आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26: घरेलू मांग में वृद्धि के बावजूद खपत वृद्धि में 'हल्की' कमी

आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था इस समय 2012 के बाद सबसे अधिक खपत-आधारित दौर में है
Food prices
फाइल फोटो: सीएसई
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सारांश
  • आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, भारत में घरेलू मांग में वृद्धि के बावजूद खपत वृद्धि में हल्की कमी देखी गई है।

  • वित्त वर्ष 2026 में निजी उपभोग व्यय में 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जो जीडीपी का 61.5 प्रतिशत है।

  • हालांकि, दूसरी छमाही में खपत वृद्धि में कमी के संकेत मिले हैं, लेकिन निजी उपभोग लचीला बना रहेगा।

भारत में घरेलू मांग में अच्छी खासी वृद्धि हुई है, लेकिन यह सिलसिला थम सकता है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था इस समय 2012 के बाद सबसे अधिक खपत-आधारित दौर में है। वित्त वर्ष 2025-26 में लोगों के खर्च यानी निजी अंतिम उपभोग व्यय का हिस्सा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 61.5 प्रतिशत रहा, जो  वित्त वर्ष 2011-12 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। 

आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026 में घरेलू मांग आर्थिक वृद्धि का मजबूत आधार बनी हुई है। वित्त वर्ष 2026 में लोगों के खर्च यानी निजी अंतिम उपभोग व्यय में करीब 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इस दौरान इसका हिस्सा देश की कुल अर्थव्यवस्था (जीडीपी) में 61.5 प्रतिशत तक पहुंच गया, जो 2012 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। इसका मतलब है कि अर्थव्यवस्था की रफ्तार इस समय बड़े पैमाने पर आम लोगों के खर्च पर टिकी हुई है।

आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, कम महंगाई, रोजगार की अपेक्षाकृत स्थिर स्थिति और लोगों की बढ़ी हुई वास्तविक कमाई ने इस खर्च को बढ़ाने में मदद की है। खेती के बेहतर प्रदर्शन से गांवों में खरीदारी बढ़ी है, जबकि टैक्स में सुधार और कर युक्तिकरण के कारण शहरों में भी खर्च करने का माहौल बेहतर हुआ है। इससे कुल मिलाकर बाजार में मांग मजबूत बनी हुई है।

हालांकि आर्थिक सर्वेक्षण में छमाही वार आंकड़े देखें तो वित्त वर्ष 2025 की पहली छमाही में निजी अंतिम उपभोग व्यय की वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रही, जो वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में बढ़कर 7.5 प्रतिशत हो गई। 

पूरे वित्त वर्ष के स्तर पर देखें तो वित्त वर्ष 2025 के लिए यह वृद्धि 7.2 प्रतिशत (अनंतिम अनुमान) आंकी गई है, लेकिन वित्त वर्ष 2026 के लिए 7.0 प्रतिशत (प्रथम अग्रिम अनुमान) रहने का अनुमान है।

कमी के संकेत 

आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है,“यह ध्यान देने योग्य है कि प्रथम अग्रिम अनुमान के आधार पर निकाले गए वित्त वर्ष की दूसरी छमाही के अनुमान, उपभोग वृद्धि में हल्की कमी का संकेत देते हैं। हालांकि, प्रथम अग्रिम अनुमान वर्ष 2024–25 के उपभोग स्तरों को नवंबर तक उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर आगे बढ़ाकर तैयार किए जाते हैं, इसलिए नए आँकड़े आने पर इनमें संशोधन की संभावना रहती है। 

पूरे वर्ष के आंकड़ों को शामिल करने वाले बाद के अनुमान वित्त वर्ष 2025–26 में निजी उपभोग के प्रदर्शन का अधिक स्पष्ट आकलन देंगे, जिसमें हाल के कर सुधारों का प्रभाव भी शामिल होगा।” 

रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि फिलहाल, वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में देखी गई मजबूत खपत और तीसरी तिमाही के सहायक उच्च-आवृत्ति संकेतक यह बताते हैं कि निजी उपभोग पूरे वर्ष लचीला (मजबूत) बने रहने की संभावना है।

असमानता में कमी 

रिपोर्ट में कहा गया है कि घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण 2023–24 से यह स्पष्ट होता है कि खपत आधारित असमानता में कमी आई है और सबसे कमजोर वर्गों की स्थिति में सुधार हुआ है। सर्वेक्षण के अनुसार, 2022–23 और 2023–24 के बीच औसत मासिक प्रति व्यक्ति उपभोग व्यय में सबसे अधिक वृद्धि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जनसंख्या के निचले 5–10 प्रतिशत वर्ग में दर्ज की गई है। 

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