

संरक्षित क्षेत्रों में 20 परियोजनाओं को पर्यावरण मंजूरी, सरकार का विकास और पर्यावरण संरक्षण के संतुलन पर जोर देने का दावा।
वन भूमि उपयोग के 775 प्रस्तावों की समीक्षा, 378 मामलों को केंद्र सरकार की सैद्धांतिक मंजूरी की सिफारिश।
देश में ई-वेस्ट और बैटरी रीसाइक्लिंग क्षमता बढ़ी, सीपीसीबी पोर्टल पर सैकड़ों रीसाइक्लर पंजीकृत।
अल नीनो के मजबूत होने की आशंका, 2026 मानसून पर मौसम वैज्ञानिकों ने लगातार निगरानी शुरू की।
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी बढ़ी, वनीकरण और प्रदूषण नियंत्रण योजनाओं से पर्यावरण संरक्षण प्रयास तेज।
संरक्षित क्षेत्रों में पर्यावरण मंजूरी
सदन में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में आज, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए कहा कि देश में विकास कार्यों और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए सरकार पर्यावरण मंजूरी की प्रक्रिया अपनाती है। वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान ऐसे 20 बुनियादी ढांचा परियोजनाओं या गतिविधियों को पर्यावरण की मंजूरी दी गई, जिनके स्थल पूरी तरह या आंशिक रूप से संरक्षित क्षेत्र, पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र या पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र में स्थित थे।
सिंह ने बताया कि ऐसी परियोजनाओं को मंजूरी देते समय पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन किया जाता है और आवश्यक नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाता है। इसका उद्देश्य विकास कार्यों के साथ-साथ वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा करना है।
पेड़ों की कटाई और वन भूमि का उपयोग
पेड़ों को काटे जाने को लेकर सदन में उठे एक और सवाल के जवाब में आज, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में बताया कि वन भूमि को गैर-वन कार्यों के लिए उपयोग करने से पहले केंद्र सरकार की मंजूरी आवश्यक होती है। वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम, 1980 के तहत गठित सलाहकार समिति (इस प्रकार के प्रस्तावों की जांच करती है।
जुलाई 2023 से मई 2026 तक सलाहकार समिति ने वन भूमि के उपयोग से जुड़े 775 प्रस्तावों पर विचार किया। इनमें से 378 प्रस्तावों को केंद्र सरकार की ‘सैद्धांतिक’ या पहले चरण की मंजूरी देने की सिफारिश की गई। यह कुल प्रस्तावों का लगभग 48.77 प्रतिशत है।
सिंह ने कहा कि वन भूमि के उपयोग से जुड़े निर्णय पर्यावरणीय नियमों और वन संरक्षण को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं। सरकार का प्रयास है कि विकास परियोजनाओं के कारण होने वाले वन नुकसान की भरपाई पौधरोपण और अन्य संरक्षण कार्यों के माध्यम से की जाए।
रीसाइक्लिंग ढांचे का विस्तार
सदन में उठे एक अन्य प्रश्न का उत्तर देते हुए आज, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए कहा कि बढ़ते कचरे को कम करने और संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए देश में रीसाइक्लिंग व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक कचरे (ई-वेस्ट) और बैटरी कचरे के पुनर्चक्रण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
सिंह ने बताया कि 23 जुलाई 2026 तक केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के ई-वेस्ट विस्तारित उत्पादक जिम्मेदारी (ईपीआर) पोर्टल पर 406 ई-वेस्ट रीसाइक्लर पंजीकृत थे। इनमें पुराने सौर फोटोवोल्टिक मॉड्यूल के पुनर्चक्रण करने वाली इकाइयां भी शामिल हैं। इनकी कुल वार्षिक प्रसंस्करण क्षमता 40.14 लाख मीट्रिक टन है।
इसी प्रकार, सीपीसीबी के बैटरी वेस्ट ईपीआर पोर्टल पर 57 लिथियम-आयन बैटरी रीसाइक्लर पंजीकृत हैं, जिनकी कुल वार्षिक क्षमता 5.17 लाख मीट्रिक टन है।
भारतीय मानसून पर अल नीनो का प्रभाव
देश में मानसून पर अल नीनो के प्रभाव को लेकर उठाए गए एक प्रश्न के जवाब में आज, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में कहा कि अल नीनो एक समुद्री और वायुमंडलीय घटना है, जिसका प्रभाव दुनिया के मौसम पर पड़ता है। इसे भूमध्यरेखीय मध्य प्रशांत महासागर के समुद्री सतह तापमान में बदलाव के आधार पर कमजोर, मध्यम, मजबूत और बहुत मजबूत श्रेणियों में बांटा जाता है।
उन्होंने बताया कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून मौसम के दौरान अल नीनो परिस्थितियों के विकसित होने का अनुमान लगाया है।
जून 2026 में अल नीनो की स्थिति कमजोर थी, लेकिन जुलाई 2026 में यह मध्यम स्तर तक मजबूत हुई। अक्टूबर से दिसंबर 2026 के दौरान इसके और मजबूत होने की संभावना जताई गई है। हालांकि भारत में इसका वास्तविक प्रभाव समुद्र और वातावरण के आपसी संबंधों सहित कई अन्य कारणों पर निर्भर करेगा।
जलवायु परिवर्तन और वनीकरण कार्यक्रम
सदन में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में आज, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में बताया कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सरकार वनीकरण और पर्यावरण सुधार कार्यक्रम चला रही है। ग्रीन इंडिया मिशन के तहत समुदायों की भागीदारी से 1,84,467 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधरोपण और पारिस्थितिकी सुधार कार्य किए गए हैं। इसमें स्थानीय पर्यावरण के अनुसार देशी और उपयुक्त प्रजातियों के पौधों को प्राथमिकता दी गई है।
नगर वन योजना के तहत वर्ष 2020-21 से 2025-26 तक 19,348.59 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। इसमें वर्ष 2025-26 के दौरान 3,712.36 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल है। इसके अलावा 2023 में शुरू की गई मिष्टी योजना के तहत 9,536 हेक्टेयर खराब हो चुके मैंग्रोव क्षेत्रों के पुनर्स्थापन का कार्य किया जा रहा है। राष्ट्रीय कैम्पा और प्रतिपूरक वनीकरण कार्यक्रम के तहत भी पौधरोपण किया गया है। वर्ष 2019-20 से 2024-25 के बीच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 2,00,407.56 हेक्टेयर क्षेत्र में वनीकरण किया गया।
टायर पायरोलिसिस इकाइयों से प्रदूषण
सदन में सवालों का सिलसिला जारी रहा। एक और सवाल के जवाब देते हुए आज, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में कहा कि टायर के कचरे के निपटान और उससे होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने टायर पायरोलिसिस इकाइयों की निगरानी बढ़ाई है। सिंह ने बताया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और प्रदूषण नियंत्रण समितियों के साथ मिलकर देशभर में इन इकाइयों का निरीक्षण किया है।
उन्होंने 36 राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और समितियों से हासिल की गई जानकारी का हवाला दिया। जिसमें कहा गया है कि देश में कुल 695 टायर पायरोलिसिस इकाइयां हैं। इनमें से 440 इकाइयां अपशिष्ट टायर से तेल, गैस और चारकोल बनाने के लिए तय मानकों का पालन कर रही हैं, जबकि 255 इकाइयां नियमों का पालन नहीं कर रही हैं।
इन 255 अनुपालन न करने वाली इकाइयों में से 25 ने स्वयं काम बंद कर दिया है और 33 इकाइयों को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों ने बंद कराया है। बाकी 197 इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है।
इलेक्ट्रिक वाहनों का बढ़ता उपयोग
देश में इलेक्ट्रिक वाहनों का बढ़ते उपयोग को लेकर सदन में पूछे गए एक सवाल के जवाब में आज, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन जयराम गडकरी ने लोकसभा में कहा कि भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। इसका मुख्य कारण कम संचालन लागत और इन वाहनों से निकलने वाला शून्य टेलपाइप उत्सर्जन है। पेट्रोल और डीजल वाहनों की तुलना में इलेक्ट्रिक वाहन पर्यावरण के लिए अधिक अनुकूल माने जाते हैं।
गडकरी ने वाहन के आंकड़ों का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2019-20 में 0.71 प्रतिशत थी, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 8.26 प्रतिशत हो गई है। गडकरी ने कहा सरकार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए चार्जिंग सुविधाओं और स्वच्छ परिवहन व्यवस्था के विकास पर भी काम कर रही है।
असम में नदी किनारे कटाव
सदन में उठाए गए एक सवाल के जवाब में आज, जल शक्ति मंत्रालय में राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने लोकसभा में बताया कि असम में ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे होने वाला कटाव एक गंभीर समस्या है। केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) गुवाहाटी के माध्यम से ब्रह्मपुत्र नदी के स्वरूप में बदलाव का अध्ययन किया है।
चौधरी ने कहा कि वर्ष 2003-2005 और 2008-2011 के बीच ब्रह्मपुत्र नदी में लगभग 252.6 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का कटाव हुआ, जबकि लगभग 118.6 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में गाद जमा हुई। नदी कटाव के कारण लोगों के घर, कृषि भूमि और प्राकृतिक संसाधन प्रभावित होते हैं। सरकार नदी प्रबंधन और संरक्षण के लिए विभिन्न उपायों पर काम कर रही है।