ग्रेट ऑक्सीडेशन इवेंट: पृथ्वी के वायुमंडल में ऑक्सीजन का बड़ा वृद्धि काल लगभग 2.1–2.4 अरब साल पहले।
साइनोबैक्टीरिया की भूमिका: ये माइक्रोब ऑक्सीजन उत्पन्न करते थे, लेकिन उनके विकास में देरी के कारण वायुमंडल में ऑक्सीजन कम थी।
निकल और यूरिया का प्रभाव: उच्च स्तर के निकल और यूरिया ने प्रारंभिक साइनोबैक्टीरिया की वृद्धि को सीमित किया।
नया शोध मॉडल: निकल घटने और यूरिया स्थिर होने पर साइनोबैक्टीरिया फैलाव हुआ, जिससे ऑक्सीजन का उत्पादन बढ़ा।
भविष्य और जीवन खोज: अध्ययन से अन्य ग्रहों पर जीवन के संकेत पहचानने और ऑक्सीजन बढ़ने की प्रक्रियाओं को समझने में मदद मिलती है।
पृथ्वी का इतिहास अनगिनत रहस्यों से भरा हुआ है। इनमें से एक सबसे महत्वपूर्ण बदलाव था वायुमंडल में ऑक्सीजन का अचानक बढ़ना, जिसे वैज्ञानिक “ग्रेट ऑक्सीकरण घटना” कहते हैं। यह घटना लगभग 2.1 से 2.4 अरब साल पहले हुई थी और इसी के कारण पृथ्वी पर जटिल जीवन का विकास संभव हुआ।
लेकिन यहां एक बड़ा सवाल था। साइनोबैक्टीरिया नामक सूक्ष्मजीवों ने ऑक्सीजन पैदा करने वाली प्रकाश-संश्लेषण की क्षमता सैकड़ों साल पहले विकसित कर ली थी। फिर भी वायुमंडल में ऑक्सीजन की मात्रा लंबे समय तक बहुत कम क्यों रही?
इस रहस्य का हाल ही में एक शोध अध्ययन ने नया उत्तर दिया है। शोधकर्ताओं ने पाया कि निकल और यूरिया नामक दो सामान्य लेकिन महत्वपूर्ण रसायनों ने प्रारंभिक पृथ्वी पर साइनोबैक्टीरिया के विकास को सीमित किया। यही कारण था कि ऑक्सीजन का स्तर अचानक नहीं बढ़ सका।
ग्रेट ऑक्सीडेशन इवेंट की देरी का रहस्य
जब पृथ्वी का वायुमंडल ऑक्सीजन से भरने लगा, तब यह ग्रह जटिल जीवन के लिए अनुकूल बन गया। लेकिन इसके शुरू होने में लंबा अंतर था। वैज्ञानिकों ने दशकों तक इस देरी का कारण खोजने की कोशिश की। पहले कई विचार सामने आए जैसे कि ज्वालामुखीय गैसें, रासायनिक प्रतिक्रियाएं और माइक्रोबियल प्रक्रियाएं। परंतु पूर्ण कारण अब तक स्पष्ट नहीं हो सका।
हालिया शोध ने इस बात पर गौर किया कि निकल और यूरिया प्रारंभिक साइनोबैक्टीरिया के लिए कैसे बाधा बन सकते हैं।
निकल और यूरिया की भूमिका
साइनोबैक्टीरिया, जो ऑक्सीजन पैदा करते हैं, तब तक प्रभावी नहीं हो सकते जब तक उनका विकास रुकावटों के कारण सीमित न हो। शोधकर्ताओं ने पाया:
बहुत ज्यादा निकल और यूरिया के स्तर प्रारंभिक पृथ्वी में साइनोबैक्टीरिया की संख्या बढ़ने से रोकते थे।
जैसे-जैसे निकेल का स्तर घटा और यूरिया स्थिर हुआ, साइनोबैक्टीरिया तेजी से बढ़ने लगे।
इसके परिणामस्वरूप ऑक्सीजन का लगातार उत्पादन हुआ और ग्रेट ऑक्सीडेशन इवेंट शुरू हुआ।
शोध पत्र में शोधकर्ता के हवाले से कहा गया है कि निकल और यूरिया का आपसी संबंध बेहद जटिल है। सही मात्रा में ये साइनोबैक्टीरिया की वृद्धि को बढ़ावा दे सकते हैं, जबकि अधिक मात्रा में वे इसे रोकते हैं।
प्रयोग और अध्ययन
शोध टीम ने आर्कियन युग की परिस्थितियों का अनुकरण करते हुए प्रयोग किए।
यूरिया का निर्माण
अमोनियम, साइट्रेट और लौह यौगिकों को मिलाकर यूवी-वी प्रकाश में रखा गया।
परिणाम: यूरिया प्राकृतिक रूप से इस परिस्थितियों में बन सकता है।
सायनोबैक्टीरिया का विकास
सिनेकोकोकस प्रजाति पीसीसी 7002 नामक साइनोबैक्टीरिया को विभिन्न मात्रा में निकेल और यूरिया में उगाया गया।
प्रकाश और अंधकार की परिस्थितियों में उनके विकास को मापा गया।
परिणाम: उच्च निकेल और यूरिया में विकास धीमा, कम मात्रा में तेज।
नई मॉडलिंग और निष्कर्ष
शुरुआती आर्कियन: भारी मात्रा में निकेल और यूरिया, सीमित साइनोबैक्टीरिया तथा ऑक्सीजन कम।
बाद का आर्कियन: निकल घटा और यूरिया स्थिर तथा, साइनोबैक्टीरिया फैलाव से ऑक्सीजन बढ़ी और ग्रेट ऑक्सीडेशन इवेंट।
इस शोध ने यह स्पष्ट किया कि ऑक्सीजन का बढ़ना केवल जीव वैज्ञानिक प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि रासायनिक कारकों द्वारा नियंत्रित थी।
पृथ्वी के बाहर जीवन की खोज में भी सहायक
इस अध्ययन के निष्कर्ष पृथ्वी की ही नहीं, बल्कि अंतरिक्ष में जीवन खोजने के प्रयासों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। यदि हम यह समझ सकें कि ऑक्सीजन का स्तर कैसे बढ़ता है, तो हम अन्य ग्रहों पर जीवन के संकेत (बायोसिग्नेचर) को पहचानने में सक्षम होंगे।
जैसे पृथ्वी पर निकल और यूरिया ने ऑक्सीजन की मात्रा को नियंत्रित किया, वैसे ही किसी और ग्रह पर भी रासायनिक तत्व जीवन के विकास और ऑक्सीजन स्तर को प्रभावित कर सकते हैं।
इस शोध ने दिखाया कि कैसे छोटे रासायनिक बदलाव पृथ्वी के जीवन और वातावरण को पूरी तरह बदल सकते हैं। यूरिया प्राकृतिक रूप से बन सकती थी और निकल के स्तर में बदलाव ने शुरुआती जीवन की गति को प्रभावित किया। निकेल और यूरिया के घटने से सायनोबैक्टीरिया का विस्तार हुआ और ऑक्सीजन का उत्पादन बढ़ा। इससे ग्रह पर जीवन की जटिलता संभव हुई।
इस प्रकार, पृथ्वी पर जीवन की कहानी केवल जीवों की नहीं, बल्कि रासायनिक और जैविक प्रक्रिया के संयोजन की भी कहानी है। यह शोध हमें यह समझने में मदद करता है कि कैसे जीवन और वातावरण एक-दूसरे से गहरे जुड़े हैं और भविष्य में अन्य ग्रहों पर जीवन खोजने में मार्गदर्शन कर सकते हैं।