महामारी के चलते 1990 के बाद पहली बार घटी मिडिल क्लास लोगों की संख्या!

जहां मिडिल क्लास लोगों की संख्या में 9 करोड़ की कमी आई है वहीं गरीबी की रेखा से नीचे गुजर करने वालों की संख्या में 13.1 करोड़ का इजाफा हुआ है
महामारी के चलते 1990 के बाद पहली बार घटी मिडिल क्लास लोगों की संख्या!
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1990 के बाद यह पहला मौका है जब दुनिया भर में मिडिल क्लास लोगों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है| जिसकी वजह से गरीबी रेखा के नीचे जीवन गुजर करने वाले लोगों की संख्या में इजाफा हुआ है| यह जानकारी हाल ही में प्यू रिसर्च सेंटर द्वारा किए एक अध्ययन में सामने आई है जोकि वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों पर आधारित है| रिपोर्ट से पता चला है कि जहां 2020 में मिडिल क्लास लोगों की संख्या में 9 करोड़ की कमी आई है वहीं गरीबी की रेखा से नीचे गुजर करने वालों की संख्या में 13.1 करोड़ का इजाफा हुआ है| गौरतलब है कि विकासशील देशों में तकरीबन दो-तिहाई परिवारों ने माना है कि महामारी के चलते उनकी आमदनी में गिरावट आई है|

इस रिपोर्ट में उन लोगों को मिडिल क्लास कहा गया है जिनकी आमदनी 726 से 3,625 रुपए (10 से 50 डॉलर) प्रतिदिन के बीच थी| वहीं यदि गरीबी रेखा से नीचे गुजारा करने वाले लोगों की बात करें तो उनकी हर दिन की आमदनी 145 रुपए (2 डॉलर) से कम थी| वहीं यदि अमीर वर्ग की बात करें तो उनकी आमदनी 3,626 रुपए (50 डॉलर) प्रति दिन से ऊपर आंकी गई थी|

रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में मिडिल क्लास लोगों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना नौ करोड़ घटकर करीब 250 करोड़ रह गई है। जिसका असर गरीब तबके पर पड़ा है जिनकी आबादी में करीब 13.1 करोड़ का इजाफा हुआ है| यदि मिडिल क्लास लोगों की बात करें तो उनकी संख्या में सबसे ज्यादा कमी दक्षिण एशिया में देखने को मिली है जहां इनकी संख्या में 3.2 करोड़ की गिरावट आई है, जिसमें भारत की मिडिल क्लास आबादी भी शामिल है| इसके बाद पूर्वी एशिया में करीब 1.9 करोड़ की गिरावट दर्ज की गई है| कुल मिलाकर दुनियाभर में मिडिल क्लास के कुल 15 करोड़ लोग इस महामारी के चलते प्रभावित हुए हैं| यह आंकड़ा जर्मनी और फ्रांस की कुल आबादी से भी ज्यादा है।  

विकसित देशों के अमीर वर्ग में आई गिरावट बढ़ी मिडिल क्लास लोगों की संख्या        

यदि गरीब तबके को देखें तो यहां भी दक्षिण एशिया में सबसे ज्यादा वृद्धि हुई हैं जहां इनकी आबादी में करीब 7.8 करोड़ का इजाफा हुआ है| उसके बाद सब-सहारा अफ्रीका में करीब 4 करोड़ की वृद्धि हुई है| वहीं यदि अमीर वर्ग की बात करें तो महामारी का सबसे ज्यादा असर विकसित देशों पर पड़ा है जहां करीब 4.7 करोड़ अतिरिक्त लोग मिडिल और गरीब तबके में आ गए हैं| जिससे वहां मिडिल क्लास में 1.6 करोड़ का इजाफा हुआ है| इसका असर वहां के रहन-सहन पर भी पड़ा है|

आज शायद ही कोई ऐसा हो जिसपर कोरोना महामारी का असर न हुआ हो| अर्थव्यवस्था में जिस तरह से गिरावट आई है उसका असर समाज के हर वर्ग पर पड़ा है| जो मिडिल क्लास तबका था वो और गरीब हो गया है जबक जो गरीब तबका था उसकी समस्याएं कई गुना बढ़ गई हैं| वहीं दुनिया के कई देशों में अमीर तबके में भी गिरावट दर्ज की गई है| कुल मिलकर इस महामारी के चलते समाज के हर वर्ग पर चाहे ज्यादा या कम हो असर जरूर पड़ा है|

इस महामारी का प्रकोप अभी टला नहीं है| दुनिया भर में अभी भी कोविड-19 के 2.1 करोड़ मामले सक्रिय हैं| जबकि यह इसके चलते 27 लाख से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है| भले ही वैक्सीन आ चुकी है इसके बावजूद हाल के कुछ दिनों में मामलों की संख्या में फिर इजाफा दर्ज किया गया है| जिस वजह से दुनिया के कई शहरों में लॉकडाउन करना पड़ा है| ऐसे में इस महामारी को हलके में नहीं लेना चाहिए और इससे बचाव के लिए जरुरी सभी उपायों पर ध्यान देना चाहिए, जिससे इस महामारी को फैलने से रोका जा सके|

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