2015 की भीषण गर्मी में तापमान 24 डिग्री पहुंचने पर कुछ ही मिनटों में कई पेंगुइन चूजों की मौत हो गई। फोटो साभार: आईस्टॉक
जलवायु

गर्म होती दुनिया में बदल रहा है पेंगुइन का जीवन, समय से पहले अंडे व बच्चों का बड़ा बदलाव

गर्म होती धरती में जेंटू पेंगुइन में अनोखा बदलाव देखा गया, प्रजनन समय पहले कर चूजे लू से बच रहे हैं, प्रजनन समय बदलना अस्थायी समाधान, बढ़ती गर्मी में पेंगुइन के अस्तित्व पर खतरा रहेगा।

Dayanidhi

  • पेंगुइन प्रजनन समय हर साल लगभग दो दिन पहले कर रहे हैं ताकि चूजे बढ़ती गर्मी और हीट वेव से बच सकें।

  • अर्जेंटीना के मार्टिलो द्वीप पर दस साल के अध्ययन में जेंटू पेंगुइन के व्यवहार में जलवायु परिवर्तन से बड़ा बदलाव देखा गया।

  • तापमान 18 डिग्री सेल्सियस पर चूजे हांफने लगते हैं और 20 डिग्री से ऊपर वे छांव और ठंडी जगह ढूंढते हैं तुरंत।

  • 2015 की भीषण गर्मी में तापमान 24 डिग्री पहुंचने पर कुछ ही मिनटों में कई पेंगुइन चूजों की मौत हो गई।

  • वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रजनन समय बदलना अस्थायी समाधान है, लगातार बढ़ती गर्मी में पेंगुइन के अस्तित्व पर खतरा रहेगा।

पिछले कुछ दशकों में दुनिया भर में तापमान तेजी से बढ़ा है। लू या हीटवेव पहले से ज्यादा बार और ज्यादा तीव्रता के साथ आने लगी हैं। इसका असर सिर्फ इंसानों पर ही नहीं, बल्कि जानवरों पर भी पड़ रहा है। कई जीवों के लिए यह बदलाव उनके जीवन और आवास के लिए खतरा बन गया है।

इसी बीच वैज्ञानिकों ने एक ऐसे पेंगुइन पर गौर किया जो इस बढ़ती गर्मी के बीच खुद को ढालने की कोशिश कर रहा है। यह पेंगुइन है जेंटू पेंगुइन है।

अर्जेंटीना के द्वीप पर शोध

वैज्ञानिकों ने यह अध्ययन अर्जेंटीना के एक छोटे से द्वीप मार्टिलो द्वीप पर किया। यह शोध लगभग 10 साल (2013 से 2024) तक चला। इसमें ब्रिटेन और अर्जेंटीना के शोधकर्ताओं ने मिलकर एक पेंगुइन कॉलोनी पर नजर रखी।

वैज्ञानिक यह समझना चाहते थे कि ठंडे वातावरण में रहने वाले ये पेंगुइन जब ज्यादा गर्मी का सामना करते हैं तो कैसे प्रतिक्रिया देते हैं। इसके लिए उन्होंने एक खास कैमरा लगाया और मौसम विभाग के तापमान के आंकड़ों से उसकी तुलना की।

चूजों के लिए गर्मी बन रही खतरा

पेंगुइन के बच्चे यानी चूजे मोटे और गर्म रखने वाले पंखों के साथ पैदा होते हैं। यह पंख ठंड में तो मदद करते हैं, लेकिन गर्मी में यही उनके लिए खतरा बन जाते हैं।

जब तापमान लगभग 18 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचता है, तो चूजों को गर्मी लगने लगती है और वे हांफने लगते हैं। 20 डिग्री सेल्सियस से ऊपर वे छांव खोजने की कोशिश करते हैं। एक बार जनवरी 2015 में जब तापमान 24 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, तो बहुत ही कम समय में कई चूजों की मौत हो गई। इससे साफ हुआ कि यह जीव गर्मी के प्रति बहुत संवेदनशील है।

पेंगुइन का बदलता व्यवहार

प्लोस वन नामक पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन में एक दिलचस्प बात सामने आई। वैज्ञानिकों ने पाया कि ये पेंगुइन अब अपने प्रजनन का समय बदल रहे हैं। हर साल वे लगभग दो दिन पहले अंडे दे रहे हैं और बच्चों को बड़ा कर रहे हैं।

इस बदलाव का फायदा यह है कि उनके बच्चे समय से पहले बड़े होकर समुद्र में चले जाते हैं। समुद्र उनके लिए ठंडी और सुरक्षित जगह होती है। इस तरह वे तेज गर्मी और हीटवेव से बच जाते हैं। वैज्ञानिक इसे “जलवायु के अनुसार जीवन-चक्र में बदलाव” कहते हैं।

यह बदलाव कितना सफल है?

यह रणनीति अभी कुछ हद तक सफल दिखाई दे रही है। समय से पहले प्रजनन करने से चूजों को गर्मी के सबसे खतरनाक दिनों से बचने का मौका मिल रहा है।

लेकिन वैज्ञानिकों ने यह भी चेतावनी दी है कि यह स्थायी समाधान नहीं है। अगर तापमान इसी तरह बढ़ता रहा और हीटवेव और ज्यादा तेज और लंबे समय तक चलने लगीं, तो पेंगुइन के लिए जीवित रहना मुश्किल हो सकता है।

भविष्य की चिंता

शोधकर्ताओं का कहना है कि यह बदलाव दिखाता है कि जानवर भी जलवायु परिवर्तन के अनुसार खुद को ढालने की कोशिश करते हैं। लेकिन हर प्रजाति के लिए यह संभव नहीं होता। अगर वैश्विक तापमान लगातार बढ़ता रहा, तो ऐसे ठंडे क्षेत्रों में रहने वाले जीवों के लिए बड़ा संकट पैदा हो सकता है।

यह अध्ययन हमें यह समझाता है कि जलवायु परिवर्तन अब सिर्फ भविष्य की समस्या नहीं है, बल्कि यह आज ही जानवरों के जीवन को बदल रहा है। जेंटू पेंगुइन जैसे जीव अपने व्यवहार में बदलाव करके बचने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यह बदलाव सीमित है। यदि धरती लगातार गर्म होती रही, तो केवल पेंगुइन ही नहीं, बल्कि कई अन्य जीवों के अस्तित्व पर भी गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।