मेघालय की रैट-होल खदान में 27 मजदूरों की मौत के बाद उठे सवाल- कब थमेगी अवैध प्रथा?

राज्य सरकार को पहले भी बार-बार न्यायाधीशों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने खनन से जुड़ी लगातार हो रही दुर्घटनाओं को लेकर चेताया था
मेघालय के पूर्वी जंतिया हिल्स में दुर्घटनास्थल पर चलाए जा रहे बचाव अभियान की तस्वीर।
फोटो: @DDNewslive / X
मेघालय के पूर्वी जंतिया हिल्स में दुर्घटनास्थल पर चलाए जा रहे बचाव अभियान की तस्वीर। फोटो: @DDNewslive / X
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सारांश
  • मेघालय के पूर्वी जयंतिया हिल्स में अवैध रैट-होल खदान में विस्फोट से 27 मजदूरों की मौत हो गई, जिससे राज्य में अवैध खनन की समस्या फिर से उजागर हो गई है।

  • मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने इस त्रासदी की जांच के आदेश दिए हैं, जबकि न्यायपालिका ने सरकार से जवाब मांगा है।

  • खदानों में भूस्खलन और जल भराव के कारण बचाव कार्य में बाधाएं आईं।

मेघालय के पूर्वी जयंतिया हिल्स ज़िले की एक अवैध ‘रैट-होल’ खदान में हुए भीषण विस्फोट के चलते 27 खनिकों की मौत और नौ के घायल होने की पुष्टि राज्य सरकार ने की है। इस त्रासदी ने एक बार फिर पूर्वोत्तर राज्य में अवैध रैट-होल खनन की गंभीर समस्या को उजागर कर दिया है।

यह घटना 5 फरवरी को सुबह लगभग 11 बजे पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले के मुख्यालय ख्लियह्रियात से लगभग 22 किलोमीटर दूर थांगस्को क्षेत्र के सुदूर स्थित मिंसिंगट गांव में हुई। जिला पुलिस अधीक्षक विकास कुमार के अनुसार, खदानें अत्यंत दुर्गम क्षेत्र में स्थित थीं, जहां केवल चार-पहिया (4x4) वाहनों से ही पहुंचा जा सकता था। इसी कारण बचाव कार्य में काफी देरी हुई।

उन्होंने 5 फरवरी को स्थानीय प्रेस को जारी बयान में कहा, “राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल की टीमें शाम तक ही मौके पर पहुंच सकीं, क्योंकि आशंका थी कि कई मजदूर कोयला खदान के दो गड्ढों में फंसे हुए हैं। उन्होंने दो खनन गड्ढों से 18 शव बरामद किए। लगभग आठ घायलों को पहले सुतंगा के स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ले जाया गया और बाद में उन्हें उच्च चिकित्सा केंद्रों में रेफर किया गया।”

7 फरवरी को दोपहर 1 बजे राज्य सरकार द्वारा जारी बयान के अनुसार मृतकों की संख्या बढ़कर 27 हो गई, जबकि नौ लोग घायल बताए गए। घायलों का मेघालय और असम के विभिन्न अस्पतालों में दूसरे और तीसरे दर्जे के जलने (सेकेंड और थर्ड डिग्री बर्न) के उपचार के लिए इलाज चल रहा है।

मृतक श्रमिक असम, मेघालय और नेपाल के विभिन्न हिस्सों से थे।

एनडीआरएफ के एक अधिकारी के अनुसार, खदानों में भूस्खलन और भूमिगत जल भराव के कारण बचाव अभियान में बाधाएं आईं। एक केंद्रीय गड्ढा लगभग 100 मीटर गहरा था, जिससे कई रैट-होल सुरंगें निकलती थीं। अधिकारी ने डाउन टू अर्थ को बताया, “हम इन सुरंगों में फंसे खनिकों की तलाश कर रहे थे, लेकिन दिन के अंत तक हम केवल चार श्रमिकों के शव ही बरामद कर सके।”

5 फरवरी को घायल श्रमिकों ने मीडिया से कहा था कि इन खदानों में 70 से 80 मजदूरों के फंसे होने की आशंका है।

कानूनी संज्ञान

मृतकों की संख्या बढ़ने के साथ ही मेघालय में न्यायपालिका और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने राज्य में अवैध रूप से संचालित खदानों में बार-बार हो रही मौतों को लेकर सरकार से सवाल किए हैं।

घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने, जो पहले भी खदान मालिकों से अत्यंत खतरनाक ‘रैट-होल’ खनन पद्धति छोड़ने की अपील करने का दावा करते रहे हैं, इस खनन त्रासदी की व्यापक जांच के आदेश दिए। हालांकि, अदालतें संगमा के इस रुख से संतुष्ट नहीं दिखीं।

5 फरवरी को मेघालय उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति वानलुरा डिएंगदोह और न्यायमूर्ति हमारसन सिंह थांगखियू ने पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले के उपायुक्त (डिप्टी कमिश्नर) और पुलिस अधीक्षक को अदालत में उपस्थित होने के लिए तलब किया। न्यायाधीशों ने 5 फरवरी की शाम, त्रासदी की खबर सामने आने के तुरंत बाद स्वतः संज्ञान लेते हुए कहा, “अदालत इन रिपोर्टों [हालिया खनन दुर्घटना से संबंधित] पर न्यायिक संज्ञान लेने के लिए बाध्य है। यह समझ से परे है कि 14 जनवरी 2026 को हुई एक घटना में एक व्यक्ति की मौत के बावजूद इस क्षेत्र में अवैध कोयला खनन कैसे जारी है।”

राज्य पुलिस ने बढ़ते दबाव के बीच दो खदान मालिकों को गिरफ्तार किया है।

मेघालय में अवैध कोयला खनन और परिवहन की जांच के लिए अदालत द्वारा गठित समिति, जिसकी अध्यक्षता पूर्व न्यायाधीश बृजेंद्र प्रसाद काताके कर रहे हैं, ने भी घटनास्थल का दौरा किया।

काताके के साथ मेघालय सरकार द्वारा नियुक्त अवैध कोयला निगरानी स्वतंत्र समिति के अध्यक्ष नबा भट्टाचार्य भी मौके पर मौजूद थे। काताके ने डाउन टू अर्थ से कहा, “जहां विस्फोट हुआ, वहाँ चार रैट-होल गड्ढे थे। पास वाले गड्ढे में किसी ने डायनामाइट से विस्फोट कर दिया, लेकिन अन्य गड्ढों में काम कर रहे लोगों को इसकी जानकारी नहीं दी गई। खदान में काम कर रहे लोगों को मीथेन गैस के जेब (पॉकेट) की मौजूदगी का अंदाजा नहीं था, जिसे विस्फोट ने सुलगा दिया। डायनामाइट विस्फोट एक खाली खदान में हुआ था, लेकिन मीथेन गैस में आग लगने से भारी तबाही मच गई।”

पूर्व संकेतों के बावजूद मौतें

पूर्वी जयंतिया हिल्स ज़िले का थांगस्को क्षेत्र इससे पहले भी 23 दिसंबर को एक रैट-होल खदान में हुए विस्फोट के कारण चर्चा में रहा था। उस घटना में एक मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि दो अन्य घायल हुए थे।

मानवाधिकार और पर्यावरण कार्यकर्ता एग्नेस खारशिंग के अनुसार, 34 वर्षीय अशोक तामांग की 1 जनवरी को मौत हो गई थी, जबकि एक अन्य घायल श्रमिक, जो कथित तौर पर विदेशी नागरिक था, इलाज के दौरान शिलांग के एक अस्पताल में दम तोड़ गया। खारशिंग ने कहा, “मैंने 8 जनवरी को केंद्रीय जांच ब्यूरो को जांच की मांग करते हुए पत्र भेजा था, जिसे बाद में राज्य पुलिस को अग्रेषित कर दिया गया। लेकिन कई अन्य मामलों की तरह इन मौतों की भी न तो पुलिस ने और न ही ज़िला प्रशासन ने जांच की।” यह मामला मेघालय राज्य मानवाधिकार आयोग को भी सौंपा गया, जिसने अब तक अपनी जांच पूरी नहीं की है।

सिर्फ खारशिंग ही नहीं थीं जिन्होंने थांगस्को की अवैध रैट-होल खदानों में हो रहे घातक विस्फोटों को लेकर चेतावनी दी थी। न्यायमूर्ति काताके ने भी मेघालय में अवैध कोयला खनन पर अपनी 35वीं अंतरिम रिपोर्ट में अदालत को थांगस्को में विस्फोट से हुई मजदूरों की मौतों और बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध खनन की जानकारी दी थी।

काताके ने कहा, “अपनी रिपोर्ट में मैंने उल्लेख किया था कि इस क्षेत्र में पहले दो लोगों की मौत हुई थी, इसके बाद 14 जनवरी को एक और हालिया मौत हुई। यदि प्रशासन समय रहते कार्रवाई करता, तो इन मौतों को रोका जा सकता था।”

काताके के अनुसार, पूर्वी जयंतिया हिल्स ज़िले के 360 गांवों में लगभग 25,000 अवैध कोयला खदानें संचालित हो रही हैं। “इनमें से प्रत्येक रैट-होल समूह से लगभग 9 टन कोयला निकाला जाता है। यद्यपि अवैध खदानों के खिलाफ कुछ कदम उठाए गए हैं, लेकिन घटना के बाद हमारे दौरे में पूर्वी जयंतिया हिल्स में ताज़ा खोदे गए कोयले के बड़े-बड़े भंडार पाए गए,” उन्होंने कहा।

23 मई 2022 को मेघालय उच्च न्यायालय को सौंपी अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में काताके ने संकेत दिया था कि ‘मेघालय खनिज (अवैध खनन, परिवहन और भंडारण की रोकथाम) नियम, 2022’ की अधिसूचना जारी करने के अलावा, सर्वोच्च न्यायालय और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा जारी निर्देशों का संबंधित प्राधिकरणों ने पालन नहीं किया है।

काताके ने कहा, “2022 के बाद से बहुत कुछ नहीं बदला है। अवैध खनन कुछ बदलावों के साथ अब भी जारी है, और यही स्थिति आज इस त्रासदी तक ले आई है।”

आजीविका का सवाल?

एग्नेस खारशिंग का कहना है कि जुलाई 2019 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के कोयला खनन पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाए जाने के बाद मेघालय के ताज़ा कोयले की मांग, खासकर बांग्लादेश से, बढ़ गई है।

खारशिंग ने कहा, “अधिकांश अवैध रूप से निकाला गया कोयला बांग्लादेश में बेचा जा रहा है। यह एक खुला रहस्य है, फिर भी अधिकारी इस पर कार्रवाई करने में विफल रहे हैं।”

खारशिंग और उनकी सहयोगी अनीता संगमा पर नवंबर 2018 में पूर्वी जयंतिया हिल्स ज़िले के लाड रिम्बाई क्षेत्र में एक भीड़ ने बेरहमी से हमला किया था। यह स्थान वर्तमान खनन त्रासदी के स्थल से ज्यादा दूर नहीं है। उस हमले के कुछ ही समय बाद दिसंबर 2018 में पूर्वी जयंतिया हिल्स के कसान क्षेत्र की एक रैट-होल खदान में 15 मजदूरों की डूबकर मौत हो गई थी—जो मेघालय की सबसे भयावह घटनाओं में से एक मानी जाती है।

इन घटनाओं की जानकारी अदालतों और राज्य सरकार को दिए जाने के बावजूद, मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने दिसंबर 2025 में एक बयान में रैट-होल खनन की समस्या पर काबू पाने में अपनी असमर्थता जताई थी। सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में संगमा ने कहा था कि लगभग 200 साल पुरानी इस खनन परंपरा को आसानी से समाप्त नहीं किया जा सकता, क्योंकि इससे अनेक लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।

विडंबना यह है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के बाद राज्य सरकार ने ‘वैज्ञानिक खदानों’ (साइंटिफिक माइनिंग) की स्थापना की प्रक्रिया शुरू की, जिसका पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने कड़ा विरोध किया है।

हालाँकि मेघालय के कुछ इलाकों में 19वीं सदी से रैट-होल खनन होता रहा है, लेकिन बड़े पैमाने पर वाणिज्यिक कोयला खनन की शुरुआत 1970 के दशक में खासी हिल्स में हुई। 1973 में जब कोयला खदानों का राष्ट्रीयकरण किया गया, तब नवगठित राज्य मेघालय ने केंद्र सरकार को यह समझाने में सफलता पाई कि पारंपरिक (आर्टिसनल) कोयला खनन को राष्ट्रीयकरण के दायरे से बाहर रखा जाए।

वर्षों के दौरान मेघालय सरकार ने भारतीय संविधान की छठी अनुसूची का हवाला देते हुए राज्य की पारंपरिक जनजातीय संस्थाओं और प्रथागत कानूनों के माध्यम से भूमि और उसके नीचे पाए जाने वाले खनिजों पर स्वामित्व का दावा किया। 1990 के दशक तक रैट-होल खनन व्यापक रूप ले चुका था, जिससे उन्हीं सामुदायिक संसाधनों (कॉमन्स) का पारिस्थितिक विनाश होने लगा, जिनकी सुरक्षा के लिए राज्य ने छठी अनुसूची के तहत विशेष संरक्षण की मांग की थी।

1997 में मेघालय राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने ‘जैंतिया हिल्स ज़िले में कोयला खनन का पर्यावरणीय प्रभाव’ शीर्षक रिपोर्ट में इस तबाही को दर्ज किया था। लेकिन उसकी सिफारिशें कभी लागू नहीं की गईं।

जब पूर्व न्यायमूर्ति बृजेंद्र प्रसाद काताके को राज्य में अवैध कोयला खनन की सीमा की जांच के लिए नियुक्त किया गया, तब यह पाया गया कि मेघालय की कई नदी धाराएं एसिड माइन ड्रेनेज से प्रदूषित हो चुकी हैं। यह प्रक्रिया तब होती है जब कोयले में मौजूद पाइराइट (आयरन सल्फाइड) हवा और पानी के संपर्क में आकर सल्फ्यूरिक अम्ल और घुलित लोहे का निर्माण करता है। भारी मानसूनी वर्षा के कारण जब नदियाँ और धाराएँ उफान पर आती हैं, तो यह प्रदूषण और दूर-दूर तक फैल जाता है।

एएमडी का प्रभाव इतना गंभीर रहा कि जैंतिया हिल्स के डाउनस्ट्रीम असम में स्थित एनईईपीसीओ (नॉर्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन) की एक जलविद्युत परियोजना के टरबाइन और पाइप अम्लीय जल से क्षरण के कारण नष्ट हो गए। 2019 में इस परियोजना के ध्वस्त होने से चार लोगों की मौत हुई और भारी नुकसान हुआ।

मेघालय में 559 मिलियन टन कोयले का सिद्ध भंडार है। काताके आयोग सहित कई रिपोर्टों में यह इंगित किया गया है कि अवैध खनन से राज्य के खजाने को भारी नुकसान हो रहा है।

जहां तक छठी अनुसूची के तहत भूमि संरक्षण का सवाल है, खारशिंग का कहना है कि खनन कानूनों को लागू करना ही होगा। उन्होंने डीटीई से कहा, “छठी अनुसूची क्षेत्रों में रहने और काम करने वाले लोगों को भी स्वच्छ पानी और बेहतर कार्य परिस्थितियों का अधिकार है। मेघालय के कोयला खनिकों के मामले में इन अधिकारों का खुला उल्लंघन हो रहा है, जबकि कुछ बेईमान कारोबारी साझा भूमि और नदियों का दोहन कर रहे हैं।”

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