प्रतीकात्मक तस्वीर: अग्निमिरह बासु/ सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) 
नदी

यूपी सरकार का हलफनामा, मेरठ में 30 फीसदी सीवर कवरेज, मानकों पर खरे नहीं जाजमऊ के दो एसटीपी

एनजीटी में दाखिल यूपी सरकार के हलफनामे से पता चला है कि मेरठ में सीवर कवरेज महज 30 फीसदी है और कानपुर में जाजमऊ के दो एसटीपी में क्रोमियम का स्तर मानकों से अधिक है

Susan Chacko, Lalit Maurya

  • उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में दाखिल हलफनामे में गंगा और उसकी सहायक नदियों से जुड़े 37 जिलों में चल रहे कार्यों की प्रगति के साथ जमीनी चुनौतियां भी उजागर हुई हैं। मेरठ में जहां सीवर कवरेज अभी भी सिर्फ 30 फीसदी तक सीमित है और हजारों घर कनेक्शन से वंचित हैं, वहीं बागपत में भी बड़ी आबादी सीवर नेटवर्क से बाहर है।

  • कानपुर में सात में से पांच एसटीपी मानकों पर खरे पाए गए, लेकिन जाजमऊ के दो प्लांट्स में टेनरी उद्योगों के कारण क्रोमियम स्तर अधिक मिला, जो गंभीर प्रदूषण का संकेत है।

  • रिपोर्ट बताती है कि फ्लड प्लेन जोनिंग, एसटीपी क्षमता बढ़ाने और सीवर नेटवर्क विस्तार में प्रगति हुई है, लेकिन अधूरी सीवर व्यवस्था और औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन की खामियां अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं, जिससे गंगा सफाई अभियान की रफ्तार प्रभावित हो रही है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने 9 अप्रैल 2026 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में एक विस्तृत हलफनामा दाखिल किया है। इसमें गंगा और उसकी सहायक नदियों से जुड़े 37 जिलों में चल रहे कार्यों और प्रगति की जानकारी दी गई है। यह हलफनामा एनजीटी द्वारा 27 नवंबर 2025 को दिए सबमिट किया गया है।

हलफनामे में सामने आया है कि मेरठ नगर निगम क्षेत्र में फिलहाल करीब 30 फीसदी हिस्से तक ही सीवर कनेक्शन की सुविधा पहुंची है। शहर में कुल 1,37,042 घरेलू सीवर कनेक्शन उपलब्ध हैं, जो करीब 797 किलोमीटर लंबे मौजूदा नेटवर्क से जुड़े हैं। हालांकि शहर को 100 फीसदी सीवर कवरेज देने के लिए अमृत योजना के तहत एक व्यापक कार्ययोजना तैयार कर केंद्र सरकार के पोर्टल पर प्रस्तुत की गई है।

रिपोर्ट में उन 37 जिलों का जिक्र है, जहां गंगा और उसकी सहायक नदियां बहती हैं, वहां क्या कार्रवाई हुई और मेरठ उनमें से एक था।

मेरठ में गंगा के फ्लड प्लेन जोन का निर्धारण 1:25 बाढ़ आवृत्ति (फ्लड फ्रीक्वेंसी रेश्यो) के आधार पर पूरा हो चुका है, जबकि केंद्रीय जल आयोग 1:100 बाढ़ आवृत्ति के आधार पर अंतिम निर्धारण कर रहा है। इसी तरह हिंडन नदी के फ्लड प्लेन जोन के लिए सर्वे ऑफ इंडिया का सर्वेक्षण जारी है।

बागपत में सीवर गैप: 34,000 से अधिक घर अब भी बिना कनेक्शन

बागपत जिले में भी हिंडन और कृष्णी नदियों के फ्लड प्लेन जोन के लिए सर्वे कार्य चल रहा है। यहां करीब 34,446 घरों तक सीवर लाइन नहीं पहुंची है।

बागपत में फिलहाल एक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) कार्यरत है, जिसकी क्षमता 14 एमएलडी है और यह चार नालों का ट्रीट करता है। एक अन्य 16 एमएलडी क्षमता का एसटीपी प्रस्तावित है, जो डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) के चरण में है।

रिपोर्ट के अनुसार प्रस्तावित परियोजनाओं के बाद सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता पर्याप्त हो जाएगी। साथ ही, किसी भी औद्योगिक अपशिष्ट के सीधे नालों में मिलने की पुष्टि नहीं हुई है।

कानपुर में मानकों पर खरे सात में से पांच एसटीपी

कानपुर की बात करें तो हलफनामे में जानकारी दी गई है कि शहर में कुल सात सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) चालू हैं, जिनकी कुल क्षमता 506 एमएलडी है। फरवरी 2026 की आईआईटी कानपुर और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार इनमें से पांच एसटीपी मानकों के अनुरूप पाए गए हैं।

हलफनामे में बताया गया है कि केआरएमपीएल को कानपुर के जाजमऊ, बिंगवान और सजारी क्षेत्रों में चल रहे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स से निकलने वाले स्लज की जांच आईआईटी कानपुर से कराने के निर्देश दिए गए थे।

आईआईटी कानपुर की रिपोर्ट के अनुसार, जाजमऊ स्थित 130 एमएलडी और 43 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी को छोड़कर सभी ट्रीटमेंट प्लांटों में क्रोमियम का स्तर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के मानकों के अनुरूप पाया गया।

हालांकि, जाजमऊ के इन्हीं दोनों एसटीपी में क्रोमियम की मात्रा मानक से अधिक दर्ज की गई, जिसका प्रमुख कारण आसपास स्थित टेनरी उद्योगों से बिना ट्रीटमेंट के अपशिष्ट का घरेलू सीवेज में मिलना बताया गया है। इस गंभीर समस्या को देखते हुए खतरनाक स्लज के सुरक्षित डिस्पोजल के लिए एक प्रस्ताव राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) को भेज दिया गया है।

10 नदियों का फ्लड जोन पूरा, 28 पर कार्य जारी

हलफनामे में कहा गया है कि 10 नदियों की फ्लड प्लेन जोनिंग पूरी हो चुकी है। इन नदियों में गंगा, यमुना, रामगंगा, सुवाव, बूढ़ीगंगा, सोलानी, मंदाकिनी, केन, बेतवा और खोखरी शामिल हैं। वहीं 28 नदियों के लिए फ्लड प्लेन जोनिंग का काम चल रहा है, जिनमें काली (पूर्व), वरुणा, हिंडन, गोमती, घाघरा, राप्ती, सई, टेढ़ी, पहुंज, गंगन, अस्सी आदि नदियां शामिल हैं। 15 नदियों पर यह काम शुरू किया गया है।

एनजीटी ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया है कि वह नोटिफिकेशन जारी होने के बाद से जिला गंगा समितियों के बजट, उसके उपयोग और कार्यों का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक किया जाए। साथ ही प्रत्येक ग्राम सभा, नगर निकाय और स्थानीय इकाई में नामित नोडल अधिकारियों की सूची और गंगा व उसकी सहायक नदियों की सफाई एवं प्रदूषण रोकथाम के लिए उनके द्वारा की गई कार्रवाई का विस्तृत विवरण भी प्रस्तुत किया जाए।

रिपोर्ट साफ तौर पर दर्शाती है कि उत्तर प्रदेश में गंगा और उसकी सहायक नदियों के संरक्षण को लेकर प्रशासनिक स्तर पर काम तेज हुआ है। फ्लड प्लेन जोनिंग, एसटीपी सुधार और सीवर नेटवर्क विस्तार में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। मेरठ, बागपत और कानपुर जैसे जिलों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन सीवर कवरेज की कमी, औद्योगिक प्रदूषण और कुछ एसटीपी में मानकों से अधिक प्रदूषक स्तर जैसी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।