स्थानीय निकायों को 5 साल में 8 लाख करोड़ अनुदान देने की सिफारिश

केंद्रीय वित्त आयोग ने शहरीकरण को बढ़ावा देने एवं स्थानीय निकायों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए कई महत्वपूर्ण सिफारिशें की हैं
वित्त आयोग ने शहरों की ड्रेनेज व्यवस्था में सुधार की सिफारिश की है ; फोटो: आईस्टॉक
वित्त आयोग ने शहरों की ड्रेनेज व्यवस्था में सुधार की सिफारिश की है ; फोटो: आईस्टॉक
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सारांश
  • 16वें वित्त आयोग ने अगले पांच वर्षों में ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों को 7,91,493 करोड़ रुपये अनुदान देने की सिफारिश की है।

  • आयोग ने शहरीकरण को बढ़ावा देने के लिए 10,000 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि तय की है।

  • संविधान संशोधन की सिफारिश करते हुए आयोग ने स्थानीय निकायों की आय बढ़ाने पर जोर दिया है।

16वें वित्त आयोग ने देश के ग्रामीण व शहरी स्थानीय निकायों को अगले पांच साल (वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31) के लिए कुल 7,91,493 करोड़ रुपए के अनुदान की सिफारिश की है। इसके अलावा वित्त आयोग ने स्थानीय निकायों को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण सिफारिशें भी की हैं। 

शहरीकरण को बढ़ावा 

आयोग ने ग्रामीण क्षेत्रों को शहरी क्षेत्रों में बदलने को प्रोत्साहन देने का फैसला लिया है और शहरीकरण प्रोत्साहन राशि कुल 10,000 करोड़ रुपए तय की गई है। यह पूरी अवधि के लिए होगी और प्रति व्यक्ति एकमुश्त पात्रता राशि 2,000 रुपए रखी गई है, जो 2011 की जनगणना पर आधारित होगी। 

यह राशि तब दी जाएगी जब राज्य उपनगरीय गांवों को पास के बड़े शहरी निकायों में शामिल करेगा, जिनकी मौजूदा आबादी कम से कम एक लाख हो, और साथ ही क्षेत्र को ग्रामीण से शहरी में बदलाव के लिए एक उपयुक्त नीति भी बनाएगा।

आयोग की यह सिफारिश ऐसे समय में आई है, जब कई राज्यों में पंचायतों को शहरी निकायों में बदलने का लोग विरोध कर रहे हैं। वहीं आयोग ने शहरीकरण को तेज करने को अपने प्रमुख उद्देश्यों में शामिल किया है। 

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वित्त आयोग ने शहरों की ड्रेनेज व्यवस्था में सुधार की सिफारिश की है ; फोटो: आईस्टॉक

आयोग का कहना है, “शहरीकरण आर्थिक विकास को गति देता है। शहरों में भौतिक व मानव संसाधन, बुनियादी ढांचा, आर्थिक गतिविधियां एवं रोजगार के अवसर एक जगह पर उपलब्ध होते हैं।” 

हालांकि आयोग ने शहरी विकास को बढ़ावा देने के लिए दो महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। एक- शहरों में जल निकासी की व्यवस्था करना और दूसरा ग्रामीण निकायों को शहरी निकायों का कानूनी दर्जा देने में देरी न करना है। क्योंकि दोनों वजहों से इन क्षेत्रों में अनियोजित विकास, कमजोर बुनियादी ढांचा और नागरिकों को खराब सेवाएं मिलती हैं। 

संविधान में संशोधन की सिफारिश
वित्त आयोग ने एक और महत्वपूर्ण सिफारिश करते हुए संविधान में संशोधन की सिफारिश की है। आयोग के मुताबिक संविधान के अनुच्छेद 280(3)(बीबी) और 280(3)(सी) में कहा गया है कि केंद्रीय वित्त आयोग को ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों से जुड़ी सिफारिशें राज्य वित्त आयोगों की सिफारिशों के आधार पर करनी चाहिए। 

लेकिन आयोग की सिफारिश है कि इस वाक्यांश को संविधान संशोधन के जरिए इन अनुच्छेदों से हटा दिया जाए, ताकि केंद्रीय वित्त आयोग एक समान और स्वतंत्र मानदंडों के आधार पर अपनी सिफारिशें कर सके।

संविधान यह भी कहता है कि केंद्रीय वित्त आयोग को अपनी सिफारिशें राज्य वित्त आयोगों की सिफारिशों के आधार पर करनी चाहिए। इसलिए ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों तक संसाधनों के हस्तांतरण में राज्य वित्त आयोगों की भूमिका बहुत अहम है।

लेकिन आयोग ने पाया कि कई राज्य समय पर राज्य वित्त आयोगों का गठन ही नहीं करते। इसके अलावा जो राज्य वित्त आयोगों की रिपोर्टें उपलब्ध हैं, उनमें काम करने का तरीका, पद्धति और मुद्दों का दायरा एक जैसा नहीं है। इस वजह से इन रिपोर्टों का उपयोग धन के बंटवारे से जुड़ी सिफारिशें तैयार करने में नहीं किया जा सका, क्योंकि ऐसे बंटवारे के लिए समान और स्पष्ट मानदंडों की जरूरत होती है।

निकायों की आय जुटाने की क्षमता कमजोर 

आयोग के मुताबिक वर्तमान स्थिति यह है कि स्थानीय निकायों द्वारा अपनी आय जुटाने की क्षमता अभी भी कमजोर बनी हुई है। भारत में स्थानीय निकायों की अपनी आय देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का केवल लगभग 0.4 प्रतिशत ही है, जो बहुत कम है। ऐसे में स्थानीय निकाय पूरी तरह से केंद्र व राज्यों की सहायता पर निर्भर रहते हैं। इसलिए आयोग की सिफारिश है कि निकायों को अपनी आय बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।

क्या है वित्त आयोग 

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 280 के अनुसार राष्ट्रपति हर पांच साल या आवश्यकता पड़ने पर उससे पहले एक वित्त आयोग का गठन करते हैं। इसका उद्देश्य यह तय करना होता है कि देश में एकत्र किए गए करों का बंटवारा कैसे किया जाए। वित्त आयोग यह सिफारिश करता है कि केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच करों को किस अनुपात में बांटा जाए। इसे केंद्र और राज्यों के बीच ऊर्ध्वाधर हस्तांतरण कहा जाता है। इसके अलावा आयोग यह भी तय करता है कि राज्यों को मिलने वाले कुल हिस्से को अलग-अलग राज्यों के बीच कैसे बांटा जाए, जिसे क्षैतिज हस्तांतरण कहा जाता है।

आयोग यह भी सुझाव देता है कि किन सिद्धांतों के आधार पर केंद्र सरकार को राज्यों को राजस्व सहायता अनुदान देना चाहिए, खासकर उन राज्यों को जिन्हें अपने खर्च पूरे करने में कठिनाई होती है। इसके साथ ही वित्त आयोग यह भी देखता है कि पंचायती राज संस्थाओं और नगरपालिकाओं जैसे स्थानीय निकायों को मजबूत करने के लिए राज्यों की आय बढ़ाने के लिए क्या उपाय किए जाने चाहिए, ताकि ये स्थानीय सरकारें अपने काम ठीक से कर सकें।

वर्तमान में गठित 16वां वित्त आयोग की सिफारिशें वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू होंगी।

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