डब्ल्यूएचओ ने कांगो और युगांडा में फैलते इबोला संक्रमण को अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित कर वैश्विक चिंता बढ़ाई।
कांगो में इबोला के 51 पुष्ट मामले मिले, जबकि सैकड़ों संदिग्ध संक्रमितों और मौतों ने प्रशासन की चिंता बढ़ाई।
युगांडा की राजधानी कंपाला में दो इबोला संक्रमित पाए गए, जिनमें एक मरीज की मौत की पुष्टि हुई है।
डब्ल्यूएचओ ने बताया कि इस बार फैला बुंडिबुग्यो वायरस बेहद खतरनाक है, जिसकी अभी कोई स्वीकृत वैक्सीन उपलब्ध नहीं।
बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए डब्ल्यूएचओ ने अतिरिक्त आर्थिक सहायता, स्वास्थ्यकर्मी और जरूरी चिकित्सा उपकरण प्रभावित क्षेत्रों भेजे।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अफ्रीकी देशों डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) और युगांडा में फैल रही इबोला बीमारी को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित कर दी है। आज, 20 मई, 2026 को हाइब्रिड प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बोलते हुए डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक ने कहा कि रविवार को यह घोषणा कर दी गई थी। उन्होंने कहा कि बीमारी तेजी से फैल रही है और इसे रोकने के लिए तुरंत वैश्विक कार्रवाई की जरूरत है।
यह पहली बार है जब डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक ने इमरजेंसी कमेटी की बैठक बुलाने से पहले ही सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित की है। बाद में अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य नियमों के तहत एक इमरजेंसी कमेटी की बैठक हुई, जिसमें विशेषज्ञों ने भी इस फैसले का समर्थन किया।
डीआरसी और युगांडा में बढ़ते मामले
अब तक डीआरसी में इबोला के 51 मामलों की पुष्टि हुई है। ये मामले मुख्य रूप से इटुरी और नॉर्थ किवु प्रांतों में पाए गए हैं। बुनीया और गोमा जैसे बड़े शहरों में भी संक्रमण पहुंच चुका है। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि असली संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है क्योंकि वायरस लंबे समय से बिना पहचान के फैल रहा था।
युगांडा की राजधानी कंपाला में भी दो मामलों की पुष्टि हुई है। इनमें से एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है। दोनों संक्रमित लोग डीआरसी से युगांडा पहुंचे थे। इसके अलावा एक अमेरिकी नागरिक, जो डीआरसी में काम कर रहा था, भी संक्रमित पाया गया है। उसे इलाज के लिए जर्मनी भेजा गया है।
सैकड़ों संदिग्ध मामले
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, केवल पुष्टि किए गए मामले ही चिंता का कारण नहीं हैं। लगभग 600 संदिग्ध मामले और 139 संदिग्ध मौतों की जानकारी भी सामने आई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह संख्या और बढ़ सकती है।
बीमारी के फैलाव का एक बड़ा कारण क्षेत्र में लगातार लोगों की आवाजाही है। इटुरी प्रांत लंबे समय से हिंसा और संघर्ष से प्रभावित है। पिछले कुछ महीनों में वहां लड़ाई और तेज हो गई है, जिसके कारण एक लाख से अधिक लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। बड़ी संख्या में लोगों के एक जगह से दूसरी जगह जाने से संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।
स्वास्थ्यकर्मियों में भी संक्रमण
डब्ल्यूएचओ ने बताया कि कई स्वास्थ्यकर्मी भी इस बीमारी की चपेट में आए हैं। इससे साफ है कि अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में संक्रमण फैल रहा है। ऐसे में डॉक्टरों और नर्सों की सुरक्षा भी बड़ी चुनौती बन गई है।
यह इलाका खनन क्षेत्र भी है, जहां काम की तलाश में रोज बड़ी संख्या में लोग आते-जाते हैं। इसी वजह से संक्रमण को रोकना और कठिन हो गया है।
नहीं है कोई स्वीकृत वैक्सीन
इस बार फैली इबोला बीमारी बुंडिबुग्यो वायरस के कारण हो रही है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार इस वायरस के लिए अभी तक कोई स्वीकृत वैक्सीन या दवा उपलब्ध नहीं है। यही वजह है कि विशेषज्ञों की चिंता और बढ़ गई है।
हालांकि डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि बीमारी को रोकने के लिए कई दूसरे कदम उठाए जा सकते हैं। संक्रमित लोगों को अलग रखना, लोगों की जांच करना, स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाना और जागरूकता फैलाना बेहद जरूरी है।
डब्ल्यूएचओ ने बढ़ाई मदद
डब्ल्यूएचओ ने प्रभावित क्षेत्रों में अपनी टीमें भेज दी हैं। संगठन ने डॉक्टर, स्वास्थ्य उपकरण, दवाइयां और अन्य जरूरी सामान उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है। इसके अलावा आपातकालीन फंड से 34 लाख अमेरिकी डॉलर की अतिरिक्त सहायता भी मंजूर की गई है। अब तक कुल 39 लाख डॉलर की मदद दी जा चुकी है।
डब्ल्यूएचओ ने डीआरसी सरकार, वहां के स्वास्थ्य संस्थानों और स्थानीय प्रशासन की सराहना की है। साथ ही युगांडा सरकार का भी धन्यवाद किया गया है, जिसने संक्रमण के खतरे को देखते हुए बड़े धार्मिक कार्यक्रम ‘मार्टियर्स डे’ समारोह को स्थगित कर दिया।
वैश्विक स्तर पर कम खतरा
डब्ल्यूएचओ का कहना है कि फिलहाल इस बीमारी का खतरा राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर बहुत अधिक है, लेकिन वैश्विक स्तर पर खतरा अभी कम माना जा रहा है। फिर भी संगठन ने सभी देशों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो यह बीमारी और ज्यादा लोगों की जान ले सकती है। इसलिए डब्ल्यूएचओ लगातार अंतरराष्ट्रीय सहयोग और तेज कार्रवाई पर जोर दे रहा है।