रिपोर्ट: क्या अब तक का सबसे ज्यादा कार्बन उत्सर्जन वाला होगा फीफा विश्व कप 2026?

साल 2026 के फीफा पुरुष विश्व कप के विस्तृत आयोजन और बढ़ती यात्रा के कारण अब तक का सबसे ज्यादा कार्बन उत्सर्जन करने वाला टूर्नामेंट बनने की आशंका जताई गई
104 मैच और 16 शहरों में आयोजन से खिलाड़ियों और दर्शकों की हवाई यात्रा बढ़कर पर्यावरण पर दबाव बढ़ेगा।
104 मैच और 16 शहरों में आयोजन से खिलाड़ियों और दर्शकों की हवाई यात्रा बढ़कर पर्यावरण पर दबाव बढ़ेगा।प्रतीकात्मक छवि, साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • 2026 फीफा विश्व कप अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको में 48 टीमों के साथ सबसे बड़ा और अधिक मैचों वाला टूर्नामेंट होगा।

  • नई रिपोर्ट में कहा गया है कि बढ़ती यात्रा और विस्तार से कार्बन उत्सर्जन अब तक सबसे अधिक हो सकता है।

  • 104 मैच और 16 शहरों में आयोजन से खिलाड़ियों और दर्शकों की हवाई यात्रा बढ़कर पर्यावरण पर दबाव बढ़ेगा।

  • शोधकर्ताओं ने कहा कि फुटबॉल अब बड़े व्यापार और वैश्विक विस्तार से जुड़कर जलवायु परिवर्तन में योगदान दे रहा है।

  • फीफा की पर्यावरण नीतियों पर सवाल उठे हैं, क्योंकि विस्तार के साथ स्थिरता के दावे और वास्तविक कदमों में अंतर है।

एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि 2026 का फीफा पुरुष विश्व कप अब तक का सबसे ज्यादा कार्बन उत्सर्जन करने वाला टूर्नामेंट बन सकता है। यह रिपोर्ट मैनचेस्टर विश्वविद्यालय, लॉफबोरो विश्वविद्यालय और ब्रिस्टल विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा तैयार की गई है।

"फुटबॉल और जलवायु परिवर्तन" नामक शीर्षक से प्रकाशित इस रिपोर्ट में कहा गया है कि फुटबॉल अब केवल खेल नहीं रहा, बल्कि यह बड़े व्यापार और वैश्विक आर्थिक हितों से जुड़ गया है, जिससे पर्यावरण पर भारी असर पड़ रहा है।

2026 विश्व कप का बड़ा विस्तार

2026 का पुरुष विश्व कप फीफा द्वारा संयुक्त रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको में आयोजित किया जाएगा। इस बार पहली बार 48 टीमें हिस्सा लेंगी और कुल 104 मैच खेले जाएंगे। ये मैच 16 अलग-अलग शहरों में होंगे, जो पूरे उत्तर अमेरिका में फैले होंगे।

पिछले 2022 के कतर विश्व कप में 32 टीमें थीं और केवल 64 मैच खेले गए थे। उस टूर्नामेंट की तुलना में 2026 का आयोजन बहुत बड़ा होगा, जिससे यात्रा और ऊर्जा उपयोग भी कई गुना बढ़ जाएगा।

कार्बन उत्सर्जन का मुख्य कारण

शोधकर्ताओं का कहना है कि प्रदूषण केवल स्टेडियम या दर्शकों की यात्रा से नहीं बढ़ता, बल्कि यह टूर्नामेंट की पूरी संरचना से जुड़ा है। इतने बड़े देश में मैच होने के कारण टीमों, अधिकारियों और दर्शकों को लंबी दूरी की यात्रा करनी पड़ेगी। इससे हवाई यात्रा बढ़ेगी, जो कार्बन उत्सर्जन का बड़ा कारण है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि फुटबॉल का वैश्वीकरण और बड़े आयोजनों का विस्तार पर्यावरण के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है।

फुटबॉल और बड़े व्यापार का संबंध

रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि आधुनिक फुटबॉल अब बड़े व्यापारिक हितों और ऊर्जा कंपनियों के प्रभाव में आ गया है। कई देशों और कंपनियों के साथ इसके वित्तीय संबंध भी पर्यावरण नीति पर असर डाल सकते हैं।

शोधकर्ताओं का कहना है कि फुटबॉल संगठन अक्सर पर्यावरण की बात करते हैं, लेकिन साथ ही वे बड़े टूर्नामेंट और विस्तार की दिशा में आगे बढ़ते रहते हैं। इस विरोधाभास पर सवाल उठाए गए हैं।

रिपोर्ट में शोधकर्ता के हवाले से कहा गया है कि फुटबॉल दुनिया का सबसे लोकप्रिय खेल है और इसकी ताकत का उपयोग सही दिशा में होना चाहिए। उनका कहना है कि फुटबॉल संगठनों को मुनाफे के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन पर भी गंभीरता से ध्यान देना चाहिए

पिछला विश्व कप एक ऐसे भविष्य की झलक था जहां गर्मी और जलवायु परिवर्तन का असर खेलों पर साफ दिखाई देता है। लेकिन इसके बावजूद सुधार के प्रयास बहुत कम हैं।

भविष्य के आयोजनों पर सवाल

रिपोर्ट में आगे आने वाले टूर्नामेंटों पर भी चिंता जताई गई है। 2034 का विश्व कप सऊदी अरब में आयोजित होने की योजना है, जिसे भी एक ऐसे क्षेत्र में देखा जा रहा है जहां ऊर्जा उत्पादन का बड़ा हिस्सा तेल और गैस पर आधारित है।

इसके साथ ही, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में पेरिस जलवायु समझौते से अमेरिका के बाहर होने का भी हवाला दिया गया है, जिससे वैश्विक जलवायु नीति पर असर पड़ा था।

रिपोर्ट का संदेश साफ है कि अगर बड़े खेल आयोजनों के ढांचे में बदलाव नहीं किया गया, तो भविष्य के टूर्नामेंट पर्यावरण पर और अधिक दबाव डाल सकते हैं।

फुटबॉल जैसे लोकप्रिय खेल को अब यह तय करना होगा कि वह केवल मनोरंजन और व्यापार तक सीमित रहेगा या जलवायु परिवर्तन से लड़ने में भी भूमिका निभाएगा।

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