आनुवंशिक अध्ययन में पता चला कि सभी आधुनिक कोआला एक छोटी पूर्वज आबादी से विकसित हुए, जिसने कठिन परिस्थितियों में जीवित रहकर प्रजाति बचाई
वैज्ञानिकों ने पाया कि कोआला में म्यूटेशन दर मनुष्यों से लगभग आधी है, जिससे उनके विकास इतिहास को अधिक सटीक रूप से समझा गया
लगभग 60 हजार वर्ष पहले कोआला आबादी सबसे कम स्तर पर पहुंची, जब ऑस्ट्रेलिया में जलवायु अत्यधिक शुष्क और ठंडी हो गई थी
आज कोआला प्रजाति फिर संकट में है, लेकिन इस बार जंगल कटाई, आग और बीमारी जैसे मानव कारण प्रमुख खतरा बन रहे हैं
ऑस्ट्रेलिया के प्रसिद्ध जानवर कोआला के इतिहास को लेकर वैज्ञानिकों की सोच अब बदल गई है। एक नए जीनोमिक (आनुवंशिक) अध्ययन में पता चला है कि कोआला की आबादी में बड़ी गिरावट लगभग एक लाख साल पहले आई थी। यह समय मनुष्यों के ऑस्ट्रेलिया पहुंचने से भी पहले का है।
पहले माना जाता था कि कोआला की संख्या में गिरावट मुख्य रूप से इंसानों के आने के बाद हुई। लेकिन नए शोध ने इस धारणा को गलत साबित किया है। यह अध्ययन सिडनी विश्वविद्यालय और टेक्सास ए एंड एम विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने किया है और इसे “मॉलिक्यूलर बायोलॉजी एंड इवोल्यूशन” नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।
कोआला का जीनोमिक इतिहास
शोधकर्ताओं ने कोआला के डीएनए का गहराई से अध्ययन किया। इसके लिए उन्होंने माता-पिता और बच्चों के डीएनए की तुलना की और देखा कि हर पीढ़ी में कितने नए बदलाव (म्यूटेशन) होते हैं।
इस अध्ययन से पता चला कि कोआला में म्यूटेशन की दर मनुष्यों की तुलना में लगभग आधी है। इस जानकारी का उपयोग करके वैज्ञानिकों ने कोआला के इतिहास को बहुत पुराने समय तक पीछे जाकर समझने की कोशिश की।
करीब 457 कोआला के जीनोम का विश्लेषण करने के बाद वैज्ञानिक इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि आज के सभी कोआला एक ही पुरानी आबादी से विकसित हुए हैं, जो कठिन परिस्थितियों में बची रही थी।
जलवायु परिवर्तन बना सबसे बड़ा कारण
वैज्ञानिकों के अनुसार कोआला की आबादी में सबसे बड़ी गिरावट का कारण इंसान नहीं, बल्कि प्राकृतिक जलवायु परिवर्तन था। लगभग एक लाख साल पहले पृथ्वी पर बड़ा जलवायु बदलाव हुआ था। उस समय ठंडी और सूखी परिस्थितियां बढ़ गई थीं। ऑस्ट्रेलिया भी धीरे-धीरे अधिक शुष्क और गर्म होने लगा।
इस बदलाव के कारण कोआला के रहने के जंगल कम होते गए। भोजन की कमी और वातावरण बदलने से उनकी संख्या तेजी से घटने लगी। लगभग 60,000 साल पहले यह गिरावट अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई थी।
एक छोटी आबादी ने बचाई प्रजाति
इस कठिन समय में कोआला की एक छोटी आबादी किसी तरह बच गई। यह आबादी मुख्य रूप से पूर्वी ऑस्ट्रेलिया में रही।
बाद में जब मौसम फिर से थोड़ा अनुकूल हुआ, तो कोआला की संख्या बढ़ने लगी। वे धीरे-धीरे पूरे पूर्वी ऑस्ट्रेलिया में फैल गए। वैज्ञानिकों के अनुसार, आज दिखने वाले अलग-अलग कोआला समूह इसी पुनः विस्तार का परिणाम हैं, जो लगभग 16,500 से 6,000 साल पहले हुआ था।
पुराना और नया खतरा
अध्ययन में यह भी कहा गया है कि कोआला पहले भी प्राकृतिक कारणों से बड़े संकटों से गुजर चुके हैं। लेकिन आज उनका सबसे बड़ा खतरा अलग है।
अब कोआला के सामने मुख्य समस्याएं इंसानों की गतिविधियों से जुड़ी हैं। जैसे जंगलों की कटाई, आग की घटनाएं, बीमारी और शिकार। इन कारणों से उनकी संख्या कई क्षेत्रों में लगातार घट रही है। क्वींसलैंड, न्यू साउथ वेल्स और ऑस्ट्रेलियन कैपिटल टेरिटरी में कोआला को 2022 से ही संकटग्रस्त प्रजाति माना गया है।
भविष्य की चिंता और संरक्षण
वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर कोआला की वर्तमान गिरावट को समय रहते नहीं रोका गया, तो भविष्य में यह प्रजाति फिर बड़े संकट में आ सकती है। पहले वे जलवायु परिवर्तन से बचे थे, लेकिन अब मानव गतिविधियां उनके लिए सबसे बड़ा खतरा बन गई हैं।
शोधकर्ताओं का मानना है कि कोआला के आनुवंशिक इतिहास को समझकर उनकी रक्षा के लिए बेहतर योजनाएं बनाई जा सकती हैं। इससे यह भी पता चलता है कि कौन-सी आबादी कमजोर है और किसे विशेष सुरक्षा की जरूरत है।
यह नया अध्ययन कोआला के इतिहास को पूरी तरह नए तरीके से समझाता है। यह बताता है कि कोआला की प्राचीन गिरावट प्राकृतिक जलवायु परिवर्तन का परिणाम थी, जबकि आज की गिरावट मानव कारणों से हो रही है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर हम अभी सही कदम नहीं उठाते, तो आने वाले समय में कोआला की जैव विविधता और भी खतरे में पड़ सकती है।