प्रतीकात्मक तस्वीर: आईस्टॉक 
स्वच्छता

18 साल से बन रहा था डंपिंग ग्राउंड, एनजीटी ने कसा शिकंजा, बायो-माइनिंग के दिए आदेश

18 साल पुराने कुबनूर डंप साइट मामले में एनजीटी ने बायो-माइनिंग जल्द से जल्द पूरी करने और एक अप्रैल 2026 से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम सख्ती से लागू करने का आदेश दिया है

Susan Chacko, Lalit Maurya

  • पर्यावरण उल्लंघनों पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने सख्त रुख अपनाते हुए केरल के कुबनूर डंप साइट पर 18 साल से जमा कचरे को हटाने के लिए बायो-माइनिंग जल्द पूरी करने और 1 अप्रैल 2026 से नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम सख्ती से लागू करने का आदेश दिया है।

  • वहीं एक अन्य मामले में चेन्नई की कूम नदी में मलबा और रेत डालने पर पूरी तरह रोक लगाते हुए ट्रिब्यूनल ने साफ कहा है कि किसी भी हालत में नदी के प्राकृतिक बहाव से छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए।

  • ट्रिब्यूनल के इन आदेशों ने साफ संकेत दिया है कि पर्यावरण नियमों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की दक्षिणी पीठ ने 24 मार्च 2026 को केरल के कासरगोड जिले के मंगलपडी ग्राम पंचायत को कुबनूर डंप साइट पर चल रहे बायो-माइनिंग के काम को जल्द से जल्द पूरा करने का निर्देश दिया है।

ट्रिब्यूनल ने साइट पर तुरंत पर्याप्त अग्नि सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है, जिसमें अग्निशमन उपकरण, पानी भंडारण सुविधा और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली शामिल हों।

ट्रिब्यूनल ने यह भी निर्देश दिया कि एक अप्रैल 2026 से पंचायत को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 का सख्ती से पालन करना होगा। इसके तहत कचरे का स्रोत पर अलग करना और म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट की वैज्ञानिक प्रोसेसिंग शामिल है।

आदेश में यह भी कहा गया है कि कुबनूर साइट पर भविष्य में कचरा फेंकने से रोकने के लिए नियमित निगरानी, चेतावनी बोर्ड और सीसीटीवी निगरानी जैसी व्यवस्थाएं की जाएं, ताकि अवैध डंपिंग पर पूरी तरह रोक लग सके। केरल राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को बायो-माइनिंग कार्य की लगातार निगरानी करने और मंगलपडी ग्राम पंचायत पर लगाए गए 60 लाख रुपए के पर्यावरणीय मुआवजे का उपयोग जमीन की बहाली के लिए करने का निर्देश दिया है।

साथ ही, स्थानीय स्वशासन विभाग के अतिरिक्त सचिव को तीन महीने के भीतर ट्रिब्यूनल के सामने बायो-माइनिंग कार्य पूरा होने और साइट की बहाली को लेकर अनुपालन रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है।

यह मामला कुबनूर में स्थित एक छोड़ी गई लेटराइट पत्थर खदान में कचरा डंपिंग से जुड़ा है। इस मामले को ट्रिब्यूनल ने स्वतः संज्ञान में लिया था। यह संज्ञान 26 जून 2023 को केरल हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और स्टेट लेवल मॉनिटरिंग कमेटी के चेयरमैन जस्टिस ए वी रामकृष्ण पिल्लई की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया था।

रिपोर्ट के मुताबिक करीब ढाई एकड़ में फैली यह परित्यक्त खदान पिछले 18 वर्षों से बिना अलग किए म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट का डंपिंग ग्राउंड बनी हुई थी। यहां हर दिन करीब 15 से 20 टन कचरा बिना किसी वैज्ञानिक प्रोसेसिग के डाला जाता रहा। चूंकि यह जगह पहले खदान थी, इसलिए जमा कचरे का करीब 90 फीसदी हिस्सा जमीन की सतह के नीचे दबा हुआ है, जिससे पर्यावरणीय खतरा और बढ़ गया है।

कूम नदी को बचाने के लिए एनजीटी सख्त, मलबा-रेत डंपिंग पर पूरी तरह रोक

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 24 मार्च 2026 को कूम नदी को लेकर सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा कि चेन्नई पोर्ट-मदुरावोयल एलिवेटेड रोड परियोजना के जरूरी काम के अलावा नदी में किसी भी तरह का मलबा, रेत या निर्माण सामग्री नहीं डाली जाएगी। ट्रिब्यूनल ने जल संसाधन विभाग और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को इस आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा है।

एनजीटी की दक्षिणी पीठ ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को निर्देश दिया कि सभी अस्थाई ढांचे जैसे वर्किंग प्लेटफॉर्म, पाइलिंग रिग और अन्य निर्माण ढांचे केवल जरूरत पड़ने पर ही लगाए जाएं और काम पूरा होते ही तुरंत हटा दिए जाएं।

जल संसाधन विभाग को नदी के पूरे हिस्से पर कड़ी निगरानी रखने और किसी भी अवैध मलबा डंपिंग या अतिक्रमण पर तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट कहा कि किसी भी स्थिति में, खासकर मानसून के दौरान, नदी के प्राकृतिक बहाव में बाधा नहीं आनी चाहिए और बाढ़ से निपटने के पर्याप्त इंतजाम होने चाहिए।

जस्टिस पुष्पा सत्यनारायण की पीठ ने यह भी कहा कि नदी क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया तेजी से पूरी की जाए। साथ ही ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन और चेन्नई रिवर्स रेस्टोरेशन ट्रस्ट को ईको-रेस्टोरेशन के काम, जैसे बाउंड्री वॉल बनाना और कचरा हटाना तय समय सीमा में जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

गौरतलब है कि यह मामला 11 जनवरी 2024 को अंग्रेजी अखबार द टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी एक खबर के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए दर्ज किया गया है। रिपोर्ट में कूम नदी के किनारे बड़े पैमाने पर अतिक्रमण, रेत और मलबा डालने तथा खासकर कोयंबेडु के पास नदी के हिस्से को 10 फीट तक भरकर समतल करने की बात सामने आई थी।