हिमालय राज्यों में आपदाओं से निपटने के लिए बजट में प्रावधान नहीं: हिमालय नीति अभियान

स्पेशल कैटिगरी स्टेट के लिए रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट का प्रावधान 16वें वित्त आयोग ने समाप्त कर दिया गया है, जिससे हिमाचल प्रदेश को हर वर्ष लगभग 10,000 करोड़ रुपए का नुकसान होगा
Photo: Rohit Prashar
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केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण से जलवायु परिवर्तन की मार से जूझ रहे हिमालयी राज्यों के लिए विशेष बजट की मांग करने वाले हिमालय नीति अभियान ने केंद्रीय बजट 2026-27 से निराशा जाहिर करते हुए कहा है कि आपदाओं से निपटने के लिए इस बजट में कोई विशेष प्रावधान नहीं किया गया है।

हिमालय नीति अभियान के संयोजक गुमान सिंह का कहना है कि बजट में हिमाचल, जम्मू कश्मीर और उत्तराखंड में जो सस्टेनेबल माउंटेन टूरिज्म ट्रेल्स की बात की गई है। वह असल में क्या है और इसका पर्यावरणीय व दूसरे क्या प्रभाव होंगे, उस पर पूरी जानकारी होने के बाद विचार किया जा सकता है l दूसरी घोषणा हिमालय क्षेत्र में अखरोट, बादाम और चिलगोजे की खेती को बढ़ाने की है जो एक बड़ा मजाक के अतिरिक्त कुछ नहीं है l उनका सवाल है कि क्या यह बजट पहाड़ी राज्यों की भूमि को टूरिज्म व अन्य बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण की लिए उपयोग की शुरुआत है l

गुमान सिंह के अनुसार, भारत-न्यूजीलैंड टैरिफ समझौते के बाद सेब की फसल की कीमतें गिरेंगी। यूरोपीय यूनियन के साथ समझौते के बाद खेती और कृषि बीज संबंधी कानून आ रहे हैं l ऐसे में हिमाचल के सेब व अन्य फल उत्पादकों और किसानों के हितों की रक्षा कैसे होगी l उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के लिए यह बजट निराशाजनक रहा। स्पेशल कैटिगरी स्टेट के लिए रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (आरडीजी) का जो प्रावधान 75 वर्षों से था, उसे 16वें वित्त आयोग ने समाप्त कर दिया गया है, जिससे प्रदेश को हर वर्ष लगभग 10,000 करोड़ रुपए का नुकसान होगा।

हिमालय नीति अभियान की ओर से केंद्रीय वित्त मंत्री को पत्र लिखकर हिमालय क्षेत्र के लिए विशेष बजट प्रावधान करने के लिए अनुरोध किया गया था ताकि जलवायु परिवर्तन के कारण प्राकृतिक आपदाएं से हो रहे नुकसान से निपटा जा सके।

वित्तमंत्री को भेजे पत्र में कहा गया था कि हिमालय क्षेत्र में बादल फटना, अचानक बाढ़, भूस्खलन, ग्लेशियर झील फटने से बाढ़ (ग्लोफ), जंगल की आग, भूकंप और जलवायु परिवर्तन के कारण पानी की कमी से भारतीय हिमालयी राज्यों में जीवन, आजीविका, बुनियादी ढांचे और नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को बुरी तरह प्रभावित किया है। इस क्षेत्र की पारिस्थितिक संवेदनशीलता और भौगोलिक स्थिति को देखते हुए केंद्रीय बजट में विशेष रूप से हिमालय क्षेत्र के लिए विशेष और सुरक्षित प्रावधानों की तत्काल आवश्यकता है, आपदाओं की रोकथाम, तैयारी, प्रतिक्रिया, पुनर्वास और दीर्घकालिक लचीलेपन पर ध्यान केंद्रित किया जा सके।

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