कांगो में इबोला के 1,003 मामले दर्ज हुए हैं और अब तक 254 लोगों की मौत हो चुकी है।
डब्ल्यूएचओ ने बताया कि 75 स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित हुए, जिनमें 17 की मौत हुई, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है।
मरीज शुरुआत में स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाते, जिससे संक्रमण देर से पकड़ में आता और तेजी से फैलता है।
इटुरी प्रांत के शरणार्थी शिविरों में खराब स्वच्छता और भीड़भाड़ से संक्रमण फैलने का खतरा काफी बढ़ गया है।
अफ्रीका सीडीसी ने कहा कि सुरक्षा समस्याएं और फंड की कमी इबोला नियंत्रण अभियान को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही हैं।
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में इबोला वायरस का प्रकोप तेजी से फैल रहा है और अब देश में पुष्टि किए गए मामलों की संख्या 1,000 से अधिक हो गई है। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, अब तक 1,003 मामलों की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 254 लोगों की मौत हो चुकी है। इस तरह मृत्यु दर लगभग 25.3 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो इस बीमारी की गंभीरता को दर्शाती है।
स्वास्थ्य मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि फिलहाल 365 मरीज अस्पतालों या आइसोलेशन केंद्रों में इलाज करा रहे हैं, जबकि 100 लोग इस बीमारी से ठीक हो चुके हैं। तीन प्रभावित प्रांतों में संपर्क ट्रेसिंग यानी संक्रमित लोगों के संपर्क में आए व्यक्तियों की निगरानी की दर लगभग 58 प्रतिशत है, जो अभी भी चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है।
स्वास्थ्यकर्मियों पर बड़ा असर
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने चिंता जताई है कि इस प्रकोप की शुरुआत में ही स्वास्थ्यकर्मी भी बड़ी संख्या में संक्रमित हुए हैं। डब्ल्यूएचओ के अनुसार अब तक 75 स्वास्थ्यकर्मी इस वायरस की चपेट में आ चुके हैं, जिनमें से 17 की मौत हो चुकी है।
एक रिपोर्ट में डब्ल्यूएचओ की आपातकालीन निदेशक मैरी रोसलीन बेलिज़ेयर के हवाले से कहा गया है कि यह स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी दबाव डाल रही है, क्योंकि पहले से ही कांगो में स्वास्थ्यकर्मियों की कमी है। उन्होंने यह भी बताया कि कई मरीज शुरुआत में गंभीर लक्षण नहीं दिखाते, जिससे संक्रमण का पता देर से चलता है और बीमारी फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
संक्रमण फैलने के तरीके और खतरे
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लगभग 90 प्रतिशत मरीज शुरुआत में रक्तस्राव जैसे स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाते। इस कारण कई लोग पहले घरेलू उपचार करते हैं या पारंपरिक उपचारकर्ताओं के पास जाते हैं। इससे वायरस के फैलने का खतरा बढ़ जाता है क्योंकि मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते।
डब्ल्यूएचओ ने यह भी चेतावनी दी है कि इबोला से मरने वाले व्यक्ति का शव जीवित मरीज की तुलना में अधिक संक्रमणकारी होता है। इसलिए सुरक्षित तरीके से अंतिम संस्कार करना बेहद जरूरी है, वरना संक्रमण तेजी से फैल सकता है।
शरणार्थी शिविरों में बिगड़ते हालात
संयुक्त राष्ट्र की मानवीय सहायता एजेंसी (ओसीएचए) के मुताबिक, पूर्वी कांगो के इटुरी प्रांत में हालात और भी खराब हैं। यहां 2.7 लाख से अधिक विस्थापित लोग 60 से ज्यादा शिविरों में रह रहे हैं। इनमें से अधिकतर शिविरों में साफ पानी, स्वच्छता और स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी कमी है।
ओसीएचए के अनुसार, इन शिविरों में भीड़भाड़ और स्वच्छता की कमी के कारण संक्रमण का खतरा काफी बढ़ गया है। हाल ही में बुनिया शहर के दो शिविरों में कम से कम 13 लोगों की मौत दर्ज की गई है, जिनकी जांच की जा रही है कि क्या यह मौतें इबोला से संबंधित थीं।
संयुक्त राष्ट्र ने यह भी बताया कि अप्रैल से अब तक इन शिविरों में 62 से अधिक मौतें हो चुकी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और लोगों का अस्पतालों पर अविश्वास भी संक्रमण को बढ़ावा दे रहा है।
अफ्रीका सीडीसी की चेतावनी और चुनौतियां
अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (अफ्रीका सीडीसी) ने कहा है कि हाल के सुधारों के बावजूद कई गंभीर चुनौतियां बनी हुई हैं। संगठन के अनुसार इस समय सबसे बड़ी समस्या यह है कि प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा स्थिति खराब है और कई बार स्वास्थ्य केंद्रों पर हमले भी हो रहे हैं।
इसके अलावा अभी तक इस विशेष प्रकार के इबोला वायरस के लिए पूरी तरह से स्वीकृत इलाज उपलब्ध नहीं है। स्वास्थ्यकर्मियों की मौतें और संक्रमण भी एक “आपातकाल के भीतर आपातकाल” जैसी स्थिति पैदा कर रहे हैं।
हालांकि अफ्रीका सीडीसी ने बताया कि परीक्षण क्षमता में सुधार हुआ है और अब 24 घंटे के भीतर टेस्ट परिणाम मिल रहे हैं। लेकिन वित्तीय सहायता का बड़ा हिस्सा अभी तक जारी नहीं किया गया है। कुल 910 मिलियन डॉलर की सहायता में से केवल 90 मिलियन डॉलर ही अब तक उपलब्ध कराए गए हैं।
स्थिति अभी भी चिंताजनक
कुल मिलाकर कांगो में इबोला की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है और कई क्षेत्रों में संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है। स्वास्थ्य एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि जब तक वित्तीय सहायता, सुरक्षा और चिकित्सा संसाधनों को तेजी से मजबूत नहीं किया जाता, तब तक इस प्रकोप को पूरी तरह नियंत्रित करना मुश्किल रहेगा।