सॉइल ईकोएकॉस्टिक्स मिट्टी की आवाज और कंपन रिकॉर्ड करके जीव-जंतु गतिविधियों, पानी की गति और मिट्टी की सेहत मापती है।
तकनीक कम नुकसान पहुंचाने वाली, सस्ती और बड़े पैमाने पर लागू होने वाली है, पारंपरिक मिट्टी परीक्षणों का विकल्प।
अंतरराष्ट्रीय शोध दिखाते हैं कि यह जंगल, खेत, उष्णकटिबंधीय और सूखी मिट्टियों में भी काम कर सकती है।
अभी चुनौतियां हैं, जैसे ध्वनि की पहचान, अलग मिट्टियों में फैलाव, और जीवित तथा गैर-जीवित ध्वनियों में फर्क करना।
वैश्विक मानक और खुला अनुसंधान नेटवर्क बनाने की आवश्यकता है, जिससे आंकड़े साझा और मिट्टी की सेहत बेहतर समझी जा सके।
धरती की सतह के नीचे की दुनिया हमेशा हमारे लिए रहस्यमय रही है। मिट्टी में लाखों जीव-जंतु और सूक्ष्म जीव रहते हैं, जो हमारे भोजन, जलवायु और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद जरूरी हैं। लेकिन इस “सूक्ष्म दुनिया” की निगरानी करना आसान नहीं है। अब अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की एक टीम ने मिट्टी की सेहत को मापने का नया तरीका खोजा है - मिट्टी की आवाज सुनकर।
फ्लिंडर्स विश्वविद्यालय के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन को ट्रेंड्स इन इकोलॉजी एंड एवोलुशन जर्नल में प्रकाशित किया गया है। शोधकर्ताओं ने इसे “सॉइल ईकोएकॉस्टिक्स” नाम दिया है। यह एक नया विज्ञान है, जो प्राकृतिक ध्वनियों और कंपन का उपयोग करके मिट्टी में होने वाली गतिविधियों को बिना नुकसान पहुंचाए मापता है।
मिट्टी की आवाज कैसे सुनेंगे?
मिट्टी में रहने वाले जीव-जंतु जैसे कि कीड़े, चूहे, कीड़े के लार्वा, टरमाइट्स और मेंढक अपनी गतिविधियों के दौरान छोटी-छोटी ध्वनियां और कंपन पैदा करते हैं। इसके अलावा, मिट्टी में पानी का बहाव, सूखना या दरार पड़ना जैसी प्राकृतिक प्रक्रियाएं भी कंपन उत्पन्न करती हैं।
सॉइल ईकोएकॉस्टिक्स इन ध्वनियों को रिकॉर्ड करता है और इससे पता चलता है कि मिट्टी में कौन सक्रिय है, पारिस्थितिकी तंत्र किस तरह काम कर रहा है, और किसी क्षेत्र में कोई बदलाव या क्षति हुई है या नहीं।
क्यों जरूरी है यह शोध?
स्वस्थ मिट्टी हमारे लिए अन्न सुरक्षा, जलवायु नियंत्रण और प्राकृतिक आपदाओं के खिलाफ सहनशीलता का आधार है। लेकिन दुनिया भर की लगभग 75 फीसदी मिट्टियां पहले ही खराब हो चुकी हैं। पारंपरिक तरीकों से मिट्टी की निगरानी करना मुश्किल और समय-साध्य है।
शोध पत्र में शोधकर्ता के हवाले से कहा गया है कि स्वर आधारित निगरानी पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिति का पता लगाने का तरीका बदल सकती है। यह कम नुकसान पहुंचाने वाला, सस्ता और बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा सकने वाला उपाय है।
सॉइल ईकोएकॉस्टिक्स कहां काम कर सकती है?
शोध के अनुसार यह तकनीक विभिन्न वातावरण में काम कर सकती है:
जंगल और उष्णकटिबंधीय क्षेत्र
खेती योग्य भूमि और खेत
सूखी और रेगिस्तानी मिट्टियां
इस तकनीक से हम देख सकते हैं कि किसी क्षेत्र की मिट्टी कितनी स्वस्थ है और पुनर्स्थापना या संरक्षण के प्रयास कितने सफल हो रहे हैं।
अभी चुनौतियां भी हैं -
हालांकि यह शोध बहुत आशाजनक है, लेकिन अभी भी कई तकनीकी चुनौतियां हैं:
अलग-अलग मिट्टियों में ध्वनि कैसे फैलती है यह समझना
जीवित ध्वनियों और गैर-जीवित ध्वनियों में फर्क करना
भरोसेमंद आंकड़ों का अभाव
शोधकर्ता चाहते हैं कि वैश्विक स्तर पर मानक बनाए जाएं और एक खुला अनुसंधान नेटवर्क तैयार किया जाए, ताकि दुनिया भर के वैज्ञानिक अपने आंकड़ों की तुलना कर सकें और इस तकनीक को और बेहतर बना सकें।
भविष्य में संभावनाएं
सॉइल ईकोएकॉस्टिक्स पारंपरिक तरीके की तुलना में बहुत कम नुकसान पहुंचाने वाली और अधिक सटीक तकनीक है। यह मिट्टी के जीव-जंतु, पारिस्थितिकी तंत्र की गतिविधियां और भूमि की सेहत को बड़े पैमाने पर मापने में मदद कर सकती है।
इस नए विज्ञान से हमें न केवल मिट्टी की सेहत के बारे में जानकारी मिलेगी, बल्कि यह कृषि, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। शोधकर्ता आशा करते हैं कि आने वाले समय में यह तकनीक हर देश में अपनाई जाएगी, जिससे हम धरती की गहरी और अदृश्य दुनिया के बारे में और अधिक जान पाएं।
मिट्टी में जीवन को समझना और उसकी निगरानी करना अब सिर्फ विज्ञान कथा नहीं रह गया है। सॉइल ईकोएकॉस्टिक्स की मदद से हम धरती की आवाज सुन सकते हैं और यह जान सकते हैं कि हमारा पर्यावरण कितना स्वस्थ है। यह न केवल विज्ञान के लिए, बल्कि मानवता और पृथ्वी के भविष्य के लिए भी एक बड़ी उम्मीद है।