अल नीनो व बदलते मौसम का असर: जून से अगस्त तक देश के 42 फीसदी जिलों में सामान्य से कम बारिश

जून से अगस्त तक बारिश का असमान वितरण, 42 फीसदी जिलों में कमी दर्ज; सामान्य और अधिक बारिश वाले हिस्सों में भी दिखा बड़ा अंतर।
देश के 290 जिलों यानी 39 फीसदी में सामान्य बारिश दर्ज हुई, जबकि कई क्षेत्रों में मानसून का वितरण असमान रहा।
देश के 290 जिलों यानी 39 फीसदी में सामान्य बारिश दर्ज हुई, जबकि कई क्षेत्रों में मानसून का वितरण असमान रहा।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • जून से अगस्त 2026 तक 741 जिलों के आंकड़ों में 312 जिलों, यानी 42 फीसदी में बारिश की कमी दर्ज हुई।

  • देश के 290 जिलों यानी 39 फीसदी में सामान्य बारिश दर्ज हुई, जबकि कई क्षेत्रों में मानसून का वितरण असमान रहा।

  • उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में सामान्य, अधिक और कम बारिश की अलग-अलग स्थिति दर्ज हुई, जिससे मौसम में बड़ा अंतर दिखा।

  • बिहार के 38 में से 32 जिलों में बारिश की कमी दर्ज हुई, जिससे खेती और जल संसाधनों पर असर पड़ने की आशंका।

  • ओडिशा के 30 जिलों में 19 में अधिक बारिश दर्ज हुई, जबकि देश के कई अन्य राज्यों में कमी रही।

देश के कई राज्यों के अधिकतर जिलों में दर्ज बारिश की कमी ने मानसून की बदलती प्रकृति को फिर चर्चा में ला दिया है। अल नीनो जैसी समुद्री और वायुमंडलीय परिस्थितियां भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में मौसम के स्वरूप को प्रभावित कर रही हैं। इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव से बारिश का वितरण भी अधिक असमान होता दिखाई दे रहा है।

कई इलाकों में लंबे समय तक पर्याप्त बारिश नहीं होती, जबकि कुछ जगहों पर कम समय में बहुत भारी बारिश दर्ज की जाती है। ऐसी स्थिति खेती, जल संसाधनों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। एक जून से 31 अगस्त 2026 तक के जिला स्तरीय आंकड़े भी देश में बारिश के असमान वितरण की तस्वीर प्रस्तुत करते हैं।

बारिश की कमी वाले जिलों की बड़ी संख्या इस बात की ओर संकेत करती है कि बदलते मौसम के बीच जल संरक्षण, मौसम की निगरानी और कृषि की बेहतर योजना पहले से कहीं अधिक अहम हो गई है।

कई राज्यों में बारिश की स्थिति रही असमान

देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान बारिश की स्थिति अलग-अलग राज्यों और जिलों में काफी अलग-अलग रही है। एक जून 2026 से 31 अगस्त 2026 तक देश के जिलों में हुई बारिश के आंकड़ों के अनुसार, कुल 741 जिलों को अलग-अलग बारिश की श्रेणियों में रखा गया है। इनमें सबसे अधिक 312 जिले यानी करीब 42 फीसदी कम बारिश या वर्षा की कमी वाली श्रेणी में दर्ज किए गए हैं। वहीं 290 जिलों यानी लगभग 39 फीसदी में बारिश सामान्य श्रेणी में रही। आंकड़े बताते हैं कि देश के कई हिस्सों में मानसून की बारिश का वितरण एक समान नहीं रहा।

मौसम विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 80 जिलों यानी 11 फीसदी में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई। केवल 14 जिलों में भारी अतिरिक्त बारिश की स्थिति रही। दूसरी ओर, 38 जिलों यानी करीब पांच फीसदी में बहुत अधिक बारिश की कमी दर्ज की गई। सात जिलों के आंकड़े उपलब्ध नहीं थे। कुल 734 जिलों के लिए बारिश संबंधी पूरा आंकड़ा प्राप्त हुआ है।

उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा जिलों का आंकड़ा

राज्यवार स्थिति पर नजर डालें तो उत्तर प्रदेश के सबसे अधिक 75 जिलों को इस सूची में शामिल किया गया है। इनमें 32 जिलों में बारिश सामान्य रही, जबकि 22 जिलों में बारिश की कमी दर्ज की गई। राज्य के 10 जिलों में अधिक बारिश और चार जिलों में भारी बारिश की स्थिति दर्ज हुई। वहीं सात जिलों में बहुत अधिक बारिश की कमी रही।

मध्य प्रदेश के 55 जिलों का आंकड़ा भी अहम है। यहां 34 जिलों में बारिश सामान्य श्रेणी में रही, जबकि 16 जिलों में वर्षा की कमी दर्ज की गई। पांच जिलों में अधिक बारिश हुई। इससे साफ है कि मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश सामान्य के आसपास रही, लेकिन कुछ जिलों में मानसून कमजोर भी रहा।

बिहार और तमिलनाडु में कई जिलों में बारिश की कमी

बिहार के 38 जिलों में से 32 जिलों को बारिश की कमी वाली श्रेणी में रखा गया है। केवल चार जिलों में सामान्य बारिश हुई, जबकि दो जिलों में बहुत अधिक बारिश की कमी दर्ज की गई। यह स्थिति राज्य के लिए चिंता का विषय हो सकती है, क्योंकि खेती और जल संसाधनों पर बारिश की मात्रा का सीधा प्रभाव पड़ता है।

तमिलनाडु के भी 38 जिलों का आंकड़ा शामिल है। यहां 23 जिलों में बारिश की कमी दर्ज की गई, जबकि 10 जिलों में सामान्य बारिश हुई। तीन जिलों में बहुत अधिक बारिश की कमी और दो जिलों में अतिरिक्त बारिश दर्ज की गई। महाराष्ट्र में भी 36 जिलों में अलग-अलग स्थिति देखने को मिली। वहां 19 जिलों में वर्षा की कमी और 13 जिलों में सामान्य बारिश दर्ज की गई।

असम और पूर्वोत्तर में भी अलग-अलग तस्वीर

पूर्वोत्तर भारत में बारिश की स्थिति भी एक जैसी नहीं रही। असम के 35 जिलों में से 18 जिलों में बारिश की कमी दर्ज हुई, जबकि 13 जिलों में सामान्य बारिश हुई। अरुणाचल प्रदेश के 16 जिलों में पांच जिलों में कमी और पांच में बहुत अधिक बारिश की कमी दर्ज की गई, जबकि चार जिलों में सामान्य बारिश हुई।

मेघालय के आंकड़े भी अलग तस्वीर पेश करते हैं। राज्य के 11 जिलों में सात जिलों में बहुत अधिक बारिश की कमी दर्ज की गई। नागालैंड के 11 जिलों में छह जिलों में सामान्य बारिश हुई, जबकि कुछ जिलों में अधिक और कम बारिश की स्थिति रही।

ओडिशा में अधिक बारिश वाले जिलों की संख्या उल्लेखनीय

ओडिशा के 30 जिलों के आंकड़ों के अनुसार 19 जिलों में अधिक बारिश दर्ज की गई है। आठ जिलों में सामान्य बारिश हुई, जबकि दो जिलों में भारी बारिश और एक जिले में बारिश की कमी दर्ज की गई। यह आंकड़ा बताता है कि राज्य के कई हिस्सों में मानसून अपेक्षाकृत सक्रिय रहा।

छत्तीसगढ़ में 33 जिलों में से 22 जिलों में सामान्य बारिश हुई। गुजरात में सामान्य और बारिश की कमी वाले जिलों की संख्या 12-12 रही। राजस्थान में भी 13 जिलों में सामान्य और 18 जिलों में बारिश की कमी दर्ज की गई।

बारिश का असमान वितरण बना बड़ी चुनौती

जून से अगस्त 2026 के आंकड़े बताते हैं कि देश में मानसून की बारिश का वितरण काफी असमान रहा। एक ओर बड़ी संख्या में जिलों में सामान्य बारिश हुई, वहीं सबसे अधिक हिस्सेदारी बारिश की कमी वाले जिलों की रही। कई राज्यों में कुछ जिलों में अच्छी बारिश हुई, जबकि उसी राज्य के दूसरे हिस्सों में कमी दर्ज की गई।

बारिश की यह असमान स्थिति खेती, जलाशयों, भूजल और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। आने वाले दिनों में सितंबर की बारिश देश के कई हिस्सों में मानसून के कुल प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है। इसलिए राज्य और जिला स्तर पर वर्षा की स्थिति पर लगातार नजर रखना जरूरी होगा, ताकि पानी और कृषि से जुड़ी बेहतर योजना बनाई जा सके।

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