आकाश में छेद

चीन द्वारा प्रतिबंधित क्लोरोफ्लोरोकार्बन का अवैध और व्यापक उपयोग मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल को कमजोर बना रहा है
यूके स्थित एक गैर-लाभकारी संस्था, एनवायरमेंटल इंवेस्टीगेशन एजेंसी की एक जांच में पाया गया है कि चीनी फोम विनिर्माण कंपनियां अब भी प्रतिबंधित सीएफसी-11 का उपयोग करती हैं
यूके स्थित एक गैर-लाभकारी संस्था, एनवायरमेंटल इंवेस्टीगेशन एजेंसी की एक जांच में पाया गया है कि चीनी फोम विनिर्माण कंपनियां अब भी प्रतिबंधित सीएफसी-11 का उपयोग करती हैं
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इस वर्ष जनवरी में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच उत्साह का माहौल था। दरअसल, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने एक रिपोर्ट दी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, 2005 से ओजोन परत में छिद्र करने वाले पदार्थों (ओडीएस), विशेष रूप से क्लोरीन में गिरावट आ रही थी। नासा ने बताया, “हमने स्पष्ट रूप से देखा कि क्लोरोफ्लोरोकार्बन (सीएफसी) से निकलने वाला क्लोरीन ओजोन छिद्र में नीचे जा रहा है और इसके कारण ओजोन परत में छिद्र करने वाले पदार्थों में कमी आ रही है।”

धरती पर जीवन के लिए ओजोन का महत्व बहुत है। धरती पर आने वाली सूरज की किरणों में हानिकारण यूवी किरणें (पराबैंगनी किरणें) भी होती हैं। इन किरणों से त्वचा का कैंसर और मोतियाबिंद के रोग होते हैं। ये किरणें प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर सकती हैं और पौधों को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं। धरती से 50 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्ट्रेटोस्फेरिक क्षेत्र में ओजोन की परत होती है जो इन किरणों को धरती तक नहीं पहुंचने देती। सीएफसी रसायन से इस प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करता है। वातावरण में यह सीएफसी टूटकर ओजोन परत को नष्ट करता है।

इस हानिकारण रसायन में गिरावट का श्रेय मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल को दिया गया। यह ओजोन परत को नुकसान से बचाने के लिए 1987 में की गई वैश्विक संधि थी। इसके तहत, आधिकारिक तौर पर सभी सीएफसीएस का उत्पादन और खपत 1996 तक विकसित देशों में और 2010 तक विकासशील देशों में समाप्त होना था। लेकिन यह उत्साह लंबे समय तक नहीं टिका। कुछ महीनों के भीतर ही मई में, एक साइंस जर्नल (वैज्ञानिक पत्रिका) नेचर में एक शोध प्रकाशित हुआ। इस शोध ने बताया कि 2012 और 2016 के बीच प्रतिबंधित ओडीएस, सीएफसी-11 या ट्राइक्लोरोफ्लोरोमिथेन के उत्सर्जन में 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

सीएफसी-11 में न केवल ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने की उच्च क्षमता है बल्कि इसे वैश्विक तापमान के लिए कार्बन डाइऑक्साइड के मुकाबले 4,750 गुना अधिक शक्तिशाली कारण भी माना जाता है। दोषी चीन हालांकि सीएफसी-11 के बढ़ते उत्सर्जन के पीछे कई कारण हो सकते हैं। लेकिन नेचर पत्रिका के शोध ने इस मामले की आगे की जांच के लिए ब्रिटेन स्थित गैर-लाभकारी संगठन एनवायरमेंटल इंवेस्टीगेशन एजेंसी (ईआईए) को प्रेरित किया। जुलाई में यह पाया गया कि चीन का फोम बनाने वाला उद्योग अवैध रूप से सीएफसी-11 का उपयोग ब्लोइंग एजेंट के रूप में कर रहा था। चूंकि अन्य विकल्पों की तुलना में सीएफसी-11 सस्ता है, इसलिए उद्योग पॉलीयूरेथेन फोम या पीयू फोम बनाने के लिए इसका उपयोग करते हैं। इसका इमारतों, रेफ्रीजरेटर, फ्रीजर, कूलर और हीटर में इन्सुलेशन सामग्री के रूप में व्यापक उपयोग किया जाता है। चार दशकों से अधिक समय तक ओजोन छिद्र लगातार बढ़ता जा रहा था। हालांकि, ऐसे समय में, जब यह ठीक होने का संकेत देने लगा, तब ईआईए की जांच ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चौंका दिया है।

सीएफसी पर प्रतिबंध के बावजूद, चार साल के दौरान उत्सर्जन में अचानक बढ़ोतरी चीन में पर्यावरण नियमों में अपनाई जा रही लापरवाही दिखाती है। चीन में वैश्विक फोम उद्योग का एक तिहाई से अधिक का उत्पादन होता है। मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के बहुपक्षीय फंड की कार्यकारी समिति के अनुसार, चीन में 3,500 से अधिक फोम विनिर्माण इकाइयां हैं।

अपनी जांच के एक हिस्से के रूप में, ईआईए ने 21 चीनी फोम निर्माताओं का सर्वेक्षण किया और पाया कि 18 इकाइयां एचसीएफसी-141बी जैसे हाइड्रोक्लोरोफ्लोरोकार्बन के उच्च लागत से बचने के लिए अवैध रूप से सीएफसी-11 का उपयोग कर रही थीं। इन इकाइयों को 2026 तक चीन में चरणबद्ध तरीके से बंद किया जाना है।

यह पहली बार नहीं है कि जब चीन प्रतिबंधित ओडीएस के व्यापार, खपत और अवैध उत्पादन में लगा हुआ है। इससे पहले भी 2009 और 2013 के बीच, ईआईए और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की जांच में पाया गया था कि ओडीएस वैश्विक काले बाजार का 12वां सबसे बड़ा हिस्सा है। यह 2011 में 67.7 मिलियन अमेरिकी डॉलर का व्यापार था। और जैसे ही दुनिया एचसीएफसी के फेज आउट चरण (बन्द करने) में पहुंची, गैसों के अवैध उत्पादन और तस्करी के रुझान बदलते चले गए।

गैरकानूनी तस्करी नेटवर्क पर ईआईए द्वारा 2016 के एक अपडेट में पाया गया कि सीएफसी के अवैध व्यापार में कमी आई है, लेकिन काले बाजार में इसे एचसीएफसी द्वारा बदल दिया गया। 2014 में, चीन द्वारा रिपोर्ट की गई निर्यात मात्रा की तुलना में, एचसीएफसी-22 या क्लोरोडाइफ्लोरोमिथेन की आपूर्ति में लगभग 30 प्रतिशत का अंतर पाया गया। चीन वैश्विक एचसीएफसी उत्पादन के लगभग 70 प्रतिशत और खपत के 50 प्रतिशत से अधिक के लिए जिम्मेदार है।

स्थिति पर टिप्पणी करते हुए, ईआईए जलवायु अभियान लीडर क्लेयर पेरी ने स्वीकार किया कि गैरकानूनी ओडीएस व्यापार का आकलन करना बेहद मुश्किल है। पेरी कहते हैं, “इस मुद्दे के समाधान के लिए बहुत अधिक काम करने की जरूरत है। वर्तमान डेटा अपर्याप्त है, कई अवैध ओडीएस प्राप्ति की रिपोर्ट नहीं करते हैं और अधिकांश पर्याप्त निगरानी के लिए कस्टम्स और अन्य प्रवर्तन अधिकारियों को पर्याप्त संसाधन नहीं देते हैं। मुझे उम्मीद है कि हालिया सीएफसी-11 मुद्दा संबंधित पार्टियों के लिए एक चेतावनी का काम करेगा, जो मजबूत उपायों की वकालत करेंगे।”

संतुलन का संकट

अपनी शुरुआत के बाद से मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल ने ओजोन परत को हुए नुकसान को दूर करने की कोशिश की है। चीन ओडीएस का दुनिया का सबसे बड़ा उपभोक्ता भी है। 1998 में अपने चरम पर यह खपत 167,000 टन थी। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, 2013 तक यह आंकड़ा 15,690 टन तक गिर गया। तुलनात्मक रूप से, ओडीएस का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता दक्षिण कोरिया है, जिसकी वार्षिक खपत 2,000 टन से अधिक थी। विशेषज्ञों का कहना है कि एक चीन जैसे महत्वाकांक्षी राष्ट्र के लिए अर्थव्यवस्था और पर्यावरण को संतुलित करना एक कठिन मामला है। चूंकि पिछले तीन दशकों में चीनी अर्थव्यवस्था में उछाल आया, इसलिए इसे पारिस्थितिकीय नुकसान का सामना करना पड़ा।

वर्तमान में, चीन दुनिया भर में ग्रीनहाउस गैस का सबसे बड़ा उत्सर्जक है और वह हवा, पानी और मिट्टी से संबंधित प्रदूषण से निपटने के लिए कई चुनौतियों का सामना करता है। अमेरिकन थिंक टैंक काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशनशिप का कहना है कि चीन की पर्यावरणीय क्षति इसके सकल राष्ट्रीय आय के 3 से 10 प्रतिशत के बीच है। लाखों लोगों की असमय मौत, कैंसर जैसी बीमारियों के बढ़ते बोझ ने चीन को पर्यावरणीय नियमों को मजबूत करने के लिए प्रेरित किया है। 2015 से चीन देश ने नए कानून लाकर अपने मौजूदा पर्यावरण संरक्षण तंत्र को मजबूत किया है।

स्थिति में सुधार

अंतरराष्ट्रीय जांच के बीच, चीन ने ग्रीन विनियमनों के अनुपालन के लिए अपने पारिस्थितिकी और पर्यावरण मंत्रालय (एमईई) को नए तरीके से मजबूत बनाया है। पर्यावरणीय गिरावट के लिए कठोर जुर्माना और प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों पर कठोर जुर्माना के प्रावधान किए गए हैं।

इस तरह, चीन ने अपने देश में 10 साल की एक पर्यावरणीय नीति पेश की है। इसने गड़बड़ी करने वाले उद्योगों का द्विवार्षिक निरीक्षण करने का भी फैसला किया है। साल की शुरुआत तक, चीन ने 30,000 से अधिक कंपनियों और 6,000 अधिकारियों को दंडित किया। चीन अब लगातार पर्यावरण अपराधी बने रहने की अपनी पहचान को सुधारने की कोशिश कर रहा है। फिर भी, ईआईए की नवीनतम जांच सरकार के लिए शर्मिंदगी से कम नहीं है। ईआईए के खुलासे के बाद पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए चीनी सरकार ने तेजी से कार्य किया। ईआईए रिपोर्ट के प्रकाशन के कुछ ही दिनों के भीतर, चीन ने उल्लंघन करने वालों से निपटने के लिए एक विशेष कार्य बल के गठन की घोषणा की और अवैध सीएफसी-11 के स्रोत को ट्रैक करने की प्रतिज्ञा ली।

एमईई के एक प्रवक्ता ने बयान जारी करते हुए कहा कि चीन ने हमेशा ओडीएस के संबंध में आवश्यक कानूनी प्रवर्तन को महत्वपूर्ण माना है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में यह विशेष व व्यापक कार्रवाई है। इसका उद्देश्य ओडीएस, विशेष रूप से सीएफसी-11 से जुड़ी अवैध गतिविधियों को ढूंढना और उससे मुकाबला करना है। साथ ही इसका मकसद कानूनों व कार्रवाई के अनुपालन नतीजों को सुनिश्चित करना है। सरकार ने पुष्टि की है कि गैरकानूनी गैस स्रोतों की पहचान करने के लिए अतिरिक्त संसाधन खर्च किए जाने हैं।

सीएफसी-11 के अवैध उपयोग पर उपजे इस विवाद को सुलझाने के लिए चीन ने हर संभव प्रयास करने का वादा किया है। लेकिन, मुद्दा मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल और ओजोन परत को होने वाले नुकसान व रोकथाम से निपटने में इसकी प्रभावशीलता पर आकर ठहर गया है। इस प्रोटोकॉल को निरंतर राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत है। इसके लिए विकासशील देशों को वित्तीय सहायता में वृद्धि किए जाने की आवश्यकता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे ओडीएस खत्म करने के क्रम में भविष्य की चुनौतियों का सामना कर सकें।

ईआईए की रिपोर्ट के आने के एक सप्ताह बाद विएना में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल की बैठक हुई। इस ओपन एंडेड वर्किंग ग्रुप की 40वीं बैठक में प्रतिनिधियों को सीएफसी-11 वृद्धि के मुद्दे ने चिंतित कर दिया। बैठक की शुरुआत में ही आत्मसंतोष भाव को लेकर सावधानी अपनाने और नई ताकत व ऊर्जा से प्रोटोकॉल को लागू करने की बात की गई।

ओजोन सचिवालय की कार्यकारी सचिव, टीना बर्मपिली ने कहा, “यह वो समय है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय के तंत्र पहले से कहीं अधिक मूल्यवान हैं। हम एक सेकंड के लिए भी हमारी सतर्कता को आराम नहीं दे सकते। सीएफसी-11 का अवैध खपत और उत्पादन अब निर्णायक कार्रवाई की मांग करता है।”

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