धूम्रपान करने वाली महिलाओं में बांझपन का खतरा धूम्रपान न करने वाली महिलाओं की तुलना में करीब 40 प्रतिशत अधिक पाया गया।
धूम्रपान पुरुषों में शुक्राणुओं की गुणवत्ता, उनकी गति, आकार और यौन क्षमता को प्रभावित कर सकता है।
आईवीएफ जैसी प्रजनन उपचार प्रक्रियाओं में धूम्रपान करने वालों के गर्भधारण और जीवित जन्म की संभावना कम हो सकती है।
दूसरे के धुएं के संपर्क में आने वाली महिलाओं में गर्भधारण की संभावना घटने और बांझपन का खतरा बढ़ने की आशंका है।
डब्ल्यूएचओ ने गर्भधारण की योजना बना रहे दंपतियों को तंबाकू छोड़ने और स्वास्थ्यकर्मियों से जरूरी सहायता लेने की सलाह दी है।
धूम्रपान केवल फेफड़ों और दिल के लिए ही नुकसानदायक नहीं है, बल्कि इसका असर प्रजनन क्षमता पर भी पड़ सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक नई रिपोर्ट में बताया गया है कि तंबाकू का सेवन महिलाओं और पुरुषों दोनों की प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकता है। धूम्रपान करने वाले लोगों में गर्भधारण में परेशानी का खतरा बढ़ सकता है। इतना ही नहीं, आसपास के लोगों द्वारा किए जा रहे धूम्रपान से निकलने वाला धुआं भी
प्रजनन स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है।
दुनिया भर में प्रजनन की उम्र के हर छह में से करीब एक व्यक्ति को जीवन में कभी न कभी बांझपन की समस्या का सामना करना पड़ता है। बांझपन का मतलब है कि 12 महीने या उससे अधिक समय तक नियमित रूप से बिना गर्भनिरोधक के संबंध बनाने के बावजूद गर्भधारण न होना।
डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में पिछले कई दशकों में किए गए अध्ययनों का हवाला दिया गया है। इसके अनुसार, वर्तमान में धूम्रपान करने वाली महिलाओं में धूम्रपान नहीं करने वाली महिलाओं की तुलना में बांझपन का खतरा करीब 40 प्रतिशत अधिक पाया गया है।
धूम्रपान छोड़ने से मिल सकता है फायदा
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जो महिलाएं पहले धूम्रपान करती थीं लेकिन अब इसे छोड़ चुकी हैं, उनमें लगातार धूम्रपान करने वाली महिलाओं की तुलना में बांझपन का खतरा कम पाया गया। ऐसे मामलों में खतरा करीब 25 प्रतिशत कम हो सकता है।
इससे संकेत मिलता है कि गर्भधारण की योजना बना रहे लोगों के लिए धूम्रपान छोड़ना एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। हालांकि, धूम्रपान छोड़ने से पहले हुए सभी नुकसान पूरी तरह खत्म हो जाएं, ऐसा जरूरी नहीं है। इसलिए जितनी जल्दी धूम्रपान छोड़ा जाए, उतना बेहतर माना जाता है।
पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर भी असर
बांझपन को अक्सर महिलाओं से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट साफ करती है कि यह केवल महिलाओं की समस्या नहीं है। पुरुषों में भी धूम्रपान प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकता है।
44 अध्ययनों और 60 हजार से अधिक पुरुषों से जुड़े एक हालिया अध्ययन की समीक्षा में धूम्रपान का संबंध प्रजनन संबंधी कई परेशानियों से पाया गया। इनमें वीर्य की गुणवत्ता में बदलाव, शुक्राणुओं की कम गति और उनके आकार में असामान्यता जैसी समस्याएं शामिल हैं।
धूम्रपान करने वाले पुरुषों में स्तंभन संबंधी समस्या और वीर्य स्खलन से जुड़ी परेशानियां भी अधिक देखी गई हैं। कुछ मामलों में वीर्य में शुक्राणुओं की अनुपस्थिति जैसी गंभीर समस्या भी सामने आ सकती है।
आईवीएफ जैसी उपचार प्रक्रिया पर भी असर
जो लोग गर्भधारण के लिए इलाज या सहायक प्रजनन तकनीक का सहारा लेते हैं, उनके लिए भी धूम्रपान चिंता का विषय हो सकता है। रिपोर्ट में पहले किए गए 21 अध्ययनों का हवाला दिया गया है। इनमें सिगरेट पीने का संबंध आईवीएफ जैसी उपचार प्रक्रियाओं के बाद गर्भधारण और जीवित जन्म की कम दर से पाया गया।
अध्ययनों के अनुसार, धूम्रपान करने वालों में सफल परिणाम की संभावना काफी कम हो सकती है। इसका मतलब यह है कि गर्भधारण के लिए इलाज करा रहे लोगों के लिए तंबाकू छोड़ना विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है।
दूसरे के धुएं से भी खतरा
जो लोग खुद धूम्रपान नहीं करते, वे भी इससे पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। दूसरे व्यक्ति के धूम्रपान से निकलने वाला धुआं यानी सेकेंड-हैंड स्मोक भी प्रजनन स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, धुएं के संपर्क में आने वाली महिलाओं में बांझपन का खतरा बढ़ सकता है और हर महीने गर्भधारण की संभावना कम हो सकती है। इसलिए घर और आसपास के वातावरण को धूम्रपान मुक्त रखना जरूरी है।
ई-सिगरेट और हुक्का पर अभी शोध जारी
डब्ल्यूएचओ ने यह भी कहा है कि ई-सिगरेट, हुक्का या शिशा और बिना धुएं वाले तंबाकू उत्पादों के प्रजनन स्वास्थ्य पर असर को लेकर अभी शोध जारी है। इन उत्पादों पर उपलब्ध प्रमाण सिगरेट की तुलना में कम हैं। फिर भी इन्हें पूरी तरह सुरक्षित मानना सही नहीं होगा।
डब्ल्यूएचओ की सलाह है कि गर्भधारण की योजना बना रहे लोगों और दंपतियों को तंबाकू के प्रजनन स्वास्थ्य पर संभावित प्रभाव के बारे में जानकारी दी जाए। स्वास्थ्यकर्मियों को सभी तंबाकू उपयोगकर्ताओं को धूम्रपान छोड़ने की सलाह और वैज्ञानिक तरीके से मदद देनी चाहिए।
धूम्रपान छोड़ना केवल स्वस्थ फेफड़ों के लिए जरूरी नहीं है। यह भविष्य में गर्भधारण और स्वस्थ प्रजनन क्षमता के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।