

वाहन स्क्रैपेज नीति के तहत 21 राज्यों में 129 केंद्रों द्वारा 4.30 लाख पुराने वाहन स्क्रैप किए गए।
भूस्खलन के खतरों को कम करने की योजना चार पहाड़ी राज्यों में आपदा तैयारी और भविष्य की भूस्खलन रोकथाम क्षमता बढ़ाने हेतु लागू।
सीएसआईआर ने पराली से जैव-बिटुमेन विकसित किया, जिससे सड़क निर्माण में उपयोग और 4000 करोड़ विदेशी मुद्रा बचत संभव।
प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से 22 लाख से अधिक सोलर सिस्टम लगाए गए
उत्तर-पूर्वी राज्यों में शिक्षा और स्वास्थ्य परियोजनाओं हेतु 3600 करोड़ रुपये से अधिक की योजनाएं स्वीकृत की गई।
वाहन स्क्रैपेज नीति
संसद का बजट सत्र जारी है, इस बीच सदन में उठाए गए एक सवाल का जवाब देते हुए आज, केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन जयराम गडकरी ने राज्यसभा में बताया कि मंत्रालय द्वारा लागू वाहन स्क्रैपेज नीति का उद्देश्य पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को हटाना है।
गडकरी ने कहा, 30 जनवरी 2026 तक देश के 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 129 पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधाएं कार्यरत हैं। इन केंद्रों के माध्यम से अब तक 4,30,306 वाहनों को स्क्रैप किया जा चुका है। यह नीति पर्यावरण संरक्षण, ईंधन बचत और ऑटोमोबाइल उद्योग को बढ़ावा देने में सहायक है।
भूस्खलन के खतरों को कम करने की योजना
भूस्खलन को लेकर सदन में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में आज, गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में कहा कि देश के पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन एक बड़ी समस्या है। इसे ध्यान में रखते हुए गृह मंत्रालय ने साल 2019 में भूस्खलन जोखिम न्यूनीकरण योजना (एलआरएमएस) को मंजूरी दी। यह योजना सिक्किम, मिजोरम, नागालैंड और उत्तराखंड के लिए लागू की गई है।
इस योजना का उद्देश्य इन राज्यों को आपदा से निपटने के लिए तैयार करना और भविष्य में भूस्खलन रोकने की क्षमता विकसित करना है।
पराली से जैव-बिटुमेन का स्वदेशी विकास
सदन में उठे एक सवाल के जवाब में आज, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा को बताया कि पराली जलाने की समस्या को कम करने की दिशा में वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
उन्होंने कहा कि सीएसआईआर-सीआरआरआई, नई दिल्ली और सीएसआईआर-आईआईपी, देहरादून ने मिलकर पराली से जैव-बिटुमेन बनाने की स्वदेशी तकनीक विकसित की है। इस तकनीक से धान की पराली को पायरोलिसिस प्रक्रिया द्वारा जैव-तेल में बदला जाता है, जिससे सड़क निर्माण में उपयोग होने वाला बिटुमेन तैयार किया जाता है। यह जैव-बिटुमेन पारंपरिक बिटुमेन का 30 प्रतिशत तक विकल्प बन सकता है और इससे हर साल लगभग 4000 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हो सकती है।
हरियाणा में परमाणु ऊर्जा संयंत्र का पर्यावरण प्रभाव अध्ययन
सदन में पूछे गए एक प्रश्न का उत्तर देते हुए आज, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में जानकारी देते हुए कहा कि हरियाणा के गोरखपुर में प्रस्तावित गोरखपुर नुक्लेअर परमाणु ऊर्जा परियोजना (जीएचएवीपी) के लिए विस्तृत पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) किया गया।
उन्होंने कहा कि यह अध्ययन केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार किया गया। इस अध्ययन में जल संसाधनों पर किसी भी बुरे प्रभाव के आसार नहीं पाए गए साल 2013 में परियोजना को पर्यावरणीय स्वीकृति प्रदान की गई थी।
उत्तर-पूर्वी राज्यों में स्वास्थ्य और शिक्षा ढांचा
उत्तर-पूर्वी राज्यों में स्वास्थ्य और शिक्षा को लेकर सदन में उठे एक सवाल के जवाब में आज, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री सुकांता मजूमदार ने लोकसभा में बताया कि मंत्रालय के द्वारा शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में कई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
उन्होंने कहा कि साल 2022-23 से 2025-26 तक 49 शिक्षा परियोजनाएं तथा 26 स्वास्थ्य परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इन परियोजनाओं की कुल लागत 3601.06 करोड़ रुपये है। इससे उत्तर-पूर्वी राज्यों में बुनियादी सुविधाओं में सुधार होगा।
प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना
सदन में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में आज, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा तथा विद्युत मंत्रालय में राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने लोकसभा में कहा कि देश में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना फरवरी 2024 में शुरू की गई।
30 जनवरी 2026 तक 22,65,521 रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं, जिससे 28,24,518 परिवारों को लाभ मिला है। इसके अंतर्गत 16,061.12 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता दी गई है।
हरियाणा में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन
हरियाणा में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को लेकर सदन में उठाए गए एक और सवाल के जवाब में आज, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा तथा विद्युत मंत्रालय में राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने लोकसभा में बताया कि हरियाणा राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ी प्रगति हुई है।
31 दिसंबर 2025 तक हरियाणा में 2912.13 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित की जा चुकी है। इसमें सौर, जैव-ऊर्जा और लघु जल विद्युत परियोजनाएं शामिल हैं। इसके साथ ही पीएम-कुसुम योजना के तहत सौर पंपों की स्थापना भी तेजी से की जा रही है।
ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर
सदन में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में आज, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा तथा विद्युत मंत्रालय में राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने लोकसभा में जानकारी देते हुए कहा कि ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर योजना का उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा को राष्ट्रीय ग्रिड से जोड़ना है।
मंत्रालय के अनुसार, बिहार में कोई परियोजना नहीं है, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश में जीएसी पहला चरण पूरा हो चुका है। उत्तर प्रदेश में जीएसी का दूसरे चरण के अंतर्गत नई ट्रांसमिशन लाइनें स्वीकृत की गई हैं।