विश्व स्वास्थ्य सभा ने एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस पर 2026-2036 वैश्विक कार्य योजना को मंजूरी दी, जिससे अंतरराष्ट्रीय सहयोग और रणनीति मजबूत होगी।
नई योजना में संक्रमण रोकथाम, टीकाकरण, स्वच्छ पानी और जैव-सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता देकर दवाओं के प्रभाव को सुरक्षित रखा जाएगा।
एफओ, यूएनईपी, डब्ल्यूएचएओ और डब्ल्यूओएएच ने मिलकर वन हेल्थ नजरिए के तहत एएमआर से निपटने की वैश्विक रणनीति तैयार की है।
सदस्य देशों ने जिम्मेदार एंटीबायोटिक उपयोग, बेहतर निगरानी प्रणाली और अनुसंधान नवाचार को बढ़ावा देने पर व्यापक सहमति व्यक्त की है।
यह कार्य योजना मानव, पशु और पर्यावरण स्वास्थ्य को जोड़ते हुए खाद्य सुरक्षा और सतत विकास के लक्ष्यों को मजबूत करती है।
विश्व स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए उन्यासीवीं विश्व स्वास्थ्य सभा (डब्ल्यूएचए79) में सदस्य देशों ने रोगाणुरोधी प्रतिरोध या एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) के खिलाफ नई वैश्विक कार्य योजना 2026-2036 को अपनाया है। यह निर्णय इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि एएमआर आज पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है।
यह नई योजना 2024 में संयुक्त राष्ट्र महासभा की एएमआर पर राजनीतिक घोषणा के बाद की गई जरूरी वायदों को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
एएमआर क्या है और यह क्यों खतरनाक है
एएमआर यानी एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस ऐसी स्थिति है जब बैक्टीरिया, वायरस, फंगस और अन्य सूक्ष्म जीव दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो जाते हैं। इसका मतलब है कि सामान्य एंटीबायोटिक और अन्य दवाएं काम करना बंद कर देती हैं।
इस समस्या का असर केवल लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि जानवरों, पौधों, खाद्य प्रणाली और पर्यावरण तक फैल जाता है। यदि यह समस्या बढ़ती है तो साधारण संक्रमण, सर्जरी और इलाज भी खतरनाक हो सकते हैं।
वैश्विक कार्य योजना का निर्णय
नई रोगाणुरोधी प्रतिरोध पर वैश्विक कार्य योजना (जीएपी-एएमआर) 2026-2036 को कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों के सहयोग से तैयार किया गया है। इसमें खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ), संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी), विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूओएएच) जैसी संस्थाएं शामिल रहीं।
इन चारों संगठनों के समूह को चतुष्पक्षीय कहा जाता है, जिसने सदस्य देशों और विशेषज्ञों के साथ मिलकर इस योजना को तैयार किया।
नई योजना का उद्देश्य
इस नई कार्य योजना का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर में एएमआर के खिलाफ एक साझी रणनीति बनाना है, ताकि आने वाले दस सालों में इसके प्रभाव को कम किया जा सके। यह योजना 2015 में पहली बार अपनाई गई वैश्विक कार्य योजना को आगे बढ़ाती है, लेकिन इसमें नए वैज्ञानिक तथ्यों और अनुभवों को भी शामिल किया गया है।
इसका लक्ष्य देशों को मजबूत राष्ट्रीय कार्य योजनाएं बनाने, उन्हें लागू करने और वित्तीय रूप से सक्षम बनाने में मदद करना है।
प्रमुख प्राथमिकताएं और रणनीति
नई योजना में सबसे अधिक जोर रोकथाम पर दिया गया है। इसमें संक्रमण रोकथाम, स्वच्छ पानी और स्वच्छता (वाश), टीकाकरण और बेहतर जैव-सुरक्षा जैसे उपाय शामिल हैं। इसके अलावा दवाओं का सही और जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित करना भी एक प्रमुख लक्ष्य है।
इसके साथ-साथ रोगों की निगरानी प्रणाली को मजबूत करने, नई दवाओं और तकनीकों में नवाचार को बढ़ावा देने और कृषि व खाद्य प्रणाली को अधिक टिकाऊ बनाने पर भी ध्यान दिया गया है।
वन हेल्थ नजरिए का महत्व
इस पूरी योजना का आधार “वन हेल्थ” नजरिया है। वन हेल्थ एक ऐसा वैज्ञानिक विचार है जो यह मानता है कि मनुष्यों, जानवरों और पर्यावरण का स्वास्थ्य आपस में जुड़ा हुआ है।
वन हेल्थ के तहत यह समझा जाता है कि यदि जानवरों में एंटीबायोटिक का गलत उपयोग होता है या पर्यावरण प्रदूषित होता है, तो उसका असर सीधे लोगों पर भी पड़ता है। इसलिए इस समस्या का समाधान केवल स्वास्थ्य क्षेत्र तक सीमित नहीं हो सकता।
देशों और वैश्विक सहयोग की भूमिका
सदस्य देशों ने इस योजना का व्यापक समर्थन किया है और कहा है कि इसके लिए मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है। देशों को अपनी स्वास्थ्य प्रणाली, कृषि व्यवस्था और पर्यावरण नीतियों में बदलाव लाना होगा।
साथ ही, निगरानी, रिपोर्टिंग और जवाबदेही को भी मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है ताकि प्रगति को मापा जा सके।
डब्ल्यूएचए79 में अपनाई गई यह नई वैश्विक कार्य योजना दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। यह न केवल एएमआर जैसी गंभीर समस्या से निपटने की दिशा में एक मजबूत ढांचा देती है, बल्कि मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को भी एक साथ जोड़ती है।
यदि देशों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों, वैज्ञानिक समुदाय और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग मजबूत रहता है, तो आने वाले वर्षों में एएमआर के खतरे को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है और भविष्य की पीढ़ियों को सुरक्षित स्वास्थ्य प्रणाली प्रदान की जा सकती है।