

बायोई3 नीति के तहत छह बायोमैन्युफैक्चरिंग हब विकसित होंगे और अगले पांच वर्षों में लगभग 1500 रोजगार के अवसर सृजित किए जाएंगे।
सरकार के अनुसार अधिकांश क्षेत्रों में तापीय बिजली संयंत्रों के आसपास वायु गुणवत्ता राष्ट्रीय मानकों के भीतर दर्ज की गई है।
राष्ट्रीय मानव-वन्यजीव संघर्ष पोर्टल से संघर्ष की घटनाओं, मुआवजा और वन्यजीवों से जुड़े आंकड़ों की बेहतर निगरानी संभव होगी।
प्रोजेक्ट लायन के तहत मई 2025 की गणना में एशियाई शेरों की संख्या बढ़कर 891 पहुंची, जो महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
जल संचय जन भागीदारी अभियान और पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना से जल संरक्षण, पेयजल उपलब्धता और सिंचाई सुविधाओं को मजबूती मिलेगी।
बायोई3 नीति से बढ़ेगा रोजगार और जैव प्रौद्योगिकी को मिलेगा बढ़ावा
संसद का मानसून सत्र लगातार जारी है। इसी बीच सदन में उठाए गए एक सवाल के जवाब में आज, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में बताया कि देश में जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए सरकार ने बायोटेक्नोलॉजी फॉर इकॉनमी, एनवायरमेंट एंड एम्प्लॉयमेंट (बायोई3) नीति लागू की है।
सिंह ने कहा कि इस नीति के तहत छह प्रमुख विषयों पर बायोमैन्युफैक्चरिंग हब और बायोफाउंड्री स्थापित किए जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य देश में जैव प्रौद्योगिकी आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना, पर्यावरण के अनुकूल उत्पादन को प्रोत्साहित करना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। सरकार का अनुमान है कि अगले पांच वर्षों में इस नीति के माध्यम से टियर-2 और टियर-3 शहरों में लगभग 1500 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इससे छोटे शहरों में उद्योगों का विकास होगा और युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने की संभावना बढ़ेगी।
तापीय बिजली संयंत्रों से प्रदूषण पर सरकार की रिपोर्ट
सदन में पूछे गए एक प्रश्न का उत्तर देते हुए आज, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की समिति ने सीएसआईआर-नीरी, आईआईटी दिल्ली और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज सहित कई संस्थानों की रिपोर्टों के अध्ययन का हवाला दिया।
जसमें कहा गया है कि देश के अधिकतर इलाकों में वायु गुणवत्ता राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (नॉक्स) के दायरे में है। समिति ने तापीय बिजली संयंत्रों से होने वाले उत्सर्जन, उनके स्वास्थ्य पर प्रभाव और आसपास की वायु गुणवत्ता का भी अध्ययन किया। मंत्री का कहना है कि इन रिपोर्टों के आधार पर पर्यावरण की निगरानी और आवश्यक सुधारात्मक कदम लगातार उठाए जा रहे हैं।
राष्ट्रीय मानव-वन्यजीव संघर्ष पोर्टल से मिलेगी बेहतर निगरानी
मानव-वन्यजीव संघर्ष को लेकर सदन में उठे एक और सवाल के जवाब में आज, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में कहा कि मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष की घटनाओं पर नजर रखने के लिए मंत्रालय ने राष्ट्रीय मानव-वन्यजीव संघर्ष पोर्टल विकसित किया है।
सिंह ने बताया कि यह पोर्टल पूरे देश में होने वाली मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं का राष्ट्रीय डाटाबेस तैयार करेगा। इसमें घटना का स्थान, संबंधित वन्यजीव, मानव जीवन, फसलों और संपत्ति को हुए नुकसान, वन्यजीवों की मृत्यु या घायल होने की जानकारी तथा मुआवजा और अनुग्रह राशि से जुड़े रिकॉर्ड दर्ज किए जाएंगे। इसके अलावा हाथियों की गतिविधियों की निगरानी और स्थानीय लोगों को समय पर चेतावनी देने का कार्य संबंधित राज्य वन विभाग अपने स्तर पर कर रहे हैं। मंत्री ने कहा कि इस पोर्टल से भविष्य की योजना बनाने और संघर्ष की घटनाओं को कम करने में सहायता मिलेगी।
हिमालयी क्षेत्र में पर्यटन के पर्यावरणीय प्रभाव का अध्ययन
सदन में सवालों का सिलसिला जारी रहा, सदन में पूछे गए एक अन्य प्रश्न के उत्तर में आज, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में हिमालयी राज्यों में बढ़ते पर्यटन के कारण पर्यावरण पर पड़ रहे प्रभावों पर एक अध्ययन का हवाला दिया। यह अध्ययन गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान ने "भारतीय हिमालयी क्षेत्र में पर्यटन का पर्यावरणीय आकलन" शीर्षक से रिपोर्ट तैयार की है। यह रिपोर्ट राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों के अनुसार तैयार की गई है।
सिंह ने बताया कि रिपोर्ट में पर्यटन के कारण पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण किया गया है। साथ ही हिमालयी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा उठाए गए कदमों की समीक्षा की गई है तथा कमियों की पहचान कर भविष्य के लिए सुझाव दिए गए हैं। एनजीटी ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इन सिफारिशों को समयबद्ध तरीके से लागू करने का निर्देश दिया है। मंत्री ने बताया कि सरकार ने 10 अप्रैल 2026 को इस संबंध में अनुपालन रिपोर्ट भी अधिकरण को सौंप दी है।
प्रोजेक्ट लायन से बढ़ी एशियाई शेरों की संख्या
सदन में उठाए गए एक ओर प्रश्न का उत्तर देते हुए आज, राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए कहा कि देश में एशियाई शेरों के संरक्षण के लिए चलाए जा रहे प्रोजेक्ट लायन के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। सिंह ने बताया कि मई 2025 में हुई 16वीं शेर गणना के अनुसार देश में एशियाई शेरों की संख्या बढ़कर 891 हो गई है। साल 2020 की तुलना में यह लगभग 32 प्रतिशत की वृद्धि है।
मंत्री ने कहा कि प्रोजेक्ट लायन का उद्देश्य केवल शेरों की संख्या बढ़ाना ही नहीं, बल्कि उनके पूरे प्राकृतिक आवास का संरक्षण करना और सभी संबंधित पक्षों की भागीदारी से लंबे समय तक संरक्षण सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि संरक्षण के प्रयासों से वन्यजीवों की सुरक्षा को और मजबूती मिली है।
वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण को मिलेगा जनभागीदारी का साथ
वर्षा जल संचयन को लेकर सदन में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में आज, जल शक्ति मंत्रालय में राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने लोकसभा में कहा कि जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने के लिए जल शक्ति मंत्रालय ने "जल संचय जन भागीदारी: कैच द रेन-2026" अभियान की शुरुआत एक जून 2026 को की है। इस अभियान के तहत पहले से चल रहे जल शक्ति अभियान: कैच द रेन को और व्यापक बनाया गया है।
चौधरी ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य लोगों की भागीदारी बढ़ाकर कम लागत वाले वर्षा जल संचयन ढांचे तैयार करना है। सरकार चाहती है कि गांवों और शहरों में अधिक से अधिक जल संरक्षण संरचनाएं बनाई जाएं ताकि वर्षा के पानी का बेहतर उपयोग हो सके और भूजल स्तर में सुधार आए। इस अभियान में समाज की सक्रिय भागीदारी को विशेष महत्व दिया गया है।
पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना से राजस्थान को मिलेगा लाभ
सदन में पूछे गए एक और सवाल के जवाब में आज, जल शक्ति मंत्रालय में राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने लोकसभा में जानकारी देते हुए कहा कि मंत्रालय ने संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना के तहत राजस्थान के लिए कई अहम जल संरचनाओं की योजना बनाई है। चौधरी ने बताया कि भारत सरकार, मध्य प्रदेश और राजस्थान सरकार के बीच हुए समझौते के अनुसार राजस्थान में 17 जिलों के लिए कुल 23 परियोजना घटकों की पहचान की गई है। इनका उपयोग पेयजल, सिंचाई और औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाएगा।
मंत्री ने बताया कि परियोजना के तहत राजस्थान को 4642.48 मिलियन घन मीटर जीवित जल भंडारण क्षमता मिलेगी, जबकि 3309.88 मिलियन घन मीटर पानी का उपयोग विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। इससे लगभग 4.03 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होने की संभावना है। साथ ही बड़ी मात्रा में पेयजल और उद्योगों के लिए भी पानी उपलब्ध कराया जाएगा। यह परियोजना पूर्वी राजस्थान के जल संकट को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।