मानसून 2025: एक जून से 28 अगस्त तक 21 राज्यों में सामान्य, चार राज्यों में कम बरसे बादल

पूरे देश में एक जून से 28 अगस्त, 2025 तक बारिश में लगभग छह फीसदी की बढ़ोतरी देखी जा रही है, 10 राज्य ऐसे हैं जहां सामान्य से ज्यादा बारिश हुई, 21 राज्य ऐसे हैं जहां सामान्य बारिश दर्ज की गई है।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इस अवधि के दौरान बारिश में सामान्य के मुकाबले 38 अधिक बारिश रेकॉर्ड की गई है, यहां सामान्यतया 426.2 मिमी तक बारिश होती है, जबकि 589.3 मिमी अधिक बरसे बादल
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इस अवधि के दौरान बारिश में सामान्य के मुकाबले 38 अधिक बारिश रेकॉर्ड की गई है, यहां सामान्यतया 426.2 मिमी तक बारिश होती है, जबकि 589.3 मिमी अधिक बरसे बादलफोटो साभार: आईस्टॉक
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🌀 मानसून: जीवनदायिनी से खतरे की ओर - भारत की कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए कभी भरोसेमंद सहारा रहा मानसून अब देश की सबसे बड़ी चुनौतियों में बदलता जा रहा है। जम्मू में रिकॉर्ड तोड़ बारिश से लेकर राजस्थान में अभूतपूर्व बाढ़ और हिमाचल व उत्तराखंड में बादलों के फटने तक तथा अब केरल में बदलते मौसम के तौर-तरीकों तक मानसून का रूप बेहद अस्थिर और खतरनाक होता जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जो मानसून पहले नियमित और चक्रीय हुआ करता था, अब वह लगातार और अव्यवस्थित ताकत में बदल रहा है। जलवायु परिवर्तन इसकी सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है।

मानसून के मौसम का तीसरा महीना, यानी अगस्त भी अब अलविदा कहने को है, देश के कुछ ही राज्य हैं जहां मानसून के पहले महीने यानी जून से लेकर इस महीने, यानी 28 अगस्त, 2025 तक सामान्य से छह फीसदी अधिक बारिश रेकॉर्ड की गई है।

विभाग के बारिश संबंधी ताजा आंकड़ों को देखें तो मानसून के इन तीन महीनों में, 28 अगस्त, 2025 तक मात्र एक राज्य ऐसा हैं जहां बहुत अधिक बारिश दर्ज की गई है, वह राज्य है केन्द्र शासित प्रदेश लद्दाख, जहां इस दौरान सामान्य से 401 फीसदी बारिश अधिक रिकॉर्ड की गई हैं।

मौसम विभाग के राज्यवार बारिश का ताजा अपडेट बताता है कि पूरे देश में एक जून से 28 अगस्त, 2025 तक बारिश में लगभग छह फीसदी तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है। जबकि इसी दौरान 10 राज्य ऐसे हैं जहां सामान्य से ज्यादा बारिश हुई, 21 राज्य ऐसे हैं जहां सामान्य बारिश दर्ज की गई है। जबकि एक जून से 28 अगस्त, 2025 तक चार राज्यों में बारिश में कमी देखी गई है

🌧️पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में कितने बरसे बादल?

देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश पर बारीकी से नजर डालें तो पूर्व और पूर्वोत्तर भारत के अरुणाचल प्रदेश में एक जून से 28 अगस्त, 2025 के दौरान सामान्य से 39 फीसदी बारिश कम हुई, इस बीच यहां सामान्य रूप से 1296.9 मिमी तक बारिश होती है जबकि 785.2 मिमी ही बारिश हुई। वहीं असम में बारिश में 34 फीसदी की गिरावट रिकॉर्ड की गई, यहां भी सामान्यतः 1167.2 मिमी बारिश होती है जबकि यहां, इस दौरान 775.4 मिमी तक ही बरसे बादल।

बादलों का घर कहे जाने वाले मेघालय में इस दौरान आमतौर पर 2160.8 मिमी तक बारिश होती है जबकि यहां केवल 1236.6 मिमी बारिश दर्ज की गई, यानी बारिश में सामान्य के मुकाबले 43 फीसदी की कमी देखी गई है। नागालैंड में सामान्य से 11 फीसदी अधिक बारिश हुई, मौसम विभाग के द्वारा मेघालय को बारिश में कमी की श्रेणी में जबकि नागालैंड को सामान्य श्रेणी के रूप में रखा गया है। मणिपुर में 14 फीसदी की कमी, मिजोरम में सात फीसदी और त्रिपुरा में एक फीसदी की कमी तथा सिक्किम में 15 फीसदी को भी सामान्य के रूप में रखा गया है।

इसी दौरान पश्चिम बंगाल में सामान्य से पांच फीसदी, यानी सामान्य से मामूली कमी को भी सामान्य में रखा गया है। वहीं, झारखंड में 29 फीसदी ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई, जबकि बिहार में सामान्य के मुकाबले बारिश में 28 फीसदी की कमी दर्ज की गई, जिसे विभाग के द्वारा सामान्य से कम की श्रेणी में रखा गया है।

🌧️ उत्तर पश्चिम भारत में क्या रहा बारिश का हाल?

एक जून से 28 अगस्त, 2025 के दौरान उत्तर पश्चिम भारत में कितने बरसे बादल, विभाग के आंकड़ों को देखें तो उत्तर प्रदेश में सामान्य की तुलना में दो फीसदी की कमी, जिसे सामान्य बारिश के रूप में दर्ज किया गया है। पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में सामान्य के मुकाबले 14 फीसदी, यानी सामान्य इसे भी सामान्य की श्रेणी में रखा गया है। हरियाणा में 24 फीसदी ज्यादा बरस चुके हैं बादल, जबकि चंडीगढ़ में सामान्य की अपेक्षा तीन फीसदी कम बारिश हुई है, जिसे भी मौसम विभाग ने बारिश के सामान्य श्रेणी में रखा है।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इस अवधि के दौरान बारिश में सामान्य के मुकाबले 38 अधिक बारिश रेकॉर्ड की गई है, यहां सामान्यतया 426.2 मिमी तक बारिश होती है, जबकि 589.3 मिमी अधिक बरसे बादल, यानी यहां सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। वहीं पंजाब में 24 फीसदी बारिश अधिक दर्ज की गई जिसे बारिश के सामान्य से अधिक की श्रेणी में शामिल किया गया है।

वहीं दो और पहाड़ी राज्य जो इस दौरान बादल फटने तथा भूस्खलन की मार से भारी जान-माल का नुकसान झेल रहे हैं। हिमाचल प्रदेश में सामान्य की अपेक्षा 31 फीसदी अधिक बारिश, वहीं, जम्मू और कश्मीर में 25 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई है। वहीं केन्द्र शासित प्रदेश लद्दाख में 401 फीसदी, यानी सामान्य के मुकाबले बहुत अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि राजस्थान में भी सामान्य से 56 फीसदी अधिक बारिश हुई, यानी बहुत ज्यादा बारिश की श्रेणी में इसे रखा गया है।

🌧️ मध्य भारत में कितनी हुई वर्षा?

मध्य भारत में बारिश को लेकर मौसम विभाग के एक जून से 28 अगस्त, 2025 तक के आंकड़े देखें तो ओडिशा में इस दौरान सामान्य से तीन फीसदी बारिश कम दर्ज की गई, इस दौरान यहां सामान्यतया 884.1 मिमी तक बारिश होती है, जबकि यहां 857.5 मिमी दर्ज की गई, यानी यहां सामान्य बारिश हुई। वहीं मध्य प्रदेश में 22 फीसदी अधिक बरसे बादल, यानी सामान्य के मुकाबले ज्यादा बारिश दर्ज की गई।

इस दौरान गुजरात में सामान्य की अपेक्षा 13 फीसदी बारिश अधिक हुई, इसे सामान्य की श्रेणी में रखा गया है। वहीं, केन्द्र शासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव में भी 13 फीसदी बारिश हुई इसे भी बारिश के सामान्य की श्रेणी में रखा गया है।

गोवा में सामान्य से दो फीसदी अधिक हुई बारिश, हालांकि मौसम विभाग ने इसे सामान्य की श्रेणी में रखा है। जबकि महाराष्ट्र में सामान्य के मुकाबले छह फीसदी अधिक बारिश हुए जिसे भी सामान्य की श्रेणी में रखा गया है। जबकि छत्तीसगढ़ में इस अवधि के दौरान 888.8 मिमी बादल बरसते हैं जबकि यहां 888.2 मिमी बादल बरसे यानि यहां सामान्य बारिश रिकॉर्ड की गई।

🌧️ क्या भारत के दक्षिणी प्रायद्वीप में मेहरबान रहे बादल?

भारत के दक्षिणी प्रायद्वीप में एक जून से 28 अगस्त, 2025 के दौरान कितने बरसे बादल, केंद्र शासित प्रदेश अंडमान व नोकोबार द्वीप समूह में इस दौरान सामान्य की अपेक्षा 12 फीसदी अधिक बारिश हुई, यहां सामान्यतया 1162.3 मिमी बारिश होती हैं जबकि इस दौरान सामान्य से अधिक यानी 1300.6 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।

आंध्र प्रदेश में सामान्य के मुकाबले बारिश में आठ फीसदी अधिक बारिश हुई, मौसम विभाग के द्वारा इसे सामान्य की श्रेणी में रखा गया है। जबकि तेलंगाना में सामने की अपेक्षा 20 फीसदी अधिक बरसे बादल, यानी ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई। तमिलनाडु में सामान्य की अपेक्षा दो फीसदी अधिक, यानी सामान्य बारिश हुई। पुडुचेरी में 22 फीसदी, यानी सामान्य अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई।

जबकि कर्नाटक में सामान्य की अपेक्षा 14 फीसदी बारिश अधिक हुई, हालांकि मौसम विभाग ने इसे सामान्य की श्रेणी में रखा है। जिस राज्य में हर बार दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत होती है, यानी केरल में 14 फीसदी की कमी के साथ इसे भी सामान्य की श्रेणी में रखा गया है।

लक्षद्वीप में सामान्य के मुकाबले 14 फीसदी बादल कम बरसे हैं, यहां एक जून से लेकर 28 अगस्त तक सामान्यतः 831.0 मिमी तक बारिश होती है जबकि यहां 716.1 मिमी ही बारिश रिकॉर्ड की गई, यानी इस राज्य को भी सामान्य की श्रेणी में रखा गया है।

यानी कुल मिलाकर, भारत के बड़े हिस्से में मानसून मेहरबान रहा है। हालांकि पूर्वोत्तर राज्यों और बिहार को इस बार बारिश की कमी ने जरूर परेशान किया है।

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