यूनाइटेड किंगडम और भारत में क्लेड आईबी और आईआईबी से बने रिकॉम्बिनेंट एमपॉक्स वायरस के दो मामले पाए गए।
दोनों मरीजों में बीमारी सामान्य रही, कोई गंभीर जटिलता नहीं हुई और सभी संक्रमित व्यक्ति पूरी तरह स्वस्थ हो गए।
जीनोम जांच से पता चला कि वायरस में दोनों क्लेड के अनुवांशिक हिस्से मौजूद थे और समानता बहुत अधिक थी।
संपर्क में आए लोगों की निगरानी की गई, लेकिन किसी भी देश में कोई द्वितीयक संक्रमण सामने नहीं आया।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार आम जनता के लिए जोखिम कम है, जबकि उच्च जोखिम समूहों में सतर्कता आवश्यक है।
हाल के महीनों में एमपॉक्स वायरस (एमपीएक्सवी) में एक नया बदलाव देखा गया है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि वायरस के दो अलग-अलग प्रकार आपस में मिलकर एक नया मिला-जुला प्रकार बना सकते हैं। इसे “रीकॉम्बिनेंट” वायरस कहा जाता है। यह बदलाव प्राकृतिक प्रक्रिया के कारण होता है। अभी तक ऐसे दो मामले सामने आए हैं - एक यूनाइटेड किंगडम और एक भारत में।
रीकॉम्बिनेशन क्या होता है?
रीकॉम्बिनेशन एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। जब दो मिलते-जुलते वायरस एक ही व्यक्ति के शरीर में एक साथ संक्रमण करते हैं, तो वे अपने जीन (आनुवंशिक सामग्री) का आदान-प्रदान कर सकते हैं। इससे एक नया मिला-जुला वायरस बन सकता है। यह जरूरी नहीं है कि नया बना वायरस ज्यादा खतरनाक हो। कई बार ऐसा बदलाव होने पर भी बीमारी की गंभीरता नहीं बढ़ती।
यूनाइटेड किंगडम और भारत के मामले
पहला मामला यूनाइटेड किंगडम में पाया गया। इस व्यक्ति का हाल ही में दक्षिण-पूर्व एशिया की यात्रा का इतिहास था। दूसरा मामला भारत में मिला। यह व्यक्ति अरब प्रायद्वीप के एक देश से यात्रा करके लौटा था।
भारत वाले मामले में मरीज को सितंबर 2025 में लक्षण शुरू हुए। जांच में मंकीपॉक्स संक्रमण की पुष्टि हुई। बाद में जीन की पूरी जांच (जीनोम सीक्वेंसिंग) से पता चला कि यह वायरस दो अलग प्रकारों - क्लेड आईबी और क्लेड आईआईबी-का मिला-जुला रूप है।
दोनों मरीजों की बीमारी सामान्य रही। किसी को भी गंभीर जटिलताएं नहीं हुईं। दोनों पूरी तरह ठीक हो गए। संपर्क में आए लोगों की जांच की गई, लेकिन कोई नया मामला सामने नहीं आया।
वायरस के अलग-अलग क्लेड क्या हैं?
एमपॉक्स वायरस के दो मुख्य समूह (क्लेड) माने जाते हैं -
क्लेड आई
क्लेड आईआई
क्लेड एक के अंदर आईए और आईबी नाम के उपसमूह हैं। क्लेड आईआई के अंदर आई आई ए और आई आई बी उपसमूह आते हैं। हाल का वैश्विक प्रकोप मुख्य रूप से क्लेड आईआई बी से जुड़ा रहा है। अब जो नया मामला सामने आया है, उसमें क्लेड आईबी और क्लेड आई आई बी दोनों के जीन पाए गए हैं।
एमपॉक्स क्या है?
एमपॉक्स एक संक्रामक बीमारी है जो एमपॉक्स वायरस से होती है। यह वायरस ऑर्थोपॉक्सवायरस परिवार का हिस्सा है। इसी परिवार में चेचक (स्मॉलपॉक्स) का वायरस भी आता है।
एमपॉक्स पहले अफ्रीका के कुछ हिस्सों में अधिक पाया जाता था, खासकर जंगल वाले इलाकों में। वहां यह जानवरों से इंसानों में फैलता था। अब यह कई देशों में इंसान से इंसान में फैल रहा है।
बीमारी कैसे फैलती है?
संक्रमित व्यक्ति के साथ नजदीकी शारीरिक संपर्क
यौन संपर्क
संक्रमित कपड़े, बिस्तर या सामान छूने से
कुछ मामलों में सांस की बूंदों से
गर्भवती महिला से बच्चे को
हाल के प्रकोप में यह देखा गया है कि संक्रमण अधिकतर करीबी संपर्क और यौन संपर्क से फैल रहा है।
लक्षण क्या होते हैं?
एमपॉक्स के सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं -
बुखार
सूजी हुई लसीका ग्रंथियां (लिम्फ नोड्स)
शरीर पर दाने या फफोले
मुंह, जननांग या गुदा के आसपास घाव
कुछ मामलों में दाने कम भी हो सकते हैं। कई बार लक्षण हल्के होते हैं और मरीज कुछ हफ्तों में ठीक हो जाता है।
भारत वाले मामले की खास बात
भारत में पाया गया मामला दुनिया में इस नए रिकॉम्बिनेंट प्रकार का सबसे शुरुआती ज्ञात मामला माना जा रहा है। मरीज अस्पताल में भर्ती हुआ, लेकिन उसे कोई गंभीर समस्या नहीं हुई। कुछ हफ्तों में वह पूरी तरह ठीक हो गया।
जिन लोगों से उसका संपर्क हुआ था, उनकी भी जांच की गई। किसी में संक्रमण नहीं मिला। इससे पता चलता है कि फिलहाल इस नए प्रकार से फैलाव का कोई बड़ा खतरा नहीं दिखा है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा है कि वर्तमान स्थिति में कुल जोखिम का स्तर नहीं बदला है। जिन पुरुषों के कई यौन साथी हैं, उनके लिए जोखिम मध्यम माना गया है।
आम जनता के लिए, जिनमें कोई विशेष जोखिम कारक नहीं है, खतरा कम माना गया है। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि निगरानी और जीन की जांच जारी रखना जरूरी है, ताकि नए बदलावों पर नजर रखी जा सके।
क्या घबराने की जरूरत है?
अभी तक मिले दोनों मामलों में बीमारी सामान्य रही और कोई गंभीर परिणाम नहीं हुआ। कोई नया संक्रमण भी सामने नहीं आया। इसलिए फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है।
लेकिन सावधानी जरूरी है -
असुरक्षित यौन संपर्क से बचें
लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराएं
संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से बचें
स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों का पालन करें
एमपॉक्स वायरस में रीकॉम्बिनेशन एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। यूनाइटेड किंगडम और भारत में पाए गए दो मामलों में नया मिला-जुला प्रकार सामने आया है, लेकिन इससे बीमारी की गंभीरता नहीं बढ़ी है।
वैज्ञानिक लगातार निगरानी कर रहे हैं। आम लोगों के लिए जोखिम कम है। सही जानकारी, सावधानी और समय पर जांच से इस बीमारी को नियंत्रित रखा जा सकता है।