

भारत ने दुनिया के कुल जलीय जीवों का नौ प्रतिशत उत्पादन किया। इससे भारत अब चीन के बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश बन गया है। यह जानकारी फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन (एफएओ) की स्टेट ऑफ वर्ल्ड फिशरीज एंड एक्वाकल्चर 2026 की रिपोर्ट में दी गई है।
एफएओ की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने अंतर्देशीय जल से मछली पकड़ने में भी दुनिया में अब बढ़त बनाई है। उसने नदियों, झीलों और मीठे पानी के स्रोतों से 2.2 मिलियन टन उत्पादन किया। यह बांग्लादेश के 1.4 मिलियन टन से अधिक है।
एक्वाकल्चर (मछली पालन) के मामले में भारत ने जलीय जीवों के उत्पादन में दुनिया में दूसरे स्थान पर रहते अब कुल उत्पादन में 12 प्रतिशत का योगदान दिया।
चीन, इंडोनेशिया, वियतनाम और बांग्लादेश के साथ भारत उन पांच देशों के समूह का हिस्सा है जो सभी जलीय जीवों का 82 प्रतिशत उत्पादन करते हैं। ये आंकड़े तब सामने आए हैं जब 2024 में वैश्विक मछली पालन और एक्वाकल्चर उत्पादन 235 मिलियन टन के साथ अपने नए उच्चतम स्तर पर पहुंचा। इसमें 195 मिलियन टन जलीय जीव और 40 मिलियन टन शैवाल शामिल थे। यह 2022 की तुलना में 5.2 प्रतिशत की वृद्धि को दिखता है।
अकेले एक्वाकल्चर का उत्पादन रिकॉर्ड 142 मिलियन टन तक पहुंच गया है। शीर्ष पांच उत्पादक देशों ( चीन, इंडोनेशिया, भारत, वियतनाम और बांग्लादेश ) का इस उत्पादन में 84 प्रतिशत हिस्सा रहा है। जैविक रूप से पकड़ी जाने वाली समुद्री मछली की आबादी का हिस्सा 2021 में 64.5 प्रतिशत से घटकर 2023 में 62.4 प्रतिशत हो गया।
एफएओ ने इस गिरावट का कारण आंशिक रूप से कार्यप्रणाली में बदलाव को बताया। पकड़ी गई मछलियों की मात्रा के आधार पर देखें तो एफएओ द्वारा निगरानी किए गए और आंके गए स्टॉक से पकड़ी गई मछलियों में से 72.6 प्रतिशत हिस्सा प्रबंधित स्टॉक से आया था।
इससे पता चलता है कि बड़े पैमाने पर होने वाली व्यावसायिक मछली पकड़ने की गतिविधियों का प्रबंधन बेहतर होता है। हालांकि कुल मिलाकर यह रुझान एक चेतावनी का संकेत देता है क्योंकि जलीय भोजन की वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है।
रिपोर्ट के अनुसार कुल जलीय जीव उत्पादन का लगभग 67 प्रतिशत समुद्री जल से प्राप्त किया गया था, जिसे कैप्चर फिशरीज यानी प्राकृतिक स्रोतों से मछली पकड़ना और एक्वाकल्चर के बीच विभाजित किया गया था। बाकी 33 प्रतिशत हिस्सा अंदरूनी जल-स्रोतों से आया। इसमें एक्वाकल्चर का उत्पादन में सबसे बड़ा योगदान था।
रिपोर्ट में बताया गया है कि पानी में रहने वाले जीवों के कुल उत्पादन का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा इंसानों की थाली तक पहुंचने की उम्मीद है । 2023 में प्रति व्यक्ति जलीय जीवों से मिलने वाले भोजन की औसत उपलब्धता 21.1 किलोग्राम थी, जो 2024 में बढ़कर शुरुआती अनुमान के अनुसार 21.3 किलोग्राम हो गई है।
एशिया में यह उपलब्धता सबसे अधिक है। यहां प्रति व्यक्ति 26.3 किलोग्राम दर्ज की गई है। अफ्रीका में यह औसत सिर्फ 9.1 किलोग्राम है, वहीं उत्तरी अमेरिका, यूरोप और ओशिनिया में यह 20 से 22 किलोग्राम के बीच है। लैटिन अमेरिका और कैरिबियन क्षेत्र 10.1 किलोग्राम के साथ सबसे पीछे हैं।
देशों के स्तर पर देखें तो यह अंतर और भी स्पष्ट रूप से दिखता है। कुछ आबादी बहुत कम मात्रा में मछली खाती है, जबकि कुछ जगहों पर उपलब्धता प्रति व्यक्ति सालाना 100 किलोग्राम के करीब है।
2023 में जलीय जीवों से मिलने वाले भोजन की प्रति व्यक्ति उपलब्धता सबसे कम होने के बावजूद जलीय स्रोतों से मिलने वाले एनिमल प्रोटीन (जानवरों से मिलने वाले प्रोटीन) के हिस्से के मामले में अफ्रीका दुनिया में दूसरे स्थान पर रहा। इसका प्रतिशत 19 था। इससे पता चलता है कि एनिमल प्रोटीन के मुख्य स्रोत के तौर पर मछली और पानी में मिलने वाले अन्य खाद्य पदार्थों पर काफी निर्भरता है।