दिसंबर में चरम पर पहुंचेगा अल नीनो, दुनिया में बढ़ेगा भीषण गर्मी व बदलते मौसम का खतरा: डब्ल्यूएमओ

अल नीनो का बढ़ता असर, दिसंबर में रिकॉर्ड गर्मी का खतरा; दुनिया के कई हिस्सों में बदल सकता है बारिश और मौसम का मिजाज
अल नीनो तेजी से मजबूत हो रहा है, दिसंबर में समुद्र का तापमान रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने का अनुमान जताया गया है।
अल नीनो तेजी से मजबूत हो रहा है, दिसंबर में समुद्र का तापमान रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने का अनुमान जताया गया है।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • अल नीनो तेजी से मजबूत हो रहा है, दिसंबर में समुद्र का तापमान रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने का अनुमान जताया गया है।

  • दुनिया के बड़े हिस्सों में अक्टूबर से दिसंबर के बीच सामान्य से अधिक तापमान रहने की संभावना मौसम विशेषज्ञों ने जताई है।

  • भारत समेत कई क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है, जिससे खेती और जल संसाधनों पर असर पड़ने की आशंका है।

  • मजबूत अल नीनो से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में सूखा, बाढ़ और गर्मी जैसी मौसमी घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।

  • हिंद महासागर और अटलांटिक महासागर का बढ़ता तापमान भी वैश्विक मौसम के बदलते पैटर्न को प्रभावित कर सकता है।

दुनिया के मौसम पर असर डालने वाला अल नीनो इस साल तेजी से मजबूत हो रहा है। विश्व मौसम संगठन (डब्ल्यूएमओ) के अनुसार, मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर का समुद्री तापमान अक्टूबर से दिसंबर 2026 के बीच रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अल नीनो दिसंबर के आसपास अपने चरम पर पहुंच सकता है।

अगर यह अनुमान सही साबित होता है तो यह पिछले कई दशकों में सबसे शक्तिशाली अल नीनो घटनाओं में से एक हो सकता है। इसका असर केवल प्रशांत महासागर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के तापमान, बारिश और सूखे पर भी दिखाई दे सकता है।

समुद्र का तापमान तेजी से बढ़ा

अल नीनो को समझने के लिए वैज्ञानिक प्रशांत महासागर के एक हिस्से में समुद्र की सतह के तापमान पर नजर रखते हैं। इसे नीनो 3.4 क्षेत्र कहा जाता है। इस क्षेत्र में समुद्र का तापमान जून 2026 में सामान्य से करीब 1.6 डिग्री सेल्सियस अधिक था। अगस्त तक यह अंतर बढ़कर करीब 2.5 डिग्री सेल्सियस हो गया।

अक्टूबर से दिसंबर के दौरान यह अंतर औसतन करीब 3.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है। इसके बाद दिसंबर में इसके और अधिक बढ़ने की संभावना जताई गई है। यदि ऐसा हुआ तो यह अब तक दर्ज किए गए सबसे ऊंचे स्तरों में होगा।

विश्व मौसम संगठन के अनुसार, अल नीनो के फरवरी 2027 तक बने रहने की संभावना लगभग पूरी है। दुनिया के कई मौसम केंद्र समुद्र, वायुमंडल, उपग्रह और मौसम संबंधी अन्य आंकड़ों के आधार पर इस अनुमान पर पहुंचे हैं।

दुनिया के तापमान पर पड़ेगा असर

अल नीनो के मजबूत होने का सबसे बड़ा असर वैश्विक तापमान पर पड़ सकता है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अक्टूबर से दिसंबर के बीच दुनिया के बड़े हिस्से में सामान्य से अधिक तापमान रहने की संभावना है।

सितंबर 2026 के शुरुआती आंकड़ों से नीनो 3.4 तापमान में बदलाव। काली रेखा वास्तविक आंकड़े, जबकि रंगीन रेखाएं विभिन्न मौसम पूर्वानुमान प्रणालियों के अनुमान दर्शाती हैं। तापमान में बदलाव 1993–2009 की औसत अवधि की तुलना में डिग्री सेल्सियस में मापा गया है।
सितंबर 2026 के शुरुआती आंकड़ों से नीनो 3.4 तापमान में बदलाव। काली रेखा वास्तविक आंकड़े, जबकि रंगीन रेखाएं विभिन्न मौसम पूर्वानुमान प्रणालियों के अनुमान दर्शाती हैं। तापमान में बदलाव 1993–2009 की औसत अवधि की तुलना में डिग्री सेल्सियस में मापा गया है।स्रोत: विश्व मौसम संगठन (डब्ल्यूएमओ)

इसका अर्थ यह नहीं है कि हर जगह और हर दिन गर्मी सामान्य से ज्यादा होगी। इसका मतलब यह है कि पूरे मौसम के दौरान सामान्य से अधिक तापमान और गर्मी की चरम घटनाओं की आशंका बढ़ जाएगी।

पहले से गर्म हो रही दुनिया में एक मजबूत अल नीनो गर्मी के प्रभाव को और बढ़ा सकता है। अगस्त 2026 में वैश्विक समुद्री सतह का तापमान भी रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच चुका है।

बारिश का पैटर्न भी बदलेगा

अल नीनो का असर केवल तापमान तक सीमित नहीं होता। यह दुनिया के कई हिस्सों में बारिश के सामान्य पैटर्न को भी बदल सकता है। कुछ क्षेत्रों में सामान्य से ज्यादा बारिश हो सकती है, जबकि दूसरे इलाकों में सूखे की स्थिति बन सकती है।

पूर्वी और मध्य प्रशांत क्षेत्र में सामान्य से अधिक बारिश की संभावना है। अफ्रीका के ग्रेटर हॉर्न क्षेत्र, मध्य एशिया के कुछ हिस्सों, पूर्वी एशिया के तटीय क्षेत्रों और उत्तरी अरब प्रायद्वीप के कुछ इलाकों में भी ज्यादा बारिश हो सकती है।

इसके विपरीत, पश्चिमी प्रशांत और भारतीय उपमहाद्वीप में सामान्य से कम बारिश की संभावना जताई गई है। मध्य अमेरिका के दक्षिणी हिस्सों, कैरेबियन और उत्तर-पश्चिमी दक्षिण अमेरिका में भी कम बारिश का अनुमान है।

भारत के लिए चिंता की बात

भारत के लिए यह पूर्वानुमान खास महत्व रखता है। अक्टूबर से दिसंबर के दौरान भारतीय उपमहाद्वीप में सामान्य से कम बारिश का संकेत दिया गया है। इससे खेती, जल संसाधनों और कुछ क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है।

हालांकि मौसमी पूर्वानुमान किसी शहर या जिले के लिए निश्चित मौसम की भविष्यवाणी नहीं करता। स्थानीय परिस्थितियों के कारण वास्तविक बारिश और तापमान अलग हो सकते हैं।

हिंद महासागर भी देगा संकेत

प्रशांत महासागर के साथ हिंद महासागर की स्थिति भी महत्वपूर्ण है। भारतीय महासागर द्विध्रुव यानी इंडियन ओशन डाइपोल सकारात्मक स्थिति में है और अक्टूबर में इसके चरम पर पहुंचने का अनुमान है। इसके बाद इसमें कमी आने की संभावना है।

इसके अलावा भूमध्यरेखीय अटलांटिक महासागर का समुद्री तापमान भी सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है। इन सभी समुद्री परिस्थितियों का आपसी असर दुनिया के मौसम को और जटिल बना सकता है।

दुनिया को तैयार रहने की जरूरत

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मजबूत अल नीनो के कारण गर्मी, भारी बारिश और सूखे जैसी चरम मौसम घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है। इसका असर खेती, पानी, स्वास्थ्य, ऊर्जा, व्यापार और पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ सकता है।

हालांकि अल नीनो अकेले किसी मौसम घटना का कारण नहीं होता। स्थानीय मौसम और दूसरे जलवायु कारक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। फिर भी 2026 के अंत में मजबूत होते अल नीनो ने दुनिया के लिए एक भारी मौसम चेतावनी जरूर पैदा कर दी है।

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