मानसून 2026: बारिश का असमान वितरण, कई जिलों में सूखा तो बागपत में 1400 प्रतिशत अधिक वर्षा

एक जून से 29 सितंबर, 2026 तक जिलों में बारिश का असमान वितरण, उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब और राजस्थान के कई जिलों में बारिश की कमी दर्ज हुई।
राजस्थान में 22 प्रतिशत कम बारिश हुई, भरतपुर, जयपुर और धौलपुर में अधिक बारिश, जबकि सिरोही में 46 प्रतिशत कमी दर्ज हुई।
राजस्थान में 22 प्रतिशत कम बारिश हुई, भरतपुर, जयपुर और धौलपुर में अधिक बारिश, जबकि सिरोही में 46 प्रतिशत कमी दर्ज हुई।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • एक जून से 29 सितंबर, 2026 तक देश में बारिश का वितरण असमान रहा, कई जिलों में कमी और कुछ जिलों में अत्यधिक अधिक बारिश दर्ज हुई।

  • उत्तर प्रदेश में जिलों के बीच बड़ा अंतर दिखा, बागपत में बारिश 1400 प्रतिशत अधिक, जबकि गाजियाबाद में 60 प्रतिशत कम रही।

  • बिहार में 32 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई, कई जिलों में मानसून कमजोर रहा और खेती तथा जल संसाधनों पर असर पड़ा।

  • पंजाब में बारिश 41 प्रतिशत कम रही, जबकि जम्मू और कश्मीर और लद्दाख के कुछ जिलों में बारिश सामान्य से अधिक दर्ज हुई।

  • राजस्थान में 22 प्रतिशत कम बारिश हुई, भरतपुर, जयपुर और धौलपुर में अधिक बारिश, जबकि सिरोही में 46 प्रतिशत कमी दर्ज हुई।

भारत में एक जून से 29 सितंबर 2026 के दौरान मानसून की तस्वीर बेहद असमान रही। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के जिला वर्षा वितरण आंकड़ों के अनुसार, कई जिलों में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज हुई, जबकि कुछ जिलों में कम अवधि में हुई तेज बारिश ने पूरे मानसूनी मौसम का आंकड़ा सामान्य या सामान्य से ऊपर पहुंचा दिया।

पूर्वोत्तर में कई जिलों में बारिश की कमी

पूर्वोत्तर भारत में बारिश का वितरण काफी कमजोर रहा। अरुणाचल प्रदेश के अधिकांश जिलों में मानसून की कुल बारिश सामान्य से कम रही। अंजॉ में 175.1 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य से 89 प्रतिशत कम है। तवांग में कमी 64 प्रतिशत और अपर सुबनसिरी में 63 प्रतिशत रही। दूसरी ओर, कुछ जिलों में स्थिति अलग रही। ईस्ट कामेंग में बारिश सामान्य से 15 प्रतिशत अधिक रही।

असम के अधिकतर जिलों में बारिश सामान्य से कम रही। बोंगाईगांव में 59 प्रतिशत, नलबाड़ी में 61 प्रतिशत और उदलगुड़ी में 60 प्रतिशत कमी दर्ज हुई। हालांकि चराइदेव में बारिश सामान्य से 15 प्रतिशत अधिक रही और लखीमपुर में आठ प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई।

मेघालय में स्थिति और गंभीर रही। ईस्ट जैंतिया हिल्स में सामान्य से 66 प्रतिशत, नॉर्थ गारो हिल्स में 66 प्रतिशत और वेस्ट गारो हिल्स में 71 प्रतिशत कम बारिश हुई। इसके विपरीत साउथ वेस्ट खासी हिल्स में बारिश सामान्य से 48 प्रतिशत अधिक रही।

ओडिशा में जिलेवार बड़ा अंतर

ओडिशा में पूरे राज्य की मानसूनी बारिश सामान्य से 30 प्रतिशत अधिक रही, लेकिन जिलेवार तस्वीर अलग रही। बलांगीर में 27 प्रतिशत, बालासोर में 57 प्रतिशत और बौध में 71 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज हुई। केंद्रापड़ा में 55 प्रतिशत और क्योंझरगढ़ में 56 प्रतिशत अधिक बारिश रही। इसके विपरीत कुछ जिलों में कमी भी रही।

बिहार और झारखंड के जिलों में बारिश की कमी

बिहार में एक जून से 29 सितंबर, 2026 के बीच राज्य की कुल बारिश सामान्य से 32 प्रतिशत कम रही। भागलपुर में कमी 47 प्रतिशत, जहानाबाद में 53 प्रतिशत और सीतामढ़ी में 49 प्रतिशत रही। पटना में भी सामान्य से 38 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। लगभग पूरे राज्य में जिलों की बारिश सामान्य से कम रही।

झारखंड में कुल बारिश सामान्य के करीब रही, लेकिन जिलों के बीच अंतर साफ दिखा। गढ़वा में सामान्य से 29 प्रतिशत और गुमला में 28 प्रतिशत कम बारिश हुई, जबकि लातेहार में 20 प्रतिशत तथा पश्चिमी सिंहभूम में 39 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज हुई।

उत्तर प्रदेश में एक ही राज्य में सूखा औरों में अत्यधिक बारिश

उत्तर प्रदेश में मानसून की कुल बारिश सामान्य से आठ प्रतिशत अधिक रही, लेकिन जिलेवार आंकड़े बेहद असमान रहे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बागपत में सामान्य से 1400 प्रतिशत, मेरठ में 64 प्रतिशत और मुजफ्फरनगर में 57 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज हुई। वहीं अलीगढ़ में 43 प्रतिशत, मथुरा में 46 प्रतिशत और गाजियाबाद में 60 प्रतिशत कमी रही।

पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी कई जिलों में बारिश कम रही। देवरिया में सामान्य से 67 प्रतिशत, जौनपुर में 56 प्रतिशत और कुशीनगर में 58 प्रतिशत कमी दर्ज हुई। इसके साथ ही बांदा, चित्रकूट और कानपुर सिटी जैसे जिलों में सामान्य से काफी अधिक बारिश दर्ज की गई।

उत्तराखंड और दिल्ली में अलग तस्वीर

उत्तराखंड में कुल बारिश सामान्य से नौ प्रतिशत अधिक रही। बागेश्वर में सामान्य से 163 प्रतिशत और चमोली में 76 प्रतिशत अधिक बारिश हुई। हरिद्वार में यह अंतर 18 प्रतिशत अधिक रहा, जबकि पौड़ी गढ़वाल में बारिश सामान्य से 40 प्रतिशत कम रही। देहरादून में भी कुल बारिश लगभग सामान्य रही।

दिल्ली में कुल मानसूनी बारिश सामान्य से चार प्रतिशत अधिक रही। हालांकि जिलों में अंतर दिखाई दिया। सेंट्रल दिल्ली में सामान्य से 16 प्रतिशत अधिक, नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में 12 प्रतिशत कम और साउथ वेस्ट दिल्ली में 25 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई।

पंजाब, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में भी असमानता

पंजाब में कुल बारिश सामान्य से 41 प्रतिशत कम रही, लेकिन मानसून के अंतिम दिनों में कुछ जिलों में तेज बारिश हुई। होशियारपुर में कुल बारिश सामान्य से 52 प्रतिशत कम और जालंधर में 48 प्रतिशत कम रही, जबकि गुरदासपुर में 28 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज हुई।

हिमाचल प्रदेश में कुल बारिश सामान्य से केवल 10 प्रतिशत कम रही, लेकिन कई जिलों में मानसून के अंतिम दिनों में भारी बारिश हुई। शिमला में कुल बारिश सामान्य से 29 प्रतिशत अधिक और किन्नौर में 35 प्रतिशत अधिक रही। वहीं लाहौल-स्पीति में 69 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई।

जम्मू और कश्मीर में भी जिलेवार अंतर बड़ा रहा। किश्तवाड़ में सामान्य से 53 प्रतिशत कम कुल बारिश हुई, जबकि पुंछ में 27 प्रतिशत और उधमपुर में 54 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज हुई। लद्दाख में कुल बारिश सामान्य से 122 प्रतिशत अधिक रही।

राजस्थान में भी बारिश का बंटवारा असमान

राजस्थान में कुल बारिश सामान्य से 22 प्रतिशत कम रही। पूर्वी राजस्थान में कमी 17 प्रतिशत रही, लेकिन भरतपुर में 25 प्रतिशत और जयपुर में 19 प्रतिशत अधिक बरसे बादल। दौसा में सामान्य से नौ प्रतिशत अधिक और धौलपुर में 26 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज हुई। दूसरी ओर उदयपुर में 27 प्रतिशत और सिरोही में 46 प्रतिशत कम बारिश रही। पश्चिमी राजस्थान में कुल कमी 30 प्रतिशत रही।

इन आंकड़ों से साफ है कि 2026 में बदलती जलवायु और अल नीनो के कारण राज्यों के अलग-अलग जिलों में बारिश का असमान वितरण रहा। एक ही राज्य के विभिन्न जिलों में सामान्य से बहुत कम तो दूसरी ओर बहुत अधिक बारिश साथ-साथ दर्ज हुई। कई जिलों में लंबे समय तक बारिश की कमी रही, जबकि कुछ जगह कम समय में हुई तेज बारिश ने पूरे मौसम का आंकड़ा सामान्य से ऊपर पहुंचा दिया। इससे खेती, जल संसाधन और स्थानीय स्तर पर बारिश पर निर्भर गतिविधियों पर जिलेवार असर अलग-अलग रहने की आशंका बनती है।

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