डीआरसी में 20 जुलाई तक इबोला के 2,473 पुष्ट मामले दर्ज हुए, जबकि संक्रमण पांच प्रांतों तक फैल चुका है। फोटो साभार: आईस्टॉक
स्वास्थ्य

कांगो में बढ़ा असुरक्षा का खतरा, इबोला से निपटने में आ रही मुश्किलें; यूएन की सहयोग की अपील

कांगो में बढ़ती हिंसा से इबोला नियंत्रण अभियान प्रभावित, उत्तरी किवु में सुरक्षा संकट के कारण स्वास्थ्य सेवाओं और राहत कार्यों की रफ्तार हुई धीमी

Dayanidhi

  • उत्तरी किवु के बेनी क्षेत्र में 13 से 19 जुलाई के बीच हुए हमलों में कम से कम 30 लोगों की मौत हुई।

  • डीआरसी में 20 जुलाई तक इबोला के 2,473 पुष्ट मामले दर्ज हुए, जबकि संक्रमण पांच प्रांतों तक फैल चुका है।

  • कांगो में इबोला संक्रमण से 1,031 लोगों की मौत की पुष्टि अफ्रीका सीडीसी के अनुसार की गई है।

  • सुरक्षा संकट के कारण बेनी क्षेत्र में कम से कम छह मानवीय संगठनों ने गतिविधियां अस्थायी रूप से रोक दीं।

  • स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, 737 इबोला मरीजों को अलग रखा गया या अस्पतालों में भर्ती कर उपचार दिया जा रहा है।

अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) के उत्तरी किवु प्रांत में बढ़ती हिंसा और असुरक्षा ने मानवीय सहायता कार्यों को प्रभावित किया है। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने कहा है कि इस स्थिति का असर इबोला वायरस के प्रकोप से निपटने के प्रयासों पर भी पड़ रहा है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने बुधवार को एक प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि उत्तरी किवु के बेनी क्षेत्र में 13 से 19 जुलाई के बीच कई हमले हुए। स्थानीय नागरिक संगठनों के अनुसार, इन हमलों में कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई और लगभग 12 लोग घायल हुए हैं।

हिंसा के कारण बड़ी संख्या में लोग अपने घरों से विस्थापित हुए हैं। कई इलाकों में लोगों की आवाजाही सीमित हो गई है, जिससे राहत और स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाने में कठिनाई हो रही है।

इबोला अभियान पर पड़ा सुरक्षा संकट का असर

संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के कार्यालय (ओसीएचए) के अनुसार, बेनी क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति खराब होने के कारण कम से कम छह मानवीय संगठनों ने कई इलाकों में अपनी गतिविधियां अस्थायी रूप से रोक दी हैं। इनमें वे संगठन भी शामिल हैं जो इबोला संक्रमण को नियंत्रित करने के अभियान में मदद कर रहे हैं।

इबोला जैसी गंभीर बीमारी के फैलाव को रोकने के लिए स्वास्थ्य कर्मचारियों को संक्रमित क्षेत्रों तक पहुंचना जरूरी होता है। लेकिन हिंसा और सुरक्षा जोखिमों के कारण स्वास्थ्य टीमों की आवाजाही प्रभावित हो रही है।

संयुक्त राष्ट्र ने सभी पक्षों से अपील की है कि वे आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए सुरक्षित तथा बिना रुकावट रास्ते उपलब्ध कराएं। यूएन ने कहा कि स्वास्थ्य कर्मचारियों और राहत कार्यकर्ताओं की सुरक्षा इबोला नियंत्रण अभियान के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

पांच प्रांतों तक फैला इबोला संक्रमण

डीआरसी के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, 20 जुलाई तक देश के पांच प्रांतों में इबोला के 2,473 पुष्ट मामले सामने आ चुके थे। संक्रमण उत्तरी किवु के अलावा इतुरी, दक्षिणी किवु, हॉट-उएले और त्शोपो प्रांतों में भी दर्ज किया गया है। अफ्रीका सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (अफ्रीका सीडीसी) के अनुसार, कांगो में इबोला से 1,031 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, कम से कम 737 मरीजों को अलग रखा गया है या अस्पतालों में भर्ती किया गया है। स्वास्थ्य अधिकारी संक्रमण को रोकने और मरीजों के इलाज के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन कई चुनौतियों के कारण अभियान प्रभावित हो रहा है।

यह इबोला प्रकोप 15 मई को घोषित किया गया था। इस बार संक्रमण बुंदिबुग्यो इबोलावायरस के कारण फैल रहा है। यह इबोला वायरस का एक प्रकार है, जो गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है और समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा साबित हो सकता है।

संयुक्त राष्ट्र और उसके सहयोगी संगठन डीआरसी सरकार की मदद कर रहे हैं। वे बीमारी की निगरानी, प्रयोगशाला जांच, मरीजों के इलाज और लोगों को जागरूक करने जैसे कामों में सहयोग दे रहे हैं।

लोगों की आवाजाही और असुरक्षा से बढ़ रहा खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार, डीआरसी में लंबे समय से जारी संघर्ष और अस्थिरता स्वास्थ्य संकट को और गंभीर बना रहे हैं। लोगों का एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना, सीमावर्ती क्षेत्रों में गतिविधियां और असुरक्षित इलाकों में काम करने की मजबूरी संक्रमण फैलने के कारणों में शामिल हैं।

उत्तरी किवु और आसपास के क्षेत्रों में कई सशस्त्र समूह सक्रिय हैं। इन क्षेत्रों में सुरक्षा की कमी के कारण स्वास्थ्यकर्मियों और राहत संगठनों के लिए काम करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

इसके अलावा कारीगरों द्वारा किए जाने वाले खनन कार्य और युगांडा तथा दक्षिण सूडान जैसे पड़ोसी देशों के साथ सीमा पार आवाजाही भी संक्रमण के प्रसार को बढ़ावा दे सकती है।

संयुक्त राष्ट्र ने की सहयोग की अपील

संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि इबोला को नियंत्रित करने के लिए केवल चिकित्सा प्रयास ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि सुरक्षित माहौल भी जरूरी है। यदि स्वास्थ्य कर्मचारियों और राहत संगठनों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंच नहीं मिलेगी, तो बीमारी को रोकना और मुश्किल हो सकता है।

यूएन ने सभी संबंधित पक्षों से अपील की है कि वे हिंसा रोकने, नागरिकों की रक्षा करने और मानवीय सहायता कार्यों को जारी रखने में सहयोग करें।

डीआरसी में इबोला संकट के बीच सुरक्षा चुनौती एक बड़ी समस्या बनकर सामने आई है। आने वाले समय में बीमारी पर नियंत्रण पाने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ शांति और सुरक्षा की स्थिति में सुधार भी जरूरी होगा।