एशिया व प्रशांत क्षेत्र में 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों का 88% लक्ष्य अधूरा रहेगा: संयुक्त राष्ट्र

संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग की रिपोर्ट “एशिया एंड द पैसिफिक एसडीजी प्रोग्रेस रिपोर्ट 2026” में क्षेत्र में अत्यंत असंतुलित विकास की तस्वीर पेश की गई
विकास की राह तकती आंखें, फोटो: आईस्टॉक
विकास की राह तकती आंखें, फोटो: आईस्टॉक
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सारांश
  • संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, एशिया-प्रशांत क्षेत्र 2030 तक 117 में से 103 सतत विकास लक्ष्यों को पूरा करने में असफल रहेगा।

  • स्वास्थ्य, कल्याण और गरीबी उन्मूलन में प्रगति के बावजूद, पर्यावरणीय गिरावट और असमानताओं के कारण विकास असंतुलित है।

  • शिक्षा और श्रम अधिकारों में भी गिरावट देखी जा रही है।

  • जलवायु कार्रवाई और जैव विविधता जैसे क्षेत्रों में स्थिति बिगड़ रही है।

  • हालांकि, उद्योग और स्वास्थ्य में प्रगति हुई है। डेटा की उपलब्धता में सुधार हुआ है,

  • लेकिन नीति-निर्माताओं के लिए कमजोर वर्गों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना कठिन है।

वर्तमान गति को देखते हुए एशिया-प्रशांत क्षेत्र 2030 तक 117 सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) में से 103 को हासिल करने में असफल रहेगा। आज जारी की गई संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग की रिपोर्ट “एशिया एंड द पैसिफिक एसडीजी प्रोग्रेस रिपोर्ट 2026” क्षेत्र में अत्यंत असंतुलित विकास की तस्वीर पेश की गई है।

पिछले दशकों में स्वास्थ्य एवं कल्याण तथा गरीबी उन्मूलन में हुई प्रगति अब गंभीर पर्यावरणीय गिरावट और बढ़ती असमानताओं के कारण दबती नजर आ रही है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि शिक्षा तक समान पहुंच सुनिश्चित करने (एसडीजी लक्ष्य 4.5) और श्रम अधिकारों के पालन (एसडीजी लक्ष्य 8.8) में पीछे हटने की प्रवृत्ति देखी जा रही है।

इसके अलावा, लैंगिक समानता (एसडीजी 5) तथा शांति, न्याय और सशक्त संस्थानों (एसडीजी 16) से जुड़े पर्याप्त आंकड़ों का अभाव नीति-निर्माताओं के लिए यह समझना कठिन बना रहा है कि सबसे कमजोर और वंचित वर्गों तक योजनाओं का लाभ कितनी प्रभावी ढंग से पहुंच रहा है।

जलवायु कार्रवाई, समुद्री संरक्षण और जैव विविधता जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में स्थिति केवल ठहरी नहीं है, बल्कि तेजी से बिगड़ रही है। शहरों में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। जरूरी ढांचे भी नुकसान झेल रहे हैं। इससे साफ है कि कागज पर बनाई गई योजनाएं जमीन पर मजबूत तैयारी में नहीं बदल पा रही हैं।

संयुक्त राष्ट्र की अवर महासचिव और संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग की कार्यकारी सचिव अर्मिदा सालसियाह अलीशाहबाना ने कहा, “यह रिपोर्ट एक गंभीर सच्चाई को उजागर करती है। जिन विकास इंजनों ने कभी लाखों लोगों को गरीबी से बाहर निकाला और तीव्र औद्योगीकरण को गति दी, वही अब हमारे भविष्य को कमजोर कर रहे हैं।” उन्होंने जोर देकर कहा, “हमारी सबसे बड़ी सामूहिक चुनौती ही हमारा सबसे बड़ा अवसर भी है। हमें ऐसा क्षेत्र बनाना है, जो केवल समृद्ध ही नहीं, बल्कि अधिक बुद्धिमान, स्वस्थ और न्यायपूर्ण भी हो।”

हालांकि कुछ क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति भी दर्ज की गई है। उद्योग, नवाचार और अवसंरचना (एसडीजी 9) तथा बेहतर स्वास्थ्य और कल्याण (एसडीजी 3) में क्षेत्र लगातार आगे बढ़ रहा है। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी इसके प्रमुख कारणों में शामिल है। आय आधारित गरीबी में कमी और बिजली तक पहुंच का विस्तार भी महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं।

आंकड़ों की उपलब्धता में सुधार हुआ है। वर्तमान में 55 प्रतिशत एसडीजी संकेतकों के लिए प्रगति का आकलन करने हेतु पर्याप्त डेटा उपलब्ध है, जिससे एशिया-प्रशांत क्षेत्र विश्व के अन्य क्षेत्रों से आगे है।

यह रिपोर्ट एक वार्षिक प्रकाशन है, जो वैश्विक एसडीजी संकेतकों के नवीनतम आंकड़ों के आधार पर यह निर्धारित करती है कि क्षेत्र में कहां अतिरिक्त प्रयासों की आवश्यकता है और कहां भविष्य की प्रगति के लिए गति बन रही है।

इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग ने एक पूरक विश्लेषण पत्र भी जारी किया है, जिसमें छह प्रमुख संक्रमण क्षेत्रों खाद्य प्रणाली, ऊर्जा, डिजिटल कनेक्टिविटी, शिक्षा, कल्याण एवं सामाजिक सुरक्षा, तथा पर्यावरण पर विशेष ध्यान दिया गया है। यह एशिया-प्रशांत क्षेत्र के सामने मौजूद बहुआयामी स्थिरता चुनौतियों को दर्शाता है।

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