूरा हो जाएगा। योजना में यह भी है कि यदि किसी कूप में अन्य साल बोरर प्रभावित पेड़ हैं, तो उन्हें भी चिन्हित कर अनुमति लेकर काटा जाए, ताकि संक्रमण न फैले। दूसरा कदम मॉनसून के मौसम में होता है, जिसे ट्रैप ट्री विधि कहते हैं। यह केवल तब की जाती है जब साल बोरर की संख्या अत्यधिक बढ़ जाती है। 2025 के जुलाई-सितंबर में यह किया जाएगा, क्योंकि उस समय कीट अधिक निकलते हैं। इससे 80–90 प्रतिशत साल बोरर नष्ट हो जाते हैं। हम नहीं चाहते कि संख्या इतनी बढ़ जाए कि 2-3 वर्षों में बहुत अधिक पेड़ प्रभावित हों।

(पुनीत सोनकर डिंडोरी के डिवीजनल फॉरेस्ट ऑफिसर हैं)

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