140 साल पुरानी जनगणना : पर्यावरण, प्राकृतिक संसाधनों की जानकारी और समग्र सामाजिक आकलन पर बुने गए थे सवाल
किसी भी देश के लिए जनगणना केवल सिरों की गिनती का प्रशासनिक उपक्रम ही नहीं, अपितु उस समाज की सामूहिक स्मृति को संरक्षित करने का सबसे बड़ा माध्यम भी है। हम अपने समय में किन प्रश्नों को महत्वपूर्ण मानते हैं और किन्हें छोड़ देते हैं। यही आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारे समाज की तस्वीर गढ़ता है। इन प्रश्नों के उत्तरों में ही भविष्य की पीढ़ियां झांककर जानेंगी कि उनके पूर्वज कैसे जीते थे, क्या सोचते थे और उनके जीवन के सरोकार क्या थे?
भारत की जनगणना जारी है और 2027 में इसके परिणाम आने हैं लेकिन इसमें पूछे जाने वाले 33 प्रश्नों में से अधिकांश भौतिक सुख-सुविधाओं से संबंधित ही हैं जबकि इसमें समाज की समग्रता का कोई भाव नजर नहीं आता। सैकड़ो साल पहले मारवाड़ की जनगणना एक ऐसी प्रश्नावली के साथ की जाती थी जो लोकसमाज की सारी समग्रताओं को समेट लेता था।
1887 के मारवाड़ (राजपूताना) की 56 प्रश्नों वाली जनगणना के प्रश्नावली की तुलना यदि आज की जनगणना के प्रश्नावली से की जाए तो मन में एक टीस भी उठती है कि कभी समाज को उसकी समग्रता में देखने वाला यह विशाल आयोजन आज कितना संकुचित हो गया है।
आज से लगभग 140 वर्ष पूर्व, मारवाड़ के महकमा खास ने गांवों के इतिहास संकलन हेतु 54-56 बिंदुओं की प्रश्नावली तैयार की थी जो कि एक जीवंत सामाजिक दस्तावेज था। सर्वेक्षण में पूछे गए प्रश्नों का स्वरूप अत्यंत व्यापक था। उस समय का शासन केवल यह नहीं जानना चाहता था कि राज्य में कितने लोग हैं, बल्कि उसकी रुचि इस बात में थी कि समाज का स्वरूप कैसा है?
उस प्रश्नावली में केवल यह नहीं पूछा गया था कि पानी उपलब्ध है या नहीं, बल्कि यह भी दर्ज किया गया कि पानी का स्रोत क्या है, उसकी गुणवत्ता कैसी है, कितनी गहराई पर है और वर्ष भर उसकी उपलब्धता कैसी रहती है। यह दृष्टि केवल सूचना-संग्रह की नहीं, बल्कि जीवन-पर्यावरण के गहरे संबंध को समझने की थी।
इसी प्रकार, उस प्रश्नावली में इष्ट देवता और मेलों-त्योहारों तक का विवरण मांगा गया था, क्योंकि भारतीय मानस अपनी आस्थाओं और उत्सवों में ही अपनी पहचान ढूंढता है।
लोक-व्यापार, मिट्टी की प्रकृति, घास के प्रकार और स्थानीय कारीगरी जैसे प्रश्न यह बताते थे कि उस समय का शासन समाज को मिट्टी, मौसम और मवेशियों के साथ जोड़कर देखता था। राजस्थान के इतिहास के जानकार डॉ. महेंद्र सिंह तंवर की नजर में यह सर्वे किसी प्रशासनिक औपचारिकता से अधिक एक “सभ्यतागत दस्तावेज” था, जो समाज, प्रकृति, अर्थव्यवस्था और संस्कृति को अलग-अलग खंडों में नहीं, बल्कि एक जुड़े हुए ताने-बाने के रूप में देखा रहा था।
इसके विपरीत, 2027 की जनगणना के प्रश्न मुख्यतः शौचालय, बिजली, इंटरनेट, मोबाइल, वाहन, ईंधन आदि बुनियादी सुविधाओं और उपभोग-संबंधी संकेतकों पर केंद्रित हैं। निस्संदेह ये आधुनिक विकास के महत्वपूर्ण सूचक हैं, और इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। परंतु प्रश्न यह है कि क्या ये एक समाज के रूप में हमारी 'आत्मा' को दर्ज करने के लिए पर्याप्त हैं?
आज की जनगणना हमें यह तो बता देगी कि कितने घरों में इंटरनेट है, लेकिन यह नहीं बता पाएगी कि उस घर के सदस्य अपनी जड़ों से कितने जुड़े हैं। हम यह तो जान लेंगे कि लोग कार या मोटरसाइकिल से चलते हैं, लेकिन हम उस स्थानीय लोक-ज्ञान और पारंपरिक जल-संरक्षण की विधियों को खो देंगे, जो कभी हमारे अस्तित्व का आधार थीं। 56 से 33 तक का यह सफर दरअसल विस्तार से वस्तुनिष्ठता की ओर पलायन है। हमने समाज को उपभोक्ता में तो बदल दिया, लेकिन उसे एक सांस्कृतिक इकाई के रूप में दर्ज करना भूल गए।
भारतीय ज्ञान परंपरा सदैव समग्रता पर आधारित रही है। यहां समाज को केवल आर्थिक इकाई नहीं माना गया, बल्कि उसे स्थान, समाज और संसाधन के अंतर्संबंधों के रूप में समझा गया। प्राचीन ग्रंथों से लेकर लोक परंपराओं तक, हर स्तर पर यह दृष्टि दिखाई देती है। मारवाड़ का सर्वे इसी परंपरा का विस्तार प्रतीत होता है। उसमें भूगोल, पर्यावरण, इतिहास, संस्कृति और अर्थव्यवस्था को एक साथ समझने का प्रयास था। यही कारण है कि वह आज भी अध्ययन के लिए प्रासंगिक और प्रेरणादायक लगता है।
वर्तमान जनगणना, इसके विपरीत, अधिकतर नीति-निर्माण के तत्कालिक उद्देश्यों से प्रेरित दिखाई देती है। इसमें गहराई की बजाय उपयोगिता पर अधिक जोर है। परिणामस्वरूप, वह केवल भौतिक और सांख्यिकीय पक्ष को ही दर्ज कर पाती है। डिजिटल युग में जब हमारे पास डेटा संग्रह की असीमित क्षमता है, तब हमने इस विशाल आयोजन को केवल 'हाँ' या 'नहीं' वाले यांत्रिक प्रश्नों तक सीमित कर दिया है।
हम मौजूदा परिवर्तित प्रारूप में बहुत कुछ खो रहे हैं। यह परिवर्तन केवल प्रश्नों की संख्या में कमी नहीं है; यह दृष्टि का संकुचन भी है। यदि हम चाहते हैं कि 2027 की जनगणना आने वाली सदियों के लिए एक सार्थक दस्तावेज बने, तो हमें अपनी दृष्टि को पुनर्परिभाषित करना होगा।
हर भौगोलिक क्षेत्र की अपनी विशिष्टता होती है। पहाड़ के गाँव की समस्या और रेगिस्तान के गाँव की संस्कृति एक नहीं हो सकती। जनगणना में कुछ प्रश्न क्षेत्रीय स्तर पर स्थानीय पारिस्थितिकी और लोक-जीवन को समर्पित होने चाहिए।
केवल आंकड़ों का ढेर लगाने के बजाय, हमें यह समझने का प्रयास करना चाहिए कि समुदायों के पारंपरिक पेशे क्या थे और वे अब किस ओर जा रहे हैं। क्या हम अपनी जनगणना में उस स्वदेशी मेधा को स्थान दे सकते हैं, जो आज भी संकट के समय समाज को सहारा देती है? आज जब दुनिया जलवायु परिवर्तन और जल संकट से जूझ रही है, तब जनगणना में केवल नल का कनेक्शन पूछना पर्याप्त नहीं है। हमें परंपरागत जल स्रोतों की वर्तमान स्थिति और उनके प्रति सामुदायिक लगाव को भी मापना होगा। जनगणना को केवल सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की सूची बनाने तक सीमित न रखकर इसे 'सभ्यता की डायरी' बनाना होगा। इसमें लोक-कला, बोली और स्थानीय उत्सवों के संरक्षण की स्थिति को भी स्थान मिलना चाहिए।
विकास अनिवार्य है और शौचालय, बिजली, इंटरनेट जैसे सुख-साधन आधुनिक मनुष्य की आवश्यकता हैं। परंतु, यदि विकास का यह दस्तावेज़ हमारी संस्कृति और सामाजिक मूल्यों की बलि देकर तैयार होता है, तो वह अधूरा है।
2027 की ओर बढ़ते हुए हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि जनगणना के माध्यम से हम केवल 'जन' को न गिनें, बल्कि 'गण' के 'मन' को भी टटोलें। आने वाली पीढ़ियां जब इन आंकड़ों को देखें, तो उन्हें सिर्फ यह न पता चले कि हमारे पास कितने गैजेट्स थे, बल्कि उन्हें यह अहसास भी हो कि हम एक संवेदनशील, समृद्ध और अपनी परंपराओं पर गर्व करने वाला समाज थे। 33 प्रश्न अच्छे हैं, लेकिन उन प्रश्नों के पीछे छिपी संवेदना और भारतीयता की कमी को भरने की जिम्मेदारी आज के योजनाकारों की है। अन्यथा, हम सिर्फ अंकों के पहाड़ खड़े करेंगे, जबकि हमारी साझा स्मृति का सागर धीरे-धीरे सूखता चला जाएगा।
1887 ई. में स्थापित महकमा खास द्वारा मारवाड़ के गांवों के इतिहास संकलन हेतु सर्वे करवाया गया तब 56 प्रश्नों का तवारीख पत्र भेजा गया था जो इस प्रकार था
1.बसती कीता गरां री हे माजनो रा कीता गर ओर करसणां कीता गर
(बस्ती कितने घरों की है, मजदूरों के कितने घर और किसानों के कितने घर है?)
2.करसा जादातर कीण जातरा हे
(खेती ज्यादातर कौन सी जाति करती है?)
3.धरम कीसो हे ओर ईसट कीसा देवता रो हे (धर्म कौन सा है और इष्टदेव कौन से देवता हैं?)
4.कपड़ा कीण भांत रा पैरे हे ने केड़ा
(कपड़े कौन सी किस्म के बनाए हुए पहनते है और कैसे-धोती कुर्ता या पोशाक आदि ?)
5.खास कीसो धान जादातर लोग खावे हे (मुख्य कौन सा अनाज ज्यादातर लोग खाते हैं?)
6.कोई मंदिर या मसजीद हे या नहीं हे तो कीणरो हे ओर कद बणीयोड़ा हे
(कोई मंदिर या मस्जिद है या नहीं, है तो किसका है और कब बना हुआ है?)
7.काल बरस में गांव वाला पर मुलक मे जावे हे जरे कठे जावे हे
(अकाल के समय गांव वाले परदेस में जाते हैं तो कहाँ जाते हैं?)
8.आब हवा केसी हे
(आबो-हवा कैसी है?)
9.कोई मरी पड़ी ही ओर कीसा बरस में
(कोई महामारी पड़ी थी तो किस वर्ष में?)
10.बोपार री पीठ हे
(व्यापार की पीठ ( मंडी) है?)
11.खास धान मंडी कीसी हे ओर कीतरा कोस पर हे
(मुख्य अनाज मंडी है और कितने कोस पर है?)
12.कोई कीलो या छोटी गड़ी हे ओर कीणरा वकत में बणयोड़ा हे
(कोई किला या छोटी गढ़ी है और किसके समय में बनी हुई है?)
13.आगे जगड़ो या लड़ाई ईण गांव नेड़े या गांव में उई हे कोनसा बरस में
(पहले झगड़ा या लड़ाई इस गांव के पास या गांव में हुई है कौन से वर्ष में?)
14.खास ईण जायगा में कांई कांई चीजा जीनस बणे हे ओर मशहूर हे
(इस जगह में विशेष क्या-क्या चीजें/जिंस( किराना सामान ) बनती हैं और मशहूर हैं?)
15.गांव में कोई कारखानो हे
(क्या गांव में कोई कारखाना है ?)
16.कोई मेलो या बाजार वगेरे भरीजे या नहीं ओर भरीजे तो कद व कीण रो कही चीज बसत बेचण ने आवे हे
(कोई मेला या बाजार वगैरह भरता है या नहीं और भरता है तो कब और किसका, क्या चीज/वस्तु बेचने आते हैं?)
17.पुलस रो थाणो या चौकी या डाकखानो या सफाखानो या हवाला रो थाणो या ईसटेसन रेल या ईसकुल या तारघर हे
(पुलिस का थाना या चौकी या डाकखाना या अस्पताल या हवाला का थाना या रेलवे स्टेशन या स्कूल या तारघर है?)
18.गांव कद बसीयोड़े हे बसती तुटी या बढी और कद तुटी या बड़ी
(गांव कब बसा हुआ है, बस्ती टूटी या उजड़ी , कब टूटी या उजड़ी ?)
19.गांव रो नांव कीकर दीयो जुनो खेड़ो कोई गांव री सीव में हे ने तो कीण दोस मे हे
(गांव का नाम कैसे दिया, पुराना खेड़ा ( बसावट का स्थान ) कोई गांव की सीमा में है तो किस दिशा में है?)
20.गांव में पाणी के लीये कुवा या तलाव हे या कीकर पाणी बारे महीना रेवे हे पाणी कुवा मे कीता हात नीचे लादे हे
(गांव में पानी के लिए कुएं या तालाब हैं या कैसे पानी बारह महीने रहता है या कैसे पानी कुएं में कितने हाथ नीचे मिलता है?)
21.पाणी केड़ो खारो मीठो या बळबळो
(पानी कैसा खारा मीठा या खारा/भलभला है?)
22.गांव री पीच बेरा सु हे या तलाव सु हे
(गांव की पीच ( पीने का मुख्य स्रोत ) बेरे से है या तालाब से है?)
23.बेरा कीतरा हे ने केड़ा हे
(बेरे कितने हैं और कैसे हैं?)
24.सीव में नंदी या कोई मोटो बाळो हे ओर उणरो नांम कही हे ओर कोई बंदो हो तो लिखो (सीमा में नदी या कोई बड़ा नाला है और उसका नाम क्या है और कोई बांध हो तो लिखो)
25.गांव कीता साखियो हे एक साखियो हे या दुसाखियों हे
(गांव कितनी फसलों वाला है, एक फसल वाला है या दो फसल वाला है?)
26.जमीन री किस्म कीण जातरी हे
(जमीन की किस्म कौन सी तरह की है?)
27.खास धान कीसो पेदा ऊवे हे
(मुख्य अनाज कौन सा पैदा होता है?)
28.सीव में दरखत कीसा कीसा जादा ऊवे हे (गांव की सीमा में पेड़ कौन-कौन से ज्यादा होते हैं?)
29.घास रो जोड़ हे या नहीं ने गास केड़ो ऊवे हे भुरटीयो लांपलो या करड़ वगेरा
(घास का जोड़/बीहड़ है या नहीं और घास कैसी होती है भुरटिया, लांपला या करड़ वगैरह?)
30.खास खात कीसो हे
(मुख्य खाद कैसी है?)
31.खांन पथरी री वो खड़ी री वो दुजी धातु री कोई हे
(खान पत्थर की या खड़ी की या दूसरी धातु की कोई है?)
32.मवेसी ओर ऊणरी ओद केड़ी हे
(मवेशी और उनकी किस्म ( ब्रीड) कैसी है?)
33.हल कीण सु चलावे हे ऊंट सु या बेला सु भैंसा सु करे है ?
(हल किससे चलाते हैं ऊंट से या बैल से या भैंसे से?)
34.सीव में सीकार रा ओर दुजी कीसी कीसम रा जानवर हे
(सीमा में शिकार के और दूसरी किस किस्म के जानवर हैं?)
35.सांसण या जागीर या ताजीमी ठीकाणो हे ओर कीणरे पटे रो गांव है डोली हे या भोमीचारो हे
(सासण या जागीर या ताजीमी ठिकाना है और किसके पट्टे का गांव है, डोली है या भोमिचारा है?)
36.भायप जीलायत कीणरा हे
(भाईप जिलायत यानी जागीरदार का किस परिवार से निकास है?)
37.जागीरदार री फली कही हे
(जागीरदार की खांप क्या है?)
38.गांव सीरोलो हे तो पांतीया कीकर हे
(गांव की जागीर किसी एक के नाम या हिस्सेदारी में हैं?)
39.जागीरदार जातरो कुण हे
(जागीरदार की किस जाति का है?)
40.गांव में भोम डोळी या माफी री दुजी कोई जमीन हे या नहीं ओर भोमीया डोळीया की जातीया हे
(गांव में जमीन डोली (दान) या माफी (करमुक्त) की है या दूसरी कोई जमीन है या नहीं और भोमिया डोलिया है तो वो किस जाति के हैं?)
41.कोई घुम मारग नजदीक बेवे हे
(गांव के पास कोई बड़ा घुमावदार मार्ग है क्या?)
42.मारग गांव रो आवण जावण रो केड़ो हे करड़ी जमीन मे हे या रेती में या पादरी जमीन में या भाकर में मारग बीच में बाळो या नंदी कोई आवे हे
(मार्ग गांव का आने-जाने का कैसा है, कड़ी जमीन में है या रेत में या पादरी जमीन में या भाखर में, मार्ग के बीच में नाला या नदी कोई आती है?)
43.बोली कीसी बोली जावे हे
(बोली कैसी बोली जाती है?)
44.रांमा सांमा कीसा बोले हे
(रामा-सामा यानी अभिवादन कैसे बोलते हैं?)
45.पटी कीसी हे
(गाँव किस क्षेत्र में है ? किस सांस्कृतिक क्षेत्र विशेष में जैसे ढूँढाड़, हाड़ौती या अन्य?)
46.गांव री सीव में कोई वास या ढांणी हे
(गांव की सीमा में कोई वास या ढाणी है?)
47.गांव में कोई ओरण हे या नही, ओर कीण रो हे ओर ऊणमे दरखत कांई कांइ हे
(गांव में कोई ओरण है या नहीं, और किसका है और उसमें पेड़ कौन-कौन से हैं?)
48.सीव में कोई भाकर डुंगर हे ओर उणरो नांम कई ने गांव सु कीती दुर हे
(सीमा में कोई भाखर/पहाड़ है और उसका नाम क्या है और गांव से कितनी दूर है?)
49.कोन कोनसी लाग हकुमत मे मरते हे ओर कीस कदर ओर कीस तरे हे
(कौन-कौनसे टैक्स भरते हैं और किस प्रकार और कितना?)
50.भोमीया जागीरदार को कीया लाग देते हे (भोमिया जागीरदार को लगान क्या देते हैं?)
51.गांव मेदांन में बसीयोड़े हे या भाकर माथे या भाकर री गाळ में
(गांव मैदान में बसा हुआ है या भाखर पर या भाखर की घाटी में?)
52.घर कीण कीसम रा हे माटी रा या पथर रा या जुपां या ईंटा वगेरे रा
(घर किस किस्म के हैं, मिट्टी के या पत्थर के या झोपड़े या ईंट वगैरह के?)
53.गांव री सफाई केड़ी रेवे हे
(गांव की सफाई कैसी रहती है?)
54.सीको कीसो चाले हे ओर तोल कही हे (सिक्का कैसा चलता है और तोल का माप क्या है?)
55.टीडी आई तो ऊण गांव में कई नुकसान कीयो या नही टीडी कठे सु आई ओर कठे गई : नुकसान कीतरो कीयो
(टिड्डी दल से उस गांव में कहीं नुकसान किया या नहीं, टिड्डी कहाँ से आई और कहाँ गई : नुकसान कितना किया?)
56.गांव में कोई पुरांणी तखती पथर री खुदी उई हे या नहीं ओर ऊणरे ऊपर जो लीखीयो होवे अजनास वाच सके तो ऊणरी नकल लेवे नही तो सीरफ देवे के तखती फलाणां बरस री पुरांणी हे
(गांव में कोई पुरानी तख्ती पत्थर की खुदी हुई है या नहीं और उसके ऊपर जो लिखा हुआ हो, अंदाज से पढ़ सके तो उसकी नकल लेवे, नहीं तो सिर्फ देवे कि तख्ती फलां वर्ष की पुरानी है)
जनगणना 2027 में पूछे जाने वाले सवाल -
1.आपके भवन/मकान का नंबर क्या है?
2.आपके जनगणना घर की संख्या क्या है?3.आपके घर के फर्श की प्रमुख सामग्री क्या है?
4.आपके घर की दीवार किस सामग्री से बनी है?
5.आपके घर की छत किस सामग्री से बनी है?
6.आपके घर का मुख्य उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया जा रहा है?
7.आपके घर की वर्तमान स्थिति क्या है और यह कितना पुराना है?
8.आपके घर में कितने परिवार निवास करते हैं?
9.परिवार में सामान्य रूप से रहने वाले व्यक्तियों की कुल संख्या कितनी है?
10.परिवार के मुखिया का नाम क्या है?
11.परिवार के मुखिया का लिंग क्या है?
12.क्या परिवार का मुखिया अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य वर्ग से संबंधित है?
13.क्या आप जिस घर में रह रहे हैं वह आपका अपना है या किराये का?
14.आपके घर में कुल कितने आवासीय कमरे हैं?
15.परिवार में कितने विवाहित दंपति रहते हैं?
16.पीने के पानी का मुख्य स्रोत क्या है?
17.क्या पीने का पानी नियमित रूप से उपलब्ध रहता है?
18.आपके घर में प्रकाश व्यवस्था का मुख्य स्रोत क्या है?
19.क्या आपके घर में शौचालय की सुविधा उपलब्ध है?
20.आपके घर में किस प्रकार का शौचालय है?
21.आपके घर में अपशिष्ट जल निकासी की व्यवस्था कैसी है?
22.क्या आपके घर में स्नान की सुविधा उपलब्ध है?
23.क्या आपके घर में रसोईघर और एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध है
24.खाना पकाने के लिए मुख्य रूप से किस ईंधन का उपयोग किया जाता है?
25.क्या आपके परिवार के पास रेडियो या ट्रांजिस्टर है?
26.क्या आपके परिवार के पास टेलीविजन है?
27.क्या आपके घर में इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध है?
28. क्या आपके परिवार के पास लैपटॉप या कंप्यूटर है?
29. क्या आपके परिवार के पास टेलीफोन, मोबाइल फोन या स्मार्टफोन है?
30.क्या आपके परिवार के पास साइकिल, स्कूटर, मोटरसाइकिल या मोपेड है?
31.क्या आपके परिवार के पास कार, जीप या वैन है?
32.आपके परिवार द्वारा मुख्य रूप से कौन-सा अनाज उपभोग किया जाता है?
33.आपका मोबाइल नंबर क्या है?
(डॉ मीना कुमारी, शोधार्थी और लेखिका हैं।)

