नई तकनीक में अतिरिक्त महंगे धातु उत्प्रेरक की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे भविष्य में ग्रीन हाइड्रोजन की लागत घट सकती है। फोटो साभार: आईस्टॉक
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

सूरज की रोशनी बनेगी हाइड्रोजन, वैज्ञानिकों ने खोजी स्वच्छ ऊर्जा की नई राह

सूरज की रोशनी से पानी फिर हाइड्रोजन बनाने की नई खोज, महंगे उत्प्रेरक की जरूरत नहीं, सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा की उम्मीद

Dayanidhi

  • ओरेगन स्टेट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने सूरज की रोशनी से पानी से हाइड्रोजन बनाने वाली नई सामग्री विकसित की है।

  • नई सामग्री बीवीआर-19 प्रकाश ऊर्जा का इस्तेमाल कर पानी से हाइड्रोजन उत्पादन की प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाती है।

  • शोध में इस्तेमाल एमओएफ सामग्री में मौजूद सल्फर बंधन रोशनी पड़ने पर सक्रिय होकर हाइड्रोजन बनाने में मदद करता है।

  • नई तकनीक में अतिरिक्त महंगे धातु उत्प्रेरक की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे भविष्य में हरित हाइड्रोजन की लागत घट सकती है।

  • वैज्ञानिकों की यह खोज स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने में मददगार हो सकती है।

अमेरिका की ओरेगन स्टेट यूनिवर्सिटी (ओएसयू) के वैज्ञानिकों ने ऐसी नई सामग्री विकसित की है, जो सूरज की रोशनी की मदद से पानी से हाइड्रोजन बनाने में मदद कर सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह खोज भविष्य में स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। इस शोध का नेतृत्व ओएसयू कॉलेज ऑफ साइंस के शोधकर्ताओं ने किया है।

हाइड्रोजन को भविष्य के महत्वपूर्ण ईंधनों में से एक माना जाता है। इसका इस्तेमाल कारों में ईंधन सेल चलाने, अमोनिया जैसे रसायन बनाने, धातुओं को साफ करने और प्लास्टिक के निर्माण में किया जाता है। लेकिन आज दुनिया में ज्यादातर हाइड्रोजन प्राकृतिक गैस से बनाया जाता है। इस प्रक्रिया में बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड निकलती है, जिससे जलवायु परिवर्तन की समस्या बढ़ती है। यह शोध जर्नल ऑफ द अमेरिकन केमिकल सोसाइटी में प्रकाशित किया गया है।

पानी से हाइड्रोजन बनाने की कोशिश

वैज्ञानिक लंबे समय से पानी को तोड़कर हाइड्रोजन और ऑक्सीजन बनाने के सस्ते और साफ तरीकों की तलाश कर रहे हैं। पानी से हाइड्रोजन बनाना प्राकृतिक गैस से हाइड्रोजन बनाने की तुलना में पर्यावरण के लिए बेहतर है। हालांकि इसके लिए इस्तेमाल होने वाली मौजूदा तकनीकों में काफी बिजली की जरूरत पड़ती है।

इसी समस्या को दूर करने के लिए ओएसयू के वैज्ञानिकों ने प्रकाश की मदद से काम करने वाली एक विशेष सामग्री तैयार की है। इसे फोटो-कैटलिस्ट कहा जाता है। यह सामग्री रोशनी को सोखकर ऊर्जा प्राप्त करती है और उस ऊर्जा का इस्तेमाल रासायनिक प्रक्रिया को तेज करने में करती है।

क्या है नई सामग्री बीवीआर-19?

वैज्ञानिकों ने इस शोध में बीवीआर-19 नाम की एक सामग्री का इस्तेमाल किया है। यह मेटल-ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क यानी एमओएफ परिवार की सामग्री है। एमओएफ ऐसी विशेष संरचनाएं होती हैं जिनमें बहुत छोटे-छोटे छेद होते हैं। इन्हें अलग-अलग धातुओं और कार्बनिक अणुओं से बनाया जा सकता है।

बीवीआर-19 की खास बात इसमें मौजूद सल्फर-सल्फर बंधन है। जब इस सामग्री पर रोशनी पड़ती है तो यह बंधन थोड़े समय के लिए टूट जाता है। इससे ऐसे सक्रिय सल्फर कण बनते हैं जो हाइड्रोजन बनाने वाली प्रक्रिया में इलेक्ट्रॉनों को सही जगह पहुंचाने में मदद करते हैं।

वैज्ञानिकों के अनुसार, इस प्रक्रिया में सामग्री का कार्बनिक हिस्सा बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यानी केवल धातु के परमाणुओं पर निर्भर रहने के बजाय सामग्री के दूसरे हिस्से को भी प्रकाश से ऊर्जा लेने और उसका इस्तेमाल करने के लिए तैयार किया जा सकता है।

महंगे धातु उत्प्रेरक की जरूरत नहीं

इस खोज की एक बड़ी खासियत यह है कि इसमें अतिरिक्त महंगे धातु उत्प्रेरक की जरूरत नहीं पड़ती। इससे भविष्य में प्रकाश की मदद से हाइड्रोजन बनाने वाली प्रणालियों को सरल और संभावित रूप से सस्ता बनाया जा सकता है।

बीवीआर-19 की एक और विशेषता यह है कि यह सामान्य तापमान पर पानी के घोल में अपने आप बन सकती है। वैज्ञानिकों के लिए यह बात खास महत्व रखती है, क्योंकि इससे इसके निर्माण की प्रक्रिया आसान हो सकती है और ऊर्जा की जरूरत भी कम हो सकती है।

सस्ती हरित हाइड्रोजन की उम्मीद

आज प्राकृतिक गैस से हाइड्रोजन बनाने की लागत करीब 1.50 डॉलर प्रति किलोग्राम बताई जाती है, जबकि पानी से बनने वाली ग्रीन हाइड्रोजन की लागत लगभग पांच डॉलर प्रति किलोग्राम हो सकती है। इसलिए ग्रीन हाइड्रोजन को बड़े स्तर पर इस्तेमाल करने के लिए उसकी लागत कम करना जरूरी है।

शोधकर्ताओं का मानना है कि उनकी खोज ऐसी नई सामग्रियों के विकास का रास्ता दिखा सकती है, जो सूरज की रोशनी का बेहतर इस्तेमाल करके ईंधन बना सकें। वैज्ञानिकों ने अलग-अलग धातुओं के साथ सामग्री के कई रूपों का अध्ययन किया और यह समझने की कोशिश की कि कौन-सी संरचना ज्यादा प्रभावी होती है।

स्वच्छ ऊर्जा के भविष्य की ओर कदम

यह शोध अभी व्यावसायिक स्तर पर हाइड्रोजन उत्पादन का समाधान नहीं है। बड़े पैमाने पर इसका इस्तेमाल करने से पहले इसकी क्षमता, लंबे समय तक स्थिरता, उत्पादन की गति और लागत जैसे कई पहलुओं पर और अध्ययन करना होगा। फिर भी यह खोज महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह वैज्ञानिकों को सौर ऊर्जा से ईंधन बनाने वाली नई सामग्रियों को डिजाइन करने के लिए एक नई दिशा देती है।

अगर इस तकनीक को आगे विकसित कर लागत कम की जा सकी, तो भविष्य में सूरज की रोशनी और पानी जैसे आसानी से उपलब्ध संसाधनों से स्वच्छ हाइड्रोजन तैयार करने की संभावना बढ़ सकती है। इससे जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घटाने और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने में मदद मिल सकती है।