छत्तीसगढ़ में एथेनॉल संयंत्रों के कारण 35 हजार से अधिक ग्रामीण प्रभावित

ग्राम सभा के अधिकारों का उल्लंघन
आंदोलनरत ग्रामीण, फोटो : सिद्दक खान
आंदोलनरत ग्रामीण, फोटो : सिद्दक खान
Published on

एथेनॉल संयंत्र के निर्माण के कारण छत्तीसगढ़ के बमेतरा जिले के चार गांवों (बेरला तहसील) के लगभग 35 हजार ग्रामीण प्रभावित हो रहे हैं। प्रभावित होने वाले ग्रामीण संयंत्रों के खिलाफ गत अप्रैल 2022 से लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस संबंध में प्रभावित होने वाले राकां गांव के सरपंच धनाराम निषाद का कहना है कि “ये तो केवल चार गांव के निवासियों की संख्या है, अकेले इस संयंत्र से केवल हमारा गांव ही प्रभावित नहीं हो रहा है बल्कि मेरे गांव के आसपास के लगभग 15 गांव और भी प्रभावित हो रहे हैं।” वह कहते हैं कि आसपास के गांवों की संख्या को भी यदि जोड़ दें तो यह संख्या लाखों में पहुंच जाएगी। ध्यान रहे कि ये सभी गांव इस इलाके की जीवनदायनी कही जाने वाली शिवनाथ नदी के किनारे ही बसे हैं और ये संयंत्र भी नदी किनारे ही स्थापित किए गए हैं। अब तक दो गांवों पथर्रा व भैंसा में संयंत्र का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और इन संयंत्र से उत्पादन भी शुरू हो गया है जबकि रांका और भिलौरी गावं में प्लांट का निर्माण कार्य चल रहा है।

पथर्रा गांव के सरपंच गायत्री जोगी कहती हैं कि गांव में एथेनॉल संयंत्र की स्थापना की प्रक्रिया के तहत ग्राम पंचायत के अधिकारों का पालन नहीं होने के कारण शासन व प्रशासन खिलाफ आंदोलन ने जन्म लिया है। वह बताती हैं कि यह विरोध गहरे पर्यावरणीय प्रभाव, स्वास्थ्य संबंधी और प्रक्रियागत उल्लंघनों पर आधारित है। इस विरोध के संबंध में अधिकांश ग्रामीणों का कहना है ग्राम सभा की अस्वीकृति के बाद भी अवैध रूप से इन संयंत्रों की स्थापना उनके बुनियादी अधिकारों और कृषि समुदाय की पारिस्थितिक स्थिरता को खतरे में डालते हैं।

रांका गांव के सरपंच निषाद ने डाउन टू अर्थ को बताया कि हद तो तब हो गई जब जिलाध्यक्ष ने गत 29 अक्टूबर 2025 को एक ऐसा सर्कुलर जारी किया जिसमें उन्होंने स्वयं ही कहा कि जिले में 2024-25 में आसंन्न जल संकट को ध्यान में रखते हुए 425 (संयंत्र स्थापित होने वाले गांव भी शामिल) गांव के किसान इस बार ग्रीष्मकालीन धान की फसल नहीं लेंगे। हालांकि निषाद का कहना है कि मुझे पूरी जानकारी है कि किसी भी ग्राम पंचायत ने इस प्रकार की कोई भी सहमति नहीं दी थी बल्कि जिलाधीश ने स्वयं ही सर्कुलर जारी कर यह बता दिया कि ये गांव इस बार धान की फसल नहीं लेंगे। निषाद ने बताया कि जानकारी के अभाव के कारण ग्राम पंचायत रांका ने 22 दिसंबर 2021 को प्रस्ताव पारित कर सुयश बायोफ्यूल्स प्रा. लि. को एथेनॉल संयंत्र लगाने के संबंध में “अनापत्ति प्रमाणपत्र (एओसी)” दिया था परंतु बाद में परिस्थितियों की गंभीरता की जानकारी होने पर ग्राम पंचायत ने अपने प्रस्ताव क्रमांक 09 और 21 जुलाई 2022 द्वारा इस “एओसी” को निरस्त कर दिया और 22 जुलाई 2022 को इसकी सूचना व ग्रामसभा का निर्णय तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) को सूचित कर दिया था। लेकिन रद्द किए गए एनओसी के बावजूद एसडीएम बेरला ने 26 अगस्त 2022 को परियोजना हेतु भूमि डायवर्जन की अनुमति दे दी। हालांकि यहां ध्यान देने की बात है कि एसडीएम के आदेश में यह स्वीकार किया गया कि ग्राम पंचायत ने एनओसी वापस ले ली है फिर भी आपत्ति को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (जेडएलडी) इकाई गैर-प्रदूषण इकाई होती है।

निषाद कहते हैं कि प्रशासन का यह तर्क न सिर्फ ग्राम पंचायत की आपत्तियों की प्रकृति की गलत समझ प्रदर्शित करता है बल्कि तकनीकी रूप से भी त्रुटिपूर्ण है क्योंकि जेएलडी केवल अपशिष्ट जल निकासी से संबंधित है। यह एक प्रवाह प्रबंधन की शर्त है न कि गैर-प्रदूषणकारी होने का प्रमाण पत्र।

ग्राम सभा की अस्वीकृति को दरकिनार करने का यह एक अकेला मामला नहीं है बल्कि जिले के जल संसाधन विभाग ने भी ग्राम सभा द्वारा पारित कई अस्वीकृतियों को दरकिनार कर दिया। इसके अलावा पिछले तीन सालों से लगातार “पर्यावरण बचाओ-प्रदूषण भगाओ” आंदोलन का संचालन कर रहे और पूर्व जनपद सदस्य सिद्दक खान ने यह स्वीकार किया है कि हमारे आंदोलन में मैं अकेला नहीं हूं, इसे संचालन करने वाला बल्कि यह अभियान सामुहिकता के आधार पर चलाया जा है। इसके पीछे कारण बताते हुए उन्होंने बताया कि आए दिन हमारे में से किसी की भी गिरफ्तारी हो जाती है, ऐसे में हमारे संगठन में किसी प्रकार के पदाधिकारियों का चुनाव नहीं किया गया है। वह बताते हैं कि हमें जब इस विरोध प्रदर्शन के खिलाफ गिरफ्तार किया गया था, तब हमने इस गिरफ्तारी के खिलाफ जिला अदालत में याचिका दायर की और अदालत ने हमारी गिरफतारी को अवैध बताया। इस पर सरकार ने इसके खिलाफ उच्च न्यायालय में मामला दायर किया है।

Related Stories

No stories found.
Down to Earth- Hindi
hindi.downtoearth.org.in