साल के पेड़ काटने से पहले सोचना चाहिए

जब मैं 1980 में विभाग में आया था, तब साल के पेड़ के बारे में कहावत थी, “सौ साल खड़ा, सौ साल पड़ा, फिर भी नहीं सड़ा” - ओजी गोस्वामी
ओजी गोस्वामी अमरकंटक के सेवानिवृत्त सब डिवीजनल ऑफिसर हैं
Published on

मैं साल बोरर को लेकर चिंतित हूं। अमरकंटक में लगभग 10,000–15,000 पेड़ों को चिन्हित किया गया है, जो कई वर्षों से प्रभावित हैं। इसकी एक रिपोर्ट भोपाल भेजी गई है। जब साल बोरर का हमला होता है, तो उसके अलग-अलग चरण होते हैं। प्रभावित पेड़ों का हम वर्गीकरण करते हैं। अगर पूरा पेड़ सूख गया है, तो वह जंगल के लिए उपयोगी नहीं रहता। अंततः उसे काटना ही पड़ता है। 1995 से 1998-99 के बीच प्रभावित पेड़ों को हटाया गया था। जंगल की सीमा से 5-7 किमी बाहर डिपो बनाए गए थे, ताकि संक्रमित लकड़ी दोबारा जंगल में न जाए। उस समय सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर हुई थी। सुप्रीम कोर्ट के जज यहां आए थे और मैं उनसे मिला भी था। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश थे कि जिन पेड़ों का तना प्रभावित है, उन्हें काटा जाए और जिनके केवल पत्ते और शाखाएं प्रभावित हैं, उन्हें छोड़ा जाए। कई पेड़ जो उस समय प्रभावित माने गए थे, वे आज भी जीवित हैं। इसलिए किसी पेड़ को हटाने से पहले यह सोचना चाहिए कि क्या हटाना जरूरी है और क्या नहीं।

लगभग 100 सेमी गर्थ (परिधि) का पेड़ करीब 10,000 से 15,000 रुपए का होता है। ऐसा पेड़ 100-150 साल पुराना होता है। जब मैं 1980 में विभाग में आया था, तब साल के पेड़ के बारे में कहावत थी, “सौ साल खड़ा, सौ साल पड़ा, फिर भी नहीं सड़ा।” इसका मतलब है कि इसकी लकड़ी अत्यंत मजबूत है। पहले रेलवे स्लीपर साल की लकड़ी से बनते थे। मजबूती में यह सागौन के बराबर मानी जाती है।

हमने देखा कि साल बोरर का असर ज्यादा बड़े और पुराने पेड़ों पर होता है। इसका कारण यह है कि 40-70 सेमी गर्थ वाले पेड़ों में नरम ऊतक और अधिक रस होता है, जो कीटों के लिए अनुकूल होता है। ट्री ट्रैप तकनीक बहुत महंगी है और इतने बड़े जंगल में व्यावहारिक नहीं है। इसलिए मिश्रित वन और प्रभावित पेड़ों को हटाना ही मुख्य उपाय हैं। कीटनाशक और फफूंदनाशक का प्रयोग प्रतिबंधित है। इसलिए वह विकल्प नहीं है। 1997 की महामारी की तुलना में मौजूदा प्रभाव काफी कम है। यह तब की तुलना का केवल 10-15 प्रतिशत है।

(ओजी गोस्वामी अमरकंटक के सेवानिवृत्त सब डिवीजनल ऑफिसर हैं)

Down to Earth- Hindi
hindi.downtoearth.org.in