डब्ल्यूएचओ की चेतावनी, भविष्य की महामारियों से निपटने के लिए देशों को मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था तैयार करनी होगी फोटो साभार: आईस्टॉक
स्वास्थ्य

कांगो में इबोला संक्रमण का बढ़ता कहर, 500 से अधिक लोगों की मौत

कांगो में इबोला का बढ़ता संकट, 36 स्वास्थ्य क्षेत्रों में फैला संक्रमण, हर सप्ताह 300 से अधिक नए मामले सामने आने से चिंता बढ़ी

Dayanidhi

  • कांगो में इबोला का कहर जारी, संक्रमण से 506 लोगों की मौत, 1,561 मामलों की पुष्टि से स्वास्थ्य एजेंसियां चिंतित

  • तीन प्रांतों के 36 स्वास्थ्य क्षेत्रों में फैला इबोला, लगातार बढ़ते मामलों से सामुदायिक संक्रमण का खतरा गहराया

  • इतुरी प्रांत बना इबोला संक्रमण का केंद्र, हिंसा और संसाधनों की कमी से बचाव कार्यों में बढ़ी मुश्किलें

  • इबोला इलाज की उम्मीद बढ़ी, कांगो में एमबीपी134 और रेमडेसिविर दवाओं का परीक्षण शुरू किया गया

  • डब्ल्यूएचओ की चेतावनी, भविष्य की महामारियों से निपटने के लिए देशों को मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था तैयार करनी होगी

कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में फैल रहा इबोला वायरस का प्रकोप अब गंभीर स्थिति में पहुंच गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के नए आंकड़ों के अनुसार, इस बीमारी से अब तक 500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, मई के मध्य में शुरू हुए इस प्रकोप के बाद से देश में 1,561 लोगों में इबोला संक्रमण की पुष्टि हुई है, जिनमें 506 लोगों की मौत हो चुकी है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस बीमारी का खतरा इसलिए भी बढ़ रहा है क्योंकि नए मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इबोला से प्रभावित इलाकों में संक्रमण को रोकने के लिए स्वास्थ्यकर्मी दिन-रात काम कर रहे हैं, लेकिन कई क्षेत्रों में हिंसा, गरीबी और संसाधनों की कमी के कारण मुश्किलें बढ़ रही हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, इबोला का प्रकोप अब तक तीन प्रांतों के 36 स्वास्थ्य क्षेत्रों को प्रभावित कर चुका है। संक्रमण के नए मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। बीमारी फैलने के बाद से 25वें और 26वें सप्ताह में सबसे अधिक नए मामले दर्ज किए गए, जहां हर सप्ताह 300 से ज्यादा संक्रमित लोगों की पुष्टि हुई। यह संकेत देता है कि इबोला का संक्रमण अभी भी समुदायों के बीच लगातार फैल रहा है।

इतुरी प्रांत में सबसे ज्यादा असर

इबोला का यह प्रकोप कांगो के उत्तर-पूर्वी हिस्से में फैला हुआ है। इसका सबसे अधिक प्रभाव इतुरी प्रांत में देखा जा रहा है। यहां कई इलाकों में संक्रमण के मामले तेजी से बढ़े हैं। अब तक यह बीमारी कई स्वास्थ्य क्षेत्रों और प्रांतों तक पहुंच चुकी है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस प्रकोप में इबोला वायरस की दुर्लभ बंडिबुग्यो प्रजाति जिम्मेदार है। इस प्रकार के इबोला के लिए अभी तक कोई पूरी तरह स्वीकृत टीका या विशेष इलाज उपलब्ध नहीं है। यही कारण है कि बीमारी को नियंत्रित करना स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

नए इलाज की उम्मीद

इबोला के इलाज के लिए कांगो में नए उपचारों की जांच शुरू की गई है। वैज्ञानिक दो संभावित दवाओं की सुरक्षा और प्रभावशीलता का परीक्षण कर रहे हैं। इनमें मोनोक्लोनल एंटीबॉडी उपचार एमबीपी134 और एंटीवायरल दवा रेमडेसिविर शामिल हैं।

विशेषज्ञों को उम्मीद है कि इन उपचारों से भविष्य में इबोला से संक्रमित मरीजों की जान बचाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, अभी इन दवाओं के प्रभाव को समझने के लिए परीक्षण जारी हैं।

पड़ोसी देश युगांडा में स्थिति नियंत्रण में

कांगो के पड़ोसी देश युगांडा में भी इबोला के कुछ मामले सामने आए हैं, लेकिन वहां स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। युगांडा में अब तक 20 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। इनमें से 16 मरीज ठीक हो चुके हैं, जबकि दो लोगों की मौत हुई है।

स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि संक्रमण को सीमित रखने के लिए निगरानी और जांच व्यवस्था को मजबूत किया गया है।

डब्ल्यूएचओ की चेतावनी

डब्ल्यूएचओ के प्रमुख टेड्रोस एडनॉम गेब्रियेसस ने दुनिया के देशों को चेतावनी दी है कि भविष्य में आने वाली महामारियों के लिए सभी देशों को तैयार रहना होगा। उन्होंने कहा कि इबोला का मौजूदा प्रकोप यह याद दिलाता है कि संक्रामक बीमारियों का खतरा अभी खत्म नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा कि इबोला भले ही अगली वैश्विक महामारी न बने, लेकिन यह दुनिया को सतर्क रहने का संदेश जरूर देता है।

मानवीय संकट बढ़ा

इबोला प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य संकट के साथ-साथ मानवीय समस्याएं भी बढ़ रही हैं। कई विस्थापित लोगों को साफ पानी, स्वच्छता और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है।

संयुक्त राष्ट्र की मानवीय एजेंसियों के अनुसार, इतुरी प्रांत में विस्थापित लोगों की संख्या बहुत अधिक है और सहायता कार्यों के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा दक्षिण किवु प्रांत में बढ़ती हिंसा के कारण राहत और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच मुश्किल हो रही है।

इबोला वायरस संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के सीधे संपर्क से फैलता है। इसलिए स्वास्थ्य अधिकारी लोगों से सावधानी बरतने, संक्रमित लोगों से दूरी रखने और साफ-सफाई बनाए रखने की अपील कर रहे हैं।

कांगो में जारी यह प्रकोप एक बार फिर दिखाता है कि संक्रामक बीमारियों से लड़ने के लिए मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और समय पर सहायता कितनी जरूरी है।