

मध्य प्रदेश के मंडला जिले में प्रस्तावित चुटका परमाणु परियोजना को हस्तांतरित होने वाली वन भूमि के सर्वे टीम को ग्रमाणों ने बलपूर्वक रोक दिया है। इस परियोजना से पूरी तरह से विस्थापित होने वाले चुटका, टाटीघाट और कुंडा के विस्थापित होने वाले 330 परिवार के ग्रामीणों ने सर्वें टीम को सर्वे करने से रोक दिया।
विपरीत हालातों को देखते हुए मंडला जिले के कलेक्टर और एसपी ने 19 मई 2026 को चुटका गांव आकर आदिवासी ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की लेकिन ग्रामीण ने उनसे कहा कि पहले हमारी 26 मांगों को पूरा किया जाए, जिसमें सबसे महत्वपूर्ण मांग है कि ग्राामीण को जमीन के बदले जमीन दी जाए। इस पर कलेक्टर ने उन्हें कहा कि जमीन के बदले जमीन तो नहीं दे सकते हैं, लेकिन उन्होंने ग्रामीणों के लिए एक नई योजना सामने रखी।
योजना के अनुसार चुटका परमाणु परियोजना से विस्थापित परिवार के दोहरा विस्थापन को लेकर गोंझी में बने छोटे मकान को बङा बनाने के लिए 5 लाख रुपए और 7 लाख रुपए जमीन की राशि बढ़ाकर लगभग 12 लाख रुपए देने का फैसला लिया गया है। कलेक्टर ने ग्रमीणों को आश्वासन दिया कि किसी भी पात्र परिवार के साथ अन्याय नहीं होगा और सभी को नियमानुसार उचित मुआवजा एवं विस्थापन पैकेज दिया जाएगा।
हालांकि चुटका परमाणु विरोधी संघर्ष समिति के अध्यक्ष दादु लाल कुड़ापे ने डाउन टू अर्थ से कहा कि हम दो- दो बार विस्थापित क्यों हों। वह कहते हैं कि आज से 35 साल पहले हमें बिना मुआवजे के ऐसे ही विस्थापित कर दिया गया था और हमने इन जंगलों में आकर उसे साफ करके एक बार फिर से अपना घर बनाया और अब एक बार फिर से सरकार का कहना है कि हैं कि हमें यहां से जाना होगा।
समिति की महिला मोर्चा की अध्यक्ष मीरा बाई मरावी ने बताया कि हर बार हम आदिवासियों पर ही सरकार अपना विकास कार्य क्यों शुरू करती है। वह बताती हैं कि इतने सालों में जैसे-तैसे जीकर हमने अपने बाल बच्चों के लिए घर और जमीन तैयार की और अब सरकार चाहती है कि हम एक और बार विकास के लिए कुर्बानी दें।
आखिर कब तक हमारे जैसे लोग ही विस्थापित होते रहेंगे। ध्यान रहे कि मध्य प्रदेश के जबलपुर में नर्मदा नदी पर बने बरगी बांध के कारण इन ग्रामीणों को 1990 में विस्थपित किया गया था, तब जबलपुर, मंडला और सिवनी जिलों के 162 गांव जलमग्न हो गए थे और इससे लगभग 1,14,000 लोग (करीब 12,000 परिवार) विस्थापित हुए थे।
चुटका परमाणु विरोधी संघर्ष समिति के अध्यक्ष दादु लाल कुङापे डाउन टू अर्थ से कहा कि हमारी ग्राम सभा ने चुटका परमाणु ऊर्जा परियोजना की सरकारी सैद्धांतिक मंजूरी 2009 में मिलने के बाद से ही इस परियोजना के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर जिला प्रशासन को लिखित में अवगत करा दिया गया था। क्योंकि हम लोग एक बार बरगी बांध से विस्थापन की त्रासदी भोग चुके हैं, फिर भी मंडला प्रशासन ने 29 जून 2012 को भू अर्जन की प्रक्रिया शुरू कर प्रत्येक प्रभावित गांव में धारा- 4 का नोटिस जारी कर दिया।
इस नोटिस का भी ग्रामीणों ने कलेक्टर मंडला को लिखित में विरोध दर्ज कराया था। उन्होंने बताया कि सभी विरोधों को दरकिनार करते हुए जबलपुर कमिश्नर द्वारा 11 दिसम्बर 2015 को परियोजना के पक्ष में अवार्ड पारित कर दिया गया। जमीन का मुआवजा लगभग 3.75 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर निर्धारित किया गया है, जो काफी कम है और काश्तकार नाराज है।
उन्होंने कहा कि काश्तकारों ने नारायणगंज के सभी बैंकों में लिखित आवेदन दिया था कि हम लोगों के खाते में भू-अर्जन की राशि जमा नहीं किया जाए । फिर भी खाते में जबरदस्ती राशि को डाल दिया गया। 22 सितम्बर 2015 को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित केबिनेट बैठक में 41.49 हेक्टेयर गांव की निस्तारी भूमि परियोजना को दे दिया गया।
वह कहते हैं कि उक्त निस्तारी भूमि की सहमति के लिए ग्राम सभा में तहसीलदार का लिखित प्रस्ताव आया था, जिसे ग्राम सभा ने नामंजूर कर दिया था। मध्यप्रदेश सरकार ने ग्राम सभा द्वारा पारित किसी प्रस्ताव का सम्मान नहीं किया गया, जबकि मंडला पांचवीं अनुसूची में अधिसूचित है और पेसा कानून लागू है।
इसी बीच 16 मार्च 2013 को मंडला प्रशासन द्वारा पाठा पंचायत की विशेष ग्राम सभा का आयोजन करवाया गया और परियोजना की मंजूरी के लिए दबाव बनाया गया। तब जाकर उस बैठक में चुटका परियोजना को लेकर ग्राम सभा ने सशर्त मंजूरी दिया था कि 26 बिन्दुओं पर कार्यवाही होगी तो गांव खाली किया जाएगा। जिसमें पहली मांग है कि अर्जित भूमि का मुआवजा 60 लाख रुपये हेक्टेयर दिया जाए, जो नर्मदा घाटी में सरदार सरोवर बांध के किसानों को उच्चतम न्यायालय के आदेश पर दिया गया है।
इसके अलावा प्रत्येक विस्थापित परिवार को कृषि योग्य 5 एकड़ जमीन दी जाए, समस्त विस्थापित परिवारों के वयस्क बेरोजगार लड़का और लड़की को उसकी योग्यता के अनुसार शासकीय नौकरी प्रदान की जाए। परन्तु 13 साल बाद भी आज तक इस पर अमल नहीं किया गया है। कुंडापे ने बताया की समूचा गांव सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि ग्राम सभा द्वारा पारित 26 बिन्दुओं पर कार्यवाही पूर्ण हुए बिना गांव खाली नहीं करेंगे।