दाहोद के अगासवानी गांव में खेत से करीब छह इंच लंबा दो सिर और चार आंखों वाला दुर्लभ सांप मिला। फोटो: एक्स/एटदीक्षित गुजरात
वन्य जीव एवं जैव विविधता

अजब-गजब: गुजरात में मिला दो सिर और चार आंखों वाला दुर्लभ सांप

गुजरात के दाहोद में खेत से मिला दो सिर और चार आंखों वाला दुर्लभ वुल्फ स्नेक, बाइसेफली नाम की असामान्य स्थिति ने खींचा सबका ध्यान

Dayanidhi

  • दाहोद के अगासवानी गांव में खेत से करीब छह इंच लंबा दो सिर और चार आंखों वाला दुर्लभ सांप मिला।

  • स्थानीय लोगों की सूचना पर दाहोद प्रकृति मित्र मंडल की टीम मौके पर पहुंची और सांप को सुरक्षित रेस्क्यू किया।

  • सांप की पहचान वुल्फ स्नेक के रूप में हुई है, जो जहरीला नहीं होता और आमतौर पर इंसानों के लिए हानिरहित माना जाता है।

  • विशेषज्ञों के अनुसार, बाइसेफली एक दुर्लभ विकास संबंधी स्थिति है, जिसमें एक शरीर पर दो सिर विकसित हो जाते हैं।

  • स्थानीय वन्यजीव कार्यकर्ताओं के अनुसार, यह गुजरात में दो सिर वाले सांप का पहला दर्ज मामला बताया जा रहा है।

गुजरात के दाहोद जिले में एक खेत से बेहद दुर्लभ और अनोखा सांप मिलने के बाद स्थानीय लोगों और वन्यजीव प्रेमियों में उत्सुकता बढ़ गई। इस सांप के एक शरीर पर दो सिर और चार आंखें हैं। करीब छह इंच लंबे इस सांप को दाहोद जिले के धनपुर तालुका के अगासवानी गांव में एक खेत से सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया गया।

स्थानीय लोगों ने खेत में इस असामान्य सांप को देखा तो इसकी जानकारी वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों को दी। सूचना मिलने के बाद दाहोद प्रकृति मित्र मंडल के सदस्य मौके पर पहुंचे और सांप को सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया।

भेड़िया सांप की पहचान

जानकारी के अनुसार, इस सांप की पहचान वुल्फ स्नेक यानी भेड़िया सांप के रूप में की गई है। यह सांप जहरीला नहीं होता और आमतौर पर इंसानों के लिए हानिरहित माना जाता है। हालांकि इस सांप को खास बनाने वाली बात इसकी प्रजाति नहीं, बल्कि इसका असामान्य शारीरिक विकास है।

सांप के एक ही शरीर से दो अलग-अलग सिर निकले हुए हैं। दोनों सिरों में अलग-अलग आंखें दिखाई देती हैं। इसी वजह से स्थानीय लोगों के बीच यह सांप आकर्षण का केंद्र बन गया है।

बाइसेफली क्या है?

विशेषज्ञों के अनुसार, एक ही शरीर पर दो सिर होने की स्थिति को बाइसेफली कहा जाता है। यह पॉलीसेफली यानी एक से अधिक सिर होने वाली विकास संबंधी असामान्यता का एक प्रकार है।

यह स्थिति भ्रूण के विकास के दौरान पैदा होती है। माना जाता है कि कई मामलों में दो विकसित हो रहे भ्रूण पूरी तरह अलग नहीं हो पाते। इसके कारण एक ही शरीर पर दो सिर विकसित हो सकते हैं। ऐसी असामान्यताएं सांपों के अलावा कछुए, मछली, पक्षी, उभयचर और कुछ स्तनधारी जीवों में भी देखी गई हैं।

हालांकि इस तरह के मामले बेहद दुर्लभ होते हैं। वैज्ञानिक साहित्य में सांपों में दर्ज होने वाली प्रमुख जन्मजात असामान्यताओं में बाइसेफली का उल्लेख मिलता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि दो सिर वाले सांप आम हैं।

दोनों सिरों का व्यवहार अलग हो सकता है

दो सिर वाले सांपों में दोनों सिरों की गतिविधियों में कुछ हद तक स्वतंत्रता हो सकती है। दोनों सिर अलग-अलग दिशा में प्रतिक्रिया दे सकते हैं और खतरे या भोजन को लेकर अलग प्रतिक्रिया दिखा सकते हैं। कुछ मामलों में दोनों सिरों के बीच तालमेल की समस्या भी हो सकती है।

इस तरह की स्थिति सांप के लिए जंगल में जीवन को मुश्किल बना सकती है। भोजन पकड़ने, आगे बढ़ने, खतरे से बचने और शिकारियों से बचने के दौरान दोनों सिरों के अलग-अलग तरीके से प्रतिक्रिया करने की संभावना रहती है।

इस सांप के दोनों सिरों में अलग-अलग आंखें हैं। स्थानीय वन्यजीव कार्यकर्ताओं का मानना है कि दोनों सिरों में अपने-अपने मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी संरचनाएं हो सकती हैं। हालांकि दोनों सिर कितने स्वतंत्र रूप से काम करते हैं, इसका सही पता विस्तृत वैज्ञानिक जांच के बाद ही चल सकता है।

गुजरात में पहली घटना होने का दावा

दाहोद प्रकृति मित्र मंडल के अनुसार, गुजरात में इस तरह का मामला पहली बार सामने आया है। स्थानीय समूह का यह भी दावा है कि भारत में दो सिर वाले सांपों के ऐसे बहुत कम मामले सामने आए हैं। इनमें कोबरा और वुल्फ स्नेक के मामले भी शामिल बताए जाते हैं।

हालांकि, इन आंकड़ों की पुष्टि के लिए वैज्ञानिक और आधिकारिक रिकॉर्ड की जरूरत होगी। ऐसे दुर्लभ मामलों का दस्तावेजीकरण वन्यजीवों में होने वाली प्राकृतिक जैविक विविधता को समझने में मदद करता है।

करीब एक साल का बताया जा रहा है सांप

स्थानीय वन्यजीव बचाव दल के अनुसार, रेस्क्यू किया गया सांप करीब एक साल का बताया जा रहा है। फिलहाल टीम उसकी सुरक्षा और उचित देखभाल के लिए कदम उठा रही है।

इस दुर्लभ सांप का सामने आना यह भी दिखाता है कि प्रकृति में कभी-कभी विकास के दौरान ऐसी असामान्य जैविक स्थितियां पैदा हो सकती हैं। दाहोद में मिले इस दो सिर वाले सांप ने न केवल स्थानीय लोगों का ध्यान खींचा है, बल्कि वन्यजीवों की अनोखी और विविध दुनिया को समझने का एक और मौका भी दिया है।