दुनिया स्वास्थ्य लक्ष्यों से पीछे, 2030 एसडीजी हासिल करने में मुश्किल, डब्ल्यूएचओ रिपोर्ट में प्रगति धीमी और असमान बताई गई है। फोटो साभार: आईस्टॉक
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विश्व स्वास्थ्य सांख्यिकी रिपोर्ट 2026 : दुनिया स्वास्थ्य लक्ष्यों से अब भी दूर, प्रगति धीमी और असमान

डब्ल्यूएचओ रिपोर्ट 2026: स्वास्थ्य लक्ष्यों पर दुनिया पीछे, कुछ सुधार के बावजूद प्रगति धीमी, असमानता बढ़ी, 2030 लक्ष्य हासिल करना मुश्किल बताया गया

Dayanidhi

  • दुनिया स्वास्थ्य लक्ष्यों से पीछे, 2030 एसडीजी हासिल करने में मुश्किल, डब्ल्यूएचओ रिपोर्ट में प्रगति धीमी और असमान बताई गई है।

  • एचआईवी संक्रमण में 40 प्रतिशत कमी, तंबाकू और शराब उपयोग घटा, कुछ बीमारियों में वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण सुधार दर्ज हुआ।

  • मलेरिया मामलों में 8.5 प्रतिशत वृद्धि, एनीमिया और बाल मोटापा स्थिर या बढ़ा, कई स्वास्थ्य समस्याएं अब भी गंभीर बनी हैं।

  • स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ी, अरबों लोगों को पानी, स्वच्छता और स्वच्छ ऊर्जा मिली, लेकिन लाभ सभी देशों में समान नहीं।

  • कोविड-19 से 2.21 करोड़ अतिरिक्त मौतें, वैश्विक जीवन प्रत्याशा प्रभावित, कमजोर स्वास्थ्य प्रणालियों और डेटा की कमी बड़ी चुनौती बनी।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की नई “विश्व स्वास्थ्य सांख्यिकी 2026” रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया स्वास्थ्य से जुड़े वैश्विक लक्ष्यों को 2030 तक हासिल करने की दिशा में अभी भी पीछे चल रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले दशक में कुछ महत्वपूर्ण सुधार जरूर हुए हैं, लेकिन कई क्षेत्रों में प्रगति धीमी हो गई है और कुछ जगहों पर हालात और खराब भी हुए हैं।

रिपोर्ट यह भी बताती है कि दुनिया भर में स्वास्थ्य सेवाओं और जीवन स्तर में सुधार तो हुआ है, लेकिन यह सुधार सभी देशों और क्षेत्रों में समान रूप से नहीं पहुंच पाया है। इसी कारण दुनिया अब भी सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के स्वास्थ्य से जुड़े किसी भी लक्ष्य को समय पर पूरा करने की राह पर नहीं है।

एचआईवी और अन्य बीमारियों में सुधार

रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्षों में कुछ बड़ी सफलताएं भी मिली हैं। वर्ष 2010 से 2024 के बीच नए एचआईवी संक्रमणों में लगभग 40 प्रतिशत की कमी आई है। यह एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

इसके अलावा, तंबाकू और शराब के सेवन में भी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे कई गंभीर बीमारियों के खतरे कम हुए हैं। उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगों से प्रभावित लोगों की संख्या में भी 36 प्रतिशत की कमी आई है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने यह भी बताया कि कई देशों में स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुंच बढ़ी है। 2015 से 2024 के बीच करीब 96 करोड़ लोगों को सुरक्षित पेयजल मिला, 1.2 अरब लोगों को स्वच्छ शौचालय की सुविधा मिली और 1.6 अरब लोगों को बुनियादी स्वच्छता उपलब्ध हुई। इसके साथ ही लगभग 1.4 अरब लोगों को स्वच्छ खाना पकाने के साधन भी मिले हैं।

क्षेत्रीय स्तर पर कुछ बेहतर प्रदर्शन

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ क्षेत्रों ने उल्लेखनीय सुधार किया है। अफ्रीकी क्षेत्र में एचआईवी संक्रमण में 70 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है और तपेदिक (टीबी) के मामलों में 28 प्रतिशत की कमी आई है। दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र मलेरिया से संबंधित 2025 के लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जो अच्छे संकेत हैं।

मलेरिया और कुछ स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ीं

हालांकि कई सफलताएं मिली हैं, लेकिन कुछ क्षेत्रों में स्थिति बिगड़ी भी है। रिपोर्ट के अनुसार 2015 के बाद से मलेरिया के मामलों में लगभग 8.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह दिखाता है कि इस बीमारी पर नियंत्रण की कोशिशें पर्याप्त नहीं रही हैं।

इसके अलावा महिलाओं में खून की कमी (एनीमिया) की समस्या लगभग 30.7 प्रतिशत पर स्थिर बनी हुई है, जिसमें पिछले दशक में कोई सुधार नहीं हुआ है। छोटे बच्चों में अधिक वजन की समस्या भी बढ़कर 5.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है। महिलाओं के खिलाफ हिंसा भी एक गंभीर समस्या बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार हर चार में से एक महिला अपने जीवन में अंतरंग साथी द्वारा हिंसा का सामना करती है।

स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और आर्थिक बोझ

डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दुनिया में सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज) की प्रगति बहुत धीमी हो गई है। 2015 से 2023 के बीच इसमें बहुत मामूली सुधार हुआ है।

लगभग एक चौथाई वैश्विक आबादी को स्वास्थ्य खर्च के कारण आर्थिक कठिनाई का सामना करना पड़ता है। वर्ष 2022 में करीब 160 करोड़ लोग स्वास्थ्य खर्च के कारण गरीबी में चले गए या पहले से मौजूद गरीबी और गहरी हो गई। इसके साथ ही कई देशों में टीकाकरण की दरें अभी भी लक्ष्य से कम हैं, जिससे बीमारियों के फैलने का खतरा बना हुआ है।

पर्यावरण और जीवनशैली से जुड़े खतरे

रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण पर्यावरण और जीवनशैली से जुड़े जोखिम हैं, जो तेजी से कम नहीं हो रहे हैं।

वायु प्रदूषण के कारण साल 2021 में लगभग 66 लाख लोगों की मृत्यु हुई। इसी तरह साफ पानी, स्वच्छता और स्वच्छ जीवन परिस्थितियों की कमी के कारण 14 लाख लोगों की मौत 2019 में दर्ज की गई। ये आंकड़े बताते हैं कि कई मौतें ऐसी बीमारियों और परिस्थितियों के कारण हो रही हैं जिन्हें रोका जा सकता था।

कोविड-19 का बड़ा असर

कोविड-19 महामारी ने दुनिया की स्वास्थ्य प्रणाली को गंभीर रूप से प्रभावित किया। रिपोर्ट के अनुसार 2020 से 2023 के बीच लगभग 2.21 करोड़ अतिरिक्त मौतें हुईं। इनमें सीधे और अप्रत्यक्ष दोनों प्रकार की मौतें शामिल हैं।

महामारी ने जीवन प्रत्याशा में पिछले वर्षों की प्रगति को भी पीछे धकेल दिया। कई क्षेत्रों में अब भी इस नुकसान की पूरी भरपाई नहीं हो पाई है।

स्वास्थ्य के आंकड़ों में बड़ी कमी

डब्ल्यूएचओ ने यह भी कहा है कि कई देशों में स्वास्थ्य से जुड़े डेटा की भारी कमी है। केवल 18 प्रतिशत देश ही समय पर मृत्यु दर का डेटा उपलब्ध कराते हैं।

लगभग एक तिहाई देशों ने कभी भी मृत्यु के कारणों से जुड़े आंकड़े डब्ल्यूएचओ को नहीं भेजा है। यह स्थिति स्वास्थ्य नीतियों को प्रभावी बनाने में बड़ी बाधा बन रही है।

निष्कर्ष: तेजी से कदम उठाने की जरूरत

डब्ल्यूएचओ की यह रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि दुनिया ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में कुछ प्रगति जरूर की है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। असमानता, कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था, पर्यावरणीय खतरे और डेटा की कमी जैसे कारण प्रगति को रोक रहे हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि दुनिया को 2030 के स्वास्थ्य लक्ष्यों को हासिल करना है, तो देशों को स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश बढ़ाना होगा, रोकथाम पर ध्यान देना होगा और मजबूत स्वास्थ्य प्रणालियां बनानी होंगी। तभी सभी लोगों तक बेहतर और समान स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंच सकेंगी।