पौधे सूर्य से ऊर्जा लेते हैं लेकिन यूवी-बी किरणें नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे सुरक्षा प्रणाली विकसित हुई।
यूवीआर8 प्रोटीन यूवी-बी पहचानकर पौधों में सुरक्षा जीन सक्रिय करता है और अनुकूलन प्रक्रिया शुरू करता है।
प्राचीन पौधामार्केन्शिया पॉलीमॉर्फा में यूवी-बी प्रतिक्रिया प्रणाली आधुनिक पौधों जैसी मूल रूप से संरक्षित पाई गई।
आधुनिक अराबिडोप्सिस पौधों में कॉप1 और एसपीए प्रोटीन वृद्धि और यूवी-बी सुरक्षा नियंत्रण में जटिल भूमिका निभाते हैं।
शोध से पता चला कि पौधों की सुरक्षा प्रणाली प्राचीन है, लेकिन समय के साथ उसका नियंत्रण विकसित हुआ।
सूर्य का प्रकाश पौधों के लिए जीवन का आधार है। इसी प्रकाश की मदद से पौधे प्रकाश संश्लेषण करते हैं, जिससे वे भोजन बनाते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं। लेकिन सूर्य का एक हिस्सा, जिसे अल्ट्रावायलेट-बी (यूवी-बी) किरणें कहा जाता है, पौधों के लिए हानिकारक भी हो सकता है।
यह किरणें पौधों के डीएनए को नुकसान पहुंचा सकती हैं, कोशिकाओं की झिल्ली को कमजोर कर सकती हैं और प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया को भी बाधित कर सकती हैं। इसलिए पौधों को एक ऐसा संतुलन बनाना पड़ता है जिसमें वे प्रकाश से ऊर्जा भी लें और हानिकारक विकिरण से अपनी रक्षा भी करें।
यूवी-बी से बचाव की प्राकृतिक प्रणाली
लाखों वर्षों के विकास के दौरान पौधों ने यूवी-बी किरणों से बचाव के लिए एक विशेष प्रणाली विकसित की है। इस प्रणाली का मुख्य हिस्सा एक प्रकाश-संवेदक प्रोटीन है जिसे यूवीआर8 कहा जाता है। यह प्रोटीन यूवी-बी किरणों को पहचानने का काम करता है। जब यह प्रोटीन यूवी-बी प्रकाश को महसूस करता है, तो यह सक्रिय हो जाता है और पौधे के अंदर कई प्रकार की जैविक प्रक्रियाएं शुरू कर देता है। यह अध्ययन प्लांट फिजियोलॉजी नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।
इन प्रक्रियाओं के दौरान हजारों जीनों की गतिविधि बदल जाती है। इसके साथ ही ऐसे रसायनों का उत्पादन बढ़ जाता है जो पौधों को सुरक्षा प्रदान करते हैं और उन्हें पर्यावरण के अनुसार ढलने में मदद करते हैं। इस तरह पौधा खुद को यूवी-बी के नुकसान से बचाने की कोशिश करता है।
प्राचीन पौधे पर शोध: मार्केन्शिया पॉलीमॉर्फा
वैज्ञानिकों ने इस पूरी प्रणाली को समझने के लिए एक बहुत पुराने प्रकार के पौधे पर अध्ययन किया, जिसका नाम मार्केन्शिया पॉलीमॉर्फा है। यह पौधा उन शुरुआती पौधों में से एक है जिन्होंने लगभग 40 करोड़ साल पहले पृथ्वी पर जमीन पर जीवन बसाना शुरू किया था।
स्विट्जरलैंड के जेनेवा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने पाया कि इस पौधे में यूवी-बी पहचानने की मूल प्रणाली आज के आधुनिक पौधों जैसी ही है। यानी यूवीआर8 प्रोटीन का काम करने का तरीका बहुत पुराना और लगभग बिना बदलाव के आज भी मौजूद है। यह दर्शाता है कि पौधों की यूवी-बी पहचान प्रणाली बहुत पहले ही विकसित हो चुकी थी।
आधुनिक पौधों से तुलना
जब वैज्ञानिकों ने आधुनिक फूलदार पौधों जैसे अराबिडोप्सिस थालियाना का अध्ययन किया, तो उन्होंने देखा कि इनमें यूवी-बी प्रतिक्रिया प्रणाली और अधिक जटिल हो चुकी है। आधुनिक पौधों में कई अतिरिक्त प्रोटीन और नियंत्रण तंत्र जुड़ चुके हैं जो विकास और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाते हैं।
इस तुलना से पता चला कि मूल प्रणाली तो वही पुरानी है, लेकिन समय के साथ उसके नियंत्रण और संचालन के तरीके बदलते गए हैं।
कॉप1 और एसपीए प्रोटीन की भूमिका
इस अध्ययन में दो महत्वपूर्ण प्रोटीनों की भूमिका भी सामने आई। इनमें से एक है कॉप1 और दूसरा है एसपीए प्रोटीन्स।
आधुनिक फूलदार पौधों में ये दोनों प्रोटीन पौधों की वृद्धि और प्रकाश के प्रति प्रतिक्रिया को नियंत्रित करते हैं। लेकिन प्राचीन पौधे मार्केन्शिया पॉलीमॉर्फा में इनका व्यवहार अलग पाया गया। यहां एसपीए प्रोटीन पौधे की यूवी-बी से सुरक्षा को कम करता हुआ दिखा। आश्चर्य की बात यह है कि जिन पौधों में एसपीए नहीं था, वे यूवी-बी किरणों के प्रति अधिक सहनशील पाए गए। इससे पता चलता है कि शुरुआती पौधों में यह प्रोटीन आज की तरह विकसित भूमिका में नहीं था।
जलवायु परिवर्तन का महत्व
इस शोध से वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिली है कि पौधों की यूवी-बी सुरक्षा प्रणाली बहुत प्राचीन है, लेकिन समय के साथ उसकी संरचना और नियंत्रण में बड़े बदलाव हुए हैं। मूल आधार लगभग वही रहा, लेकिन उसे नियंत्रित करने वाले तंत्र विकसित होते गए।
आज जब जलवायु परिवर्तन के कारण सूर्य के प्रकाश और यूवी-बी विकिरण की स्थिति बदल रही है, तब यह समझना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि पौधे इन बदलावों के प्रति कैसे प्रतिक्रिया देंगे। यह शोध भविष्य में फसलों को अधिक मजबूत और पर्यावरण के अनुकूल बनाने में भी मदद कर सकता है।