

राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत 130 शहरों में प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों से अधिकांश शहरों में पीएम10 स्तर में उल्लेखनीय कमी दर्ज हुई।
भारत ने गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता, कार्बन सिंक और उत्सर्जन तीव्रता में सुधार कर एनडीसी लक्ष्यों की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की।
सरकार ने एक बार उपयोग होने वाले प्लास्टिक पर सख्त कार्रवाई करते हुए लाखों निरीक्षण किए, प्रतिबंधित प्लास्टिक जब्त किया और जुर्माना लगाया।
पंजाब के सरकारी विद्यालयों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल साक्षरता और कोडिंग आधारित शिक्षा शुरू कर विद्यार्थियों को भविष्य के लिए तैयार किया जा रहा।
वन संरक्षण, मेकेदातु परियोजना और एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से पर्यावरण संरक्षण, जल प्रबंधन और स्वच्छ ऊर्जा को लगातार बढ़ावा मिल रहा है।
वायु प्रदूषण पर नियंत्रण
संसद का मानसून सत्र जारी है, सदन में उठाए गए एक सवाल का लिखित जवाब देते हुए आज, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में मंत्री भूपेंद्र यादव ने लोकसभा में जानकारी देते हुआ बताया कि देश में स्वच्छ हवा उपलब्ध कराना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक है। इसी उद्देश्य से केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) शुरू किया है।
यह एक लंबी अवधि और समयबद्ध राष्ट्रीय कार्यक्रम है, जिसके तहत 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 130 गैर-अनुपालन तथा मिलियन प्लस शहरों में वायु प्रदूषण कम करने का कार्य किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत शहरों को स्वच्छ वायु कार्ययोजना लागू करने के लिए प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन अनुदान के रूप में 16,423.56 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।
यादव ने कहा कि साल 2025-26 में 108 शहरों में साल 2017-18 की तुलना में पीएम10 के स्तर में कमी दर्ज की गई है। इनमें 72 शहरों में 20 प्रतिशत से अधिक और 26 शहरों में 40 प्रतिशत से अधिक कमी आई है। इसके अलावा 14 शहर राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों को हासिल करने में सफल रहे हैं, जबकि साल 2017-18 में केवल छह शहर ही इस स्तर तक पहुंचे थे।
वन क्षेत्र की गुणवत्ता का आकलन
जंगलों की गुणवत्ता को लेकर सदन में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में आज, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा में कहा कि भारत में वनों की स्थिति का आकलन भारतीय वन सर्वेक्षण द्वारा समय-समय पर किया जाता है। वनों की सही जानकारी हासिल करने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। बेहतर उपग्रह चित्रों, उच्च स्तर की मैपिंग और उन्नत चित्र विश्लेषण तकनीकों के माध्यम से वन क्षेत्रों का अधिक सटीक आकलन किया जाता है।
सिंह ने बताया कि वनों की स्थिति से संबंधित जानकारी इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट (आईएसएफआर) में प्रकाशित की जाती है। इस रिपोर्ट में केवल वन क्षेत्र का विस्तार ही नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता का भी मूल्यांकन किया जाता है। मंत्री ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि 70 प्रतिशत या उससे अधिक छत्र घनत्व वाले वन को बहुत घना वन, 40 से 70 प्रतिशत तक वाले वन को मध्यम घना वन तथा 10 से 40 प्रतिशत तक छत्र घनत्व वाले वन को खुला वन माना जाता है।
मेकेदातु बांध परियोजना को पर्यावरणीय स्वीकृति
सदन में उठे एक और सवाल के जवाब में आज, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा में बताया कि कर्नाटक के रामनगर और चामराजनगर जिलों में प्रस्तावित मेकेदातु बैलेंसिंग रिजर्वायर एवं पेयजल परियोजना के लिए वर्ष 2019 में पर्यावरणीय स्वीकृति हासिल करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इस परियोजना के लिए 20 जून 2019 को टर्म्स ऑफ रेफरेंस (टीओआर) का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था। इसके बाद विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (ईएसी) ने 19 जुलाई 2019 को इस प्रस्ताव पर विचार किया।
सिंह ने कहा कि चूंकि यह परियोजना कावेरी नदी से जुड़ी अंतरराज्यीय समस्या से संबंधित है, इसलिए मंत्रालय ने निर्णय लिया कि परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को पहले जल शक्ति मंत्रालय द्वारा अंतिम रूप दिया जाए और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण से स्वीकृति मिलने के बाद ही आगे की पर्यावरणीय प्रक्रिया पूरी की जाएगी। वर्तमान में संबंधित स्वीकृति का इंतजार किया जा रहा है।
पंजाब में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) शिक्षा की शुरुआत
शिक्षा के क्षेत्र में एआई को लेकर सदन में पूछे एक प्रश्न के उत्तर में आज, शिक्षा मंत्रालय में राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने लोकसभा में जानकारी देते कहा कि नई तकनीकों के बढ़ते उपयोग को देखते हुए पंजाब सरकार ने सरकारी विद्यालयों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और अन्य आधुनिक तकनीकों की शिक्षा शुरू करने की दिशा में जरूरी कदम उठाए हैं। विद्यार्थियों को डिजिटल युग के अनुरूप तैयार करने के लिए डिजिटल साक्षरता, कोडिंग गतिविधियों, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) आधारित शिक्षण तथा शिक्षकों के प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
सरकारी स्कूलों में उपलब्ध डिजिटल प्लेटफॉर्म और नवाचार आधारित गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को एआई की शुरुआती जानकारी दी जा रही है। यह कार्य समय-समय पर जारी किए गए पाठ्यक्रम और दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जा रहा है।
एक बार उपयोग होने वाले प्लास्टिक पर प्रतिबंध
सदन में सवालों का सिलसिला जारी रहा, वहीं एक अन्य सवाल के जवाब में आज, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा में कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए सरकार ने एक बार उपयोग होने वाले प्लास्टिक (सिंगल यूज प्लास्टिक) पर प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं।
सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नियमित निरीक्षण अभियान चलाने के लिए कहा गया है। विशेष रूप से फल और सब्जी मंडियों, थोक बाजारों, स्थानीय बाजारों, फूल विक्रेताओं तथा प्लास्टिक कैरी बैग बनाने वाली इकाइयों की जांच की जा रही है। 120 माइक्रोन से कम मोटाई वाले प्लास्टिक कैरी बैग के उपयोग पर भी प्रतिबंध लागू है।
सिंह ने बताया कि जुलाई 2022 से जनवरी 2026 तक पूरे देश में 8,62,356 निरीक्षण किए गए। इस दौरान 1,990 टन प्रतिबंधित एक बार उपयोग होने वाले प्लास्टिक जब्त किया गया और लगभग 19.85 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया।
भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) लक्ष्य
सदन में उठे एक और प्रश्न के उत्तर में आज, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा में बताया कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भारत ने कई महत्वपूर्ण लक्ष्य निर्धारित किए हैं। इन लक्ष्यों को राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) कहा जाता है। भारत ने साल 2005 की तुलना में साल 2022 तक अपनी अर्थव्यवस्था की उत्सर्जन तीव्रता में 37.38 प्रतिशत की कमी हासिल कर ली है। साल 2030 तक इसे 45 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य रखा गया है।
मंत्री ने कहा कि इसके अलावा जून 2025 में देश की कुल स्थापित विद्युत क्षमता में बिना जीवाश्म ईंधन आधारित स्रोतों की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक हो गई, जिससे यह लक्ष्य निर्धारित समय से पांच साल पहले ही पूरा हो गया। 30 जून 2026 तक यह हिस्सेदारी बढ़कर 54.18 प्रतिशत हो गई। इसी प्रकार साल 2005 से 2022 के बीच भारत ने 2.44 अरब टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य का अतिरिक्त कार्बन सिंक भी तैयार किया है।
पेट्रोल में मिश्रण के लिए एथेनॉल का उपयोग
पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को लेकर उठाए गए एक सवाल के जवाब में आज, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय में राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने राज्य सभा में जानकारी देते हुए कहा कि देश में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की योजना को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि पेट्रोलियम ईंधन पर निर्भरता कम हो और प्रदूषण में कमी आए। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने जून 2026 तक पिछले 24 महीनों में लगभग 2030 करोड़ लीटर एथेनॉल का उपयोग पेट्रोल में मिश्रण के लिए किया है।
एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम (ईबीपी) के अंतर्गत उपयोग किए जाने वाले एथेनॉल को भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के मानक आईएस 15464 के अनुसार होना आवश्यक है। इसमें एथेनॉल की शुद्धता कम से कम 99.6 प्रतिशत होनी चाहिए। साथ ही पानी की मात्रा, घनत्व, सल्फर की मात्रा और अन्य गुणवत्ता मानकों का भी पालन करना अनिवार्य है। प्रत्येक आपूर्ति के साथ परीक्षण प्रमाणपत्र देना भी आवश्यक है।