जलवायु परिवर्तन से बदला भारत का मौसम चक्र: गर्म सर्दियां, घटता वसंत और लंबी गर्मी
साफ आसमान के साथ उत्तर से आने वाली ठंडी हवाओं में कमी और कमजोर पश्चिमी विक्षोभ के कारण फरवरी 2026 में दिन के समय तापमान तेजी से बढ़ा। दिल्ली में तापमान 31 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो सामान्य से तीन से पांच डिग्री अधिक था। मार्च में भी यही स्थिति बनी रही, बारिश नहीं हुई और पश्चिमी भारत के ऊपर प्रतिचक्रवाती परिसंचरण यानी ऐसा वायुमंडलीय प्रवाह जो केंद्र से बाहर की ओर फैलता है, वह मजबूत हुआ, जिसने गर्मी को एक तरह से जकड़ लिया।
इसके कारण तापमान सामान्य से लगभग पांच डिग्री अधिक दर्ज किया गया और गर्मी जैसे हालात जल्दी बनने लगे। आईएमडी ने मई 2026 तक सामान्य से अधिक गर्मी रहने का अनुमान जताया है, जिसका कारण कम नमी और बादलों की कमी है। हाल के वर्षों में भारत में गर्म सर्दियां अधिक बार देखी गई हैं। पिछले 15 वर्षों में 10 साल सबसे गर्म रहे हैं, जिनमें 2025 वर्ष 1901 के बाद आठवां सबसे गर्म साल रहा। 1970 के बाद से सर्दियों में कुल मिलाकर तापमान बढ़ा है, खासकर फरवरी में, जहां जम्मू और कश्मीर में यह बढ़ोतरी तीन डिग्री सेल्सियस तक रही। इससे वसंत ऋतु छोटी होती जा रही है और ठंड अचानक समाप्त होकर गर्मी में बदल रही है। यह पैटर्न, जिसमें शीतलहर के दिनों में कमी आना दरअसल इस बात का संकेत है कि जलवायु परिवर्तन लंबे समय में न्यूनतम तापमान बढ़ाकर मौसमी चक्रों को बदल रहा है। भारत में परंपरागत रूप से चार ऋतुएं मानी जाती हैं।
इनमें दिसंबर से फरवरी को सर्दी, मार्च से मई को गर्मी या प्री-मॉनसून, जून से सितंबर को मॉनसून और अक्टूबर से नवंबर के समय को मॉनसून के बाद का समय माना जाता है। हालांकि गर्म सर्दियां और घटता वसंत यह संकेत देते हैं कि ऋतुओं का अंतर कम हो रहा है, लेकिन अभी पूरी तरह से केवल गर्मी और मॉनसून तक सीमित बदलाव नहीं हुआ है। सर्दियां अभी भी आती हैं लेकिन अनियमित, छोटी और कम ठंडक वाली हो गई हैं। जलवायु के रुझान लंबे होते ग्रीष्मकाल और बदलते वर्षा पैटर्न की ओर इशारा करते हैं लेकिन इंटर-ट्रॉपिकल कन्वर्जेन्स जोन (आईटीसीजेड) के प्रभाव के कारण मॉनसून अभी भी अलग और स्पष्ट बना हुआ है।
हिमालयी क्षेत्र तेजी से गर्म हो रहा है। पिछले पांच वर्षों में सर्दियों में बर्फबारी में कमी आई है, जिसे स्नो ड्रॉट कहा जा रहा है। बर्फ तेजी से पिघल रही है और ग्लेशियर घट रहे हैं, जिसका कारण वैश्विक तापवृद्धि और मैदानी इलाकों से आने वाला ब्लैक कार्बन है। हिमालय में बर्फ कम होने से शीतलहर बनने की प्रक्रिया कमजोर पड़ती है और उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों तक ठंडी हवा का प्रवाह घटता है, जिससे वहां की सर्दियां हल्की हो रही हैं। कमजोर पश्चिमी हवाएं भी इस स्थिति को बढ़ाती हैं, क्योंकि इससे ठंडक देने वाली बारिश कम होती है और तापमान बढ़ता है।
(अंजल प्रकाश इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के भारती इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक पॉलिसी में क्लीनिकल एसोसिएट प्रोफेसर (रिसर्च) और रिसर्च डायरेक्टर हैं। साथ ही जलवायु परिवर्तन पर अंतरराष्ट्रीय पैनल के साथ भी जुड़े रहे हैं)

