नदी

मेघालय सरकार का दावा: मिंटडू नदी को बचाने के लिए उठाए गए हैं सख्त कदम

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में दाखिल रिपोर्ट में मेघालय सरकार ने दावा किया है कि मिंटडू नदी से मलबा हटा दिया गया है और मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए मानसून से पहले अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं

Susan Chacko, Lalit Maurya

  • मिंटडू नदी मामले में मेघालय सरकार ने एनजीटी को बताया है कि सड़क निर्माण से नदी और आसपास के खेतों में जमा मिट्टी-पत्थरों का मलबा हटा दिया गया है।

  • साथ ही मानसून से पहले कटाव रोकने के लिए पत्थर की दीवारें, पौधारोपण और बेहतर जल निकासी जैसे अतिरिक्त उपाय किए जा रहे हैं, ताकि नदी की प्राकृतिक और स्वच्छ स्थिति बनी रहे।

  • वहीं एक अन्य मामले में, एनजीटी में शिकायत के बाद यूपीपीसीबी की जांच में गाजीपुर के हरिहरपुर गांव में बिना उपचारित सीवेज के तालाब में जाने की आशंका सामने आई।

  • इसके बाद प्रशासन ने नाले का मार्ग बदलने और फिल्टर चैंबर बनाकर गंदे पानी को साफ करने की नई योजना तैयार की है, ताकि तालाब को प्रदूषण से बचाया जा सके।

मेघालय सरकार ने कहा है कि वह पश्चिम जयंतिया हिल्स की मिंटडू नदी को उसकी प्राकृतिक और स्वच्छ स्थिति में बनाए रखने के लिए हर जरूरी कदम उठा रही है। सरकार के मुताबिक सड़क निर्माण के दौरान ठेकेदार द्वारा डाली गई मिट्टी और पत्थरों को अब हटा दिया गया है।

यह जानकारी मेघालय के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) द्वारा अदालत में दाखिल एडिशनल स्टेटस रिपोर्ट में दी गई है। इस रिपोर्ट को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा 2 मार्च 2026 को दिए आदेश पर अदालत में सौंपा गया है।

नदी और खेतों से हटाया गया मलबा

रिपोर्ट के अनुसार, पिछले ठेकेदार द्वारा डाले गए मिट्टी और पत्थरों को धान के खेतों, मिंटडू नदी की सहायक धाराओं और खुद नदी से पूरी तरह साफ कर दिया गया है।

सड़क के किनारों से भी मलबा हटाया जा चुका है। जहां जरूरत थी, वहां ढलानों पर पत्थर की दीवारें (स्टोन वॉलिंग) बनाई जा रही हैं और मिट्टी खिसकने से रोकने के लिए ढलानों पर पौधारोपण भी किया जा रहा है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि सड़क पर केवल अंतिम पुल का निर्माण कार्य बाकी है, जो अब अंतिम चरण में है। कार्य के दायरे में बदलाव के कारण इसमें कुछ देरी हुई थी, लेकिन इसे मार्च 2026 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम

आगामी मानसून में मिट्टी के कटाव और मलबे के बहाव को रोकने के लिए कई अतिरिक्त कदम भी उठाए गए हैं। इनमें संवेदनशील जगहों पर रेत की बोरियां रखना, वर्षा जल को पक्के नालों और कल्वर्ट के जरिए निकालना, पत्थर की दीवारें बनाना, सड़क किनारे पेड़ और बांस लगाना तथा ढलानों को मजबूत करना शामिल है।

सरकार का कहना है कि इन उपायों के कारण 2025 में न तो मिट्टी का कटाव हुआ और न ही मलबे का बहाव दर्ज किया गया।

इसके साथ ही नए ठेकेदार को निर्देश दिया गया है कि अंतिम पुल का निर्माण पूरा होने के बाद, मानसून शुरू होने से पहले यदि कहीं भी मलबा बचा हो तो उसे पूरी तरह हटाया जाए, ताकि बारिश के दौरान कोई भी मलबा नदी या अन्य जलधाराओं में न बह सके।

एनजीटी में उठा हरिहरपुर का मामला, तालाब बचाने के लिए बदला जाएगा नाले का रास्ता

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने 10 मार्च 2026 को गाजीपुर के हरिहरपुर गांव में बन रहे सीवेज ड्रेनेज सिस्टम को लेकर एक रिपोर्ट दाखिल की है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में दायर आवेदन में आरोप लगाया गया था कि इस ड्रेनेज सिस्टम के जरिए गांव का बिना साफ किया सीवेज एक स्थानीय तालाब में छोड़े जाने की आशंका है। इससे जल प्रदूषण का खतरा पैदा हो सकता है।

इस मामले को गंभीरता से लेते हुए 22 अगस्त 2025 को यूपीपीसीबी ने पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव, गाजीपुर के जिलाधिकारी और बोर्ड के सदस्य सचिव को पत्र जारी कर तुरंत जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए थे।

इसके बाद 23 अगस्त 2025 को यूपीपीसीबी की टीम ने मौके का निरीक्षण किया। जांच के दौरान गांव के प्रतिनिधियों ने बताया कि लगभग 50 से 60 घरों का घरेलू गंदा पानी एक कच्चे गड्ढे में जमा किया जा रहा था। प्रस्ताव था कि इस गड्ढे के ओवरफ्लो को एक पक्के नाले के जरिए दूसरे कच्चे गड्ढे तक पहुंचाया जाए।

तालाब में गंदा पानी जाने से रोकने के निर्देश

निरीक्षण में पाया गया कि 470 मीटर लंबे प्रस्तावित नाले में से 270 मीटर का निर्माण ही हुआ था, जबकि बाकी हिस्सा अभी कच्चा था और निर्माण कार्य फिलहाल रुका हुआ था। टीम ने नाले में बह रहे घरेलू अपशिष्ट के नमूने भी एकत्र किए।

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गाजीपुर के जिला पंचायत अधिकारी को निर्देश दिया कि किसी भी हालत में बिना साफ किए घरेलू सीवेज तालाब में न जाने दिया जाए।

गाजीपुर के जिलाधिकारी की ओर से यूपीपीसीबी को भेजी गई रिपोर्ट में बताया गया है कि अब प्रस्तावित नाले का रुख बदल दिया गया है, ताकि गंदा पानी तालाब में न पहुंचे। ग्राम पंचायत और स्थानीय ग्रामीणों से चर्चा के बाद नाले का नया मार्ग तय किया गया है।

नई योजना के तहत नाले का पानी ग्राम सभा की जमीन की ओर मोड़ा जाएगा, जहां पहले से बने नाले से इसे जोड़ा जाएगा। इसके अंतिम छोर पर सिल्ट कैचर और फिल्टर चैंबर बनाया जाएगा, जिससे पानी को फिल्टर और साफ करने के बाद ही बाहर छोड़ा जाएगा। यह डिजाइन स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के मानकों के अनुसार तैयार किया गया है।

प्रशासन के अनुसार फिल्टर चैंबर के निर्माण के लिए लागत का अनुमान भी तैयार कर लिया गया है, जिससे भविष्य में गांव के दूषित जल का सुरक्षित निपटान सुनिश्चित किया जा सकेगा।