गैलापागोस के गहरे समुद्री मूंगे 1000 साल गायब रहे, फिर लौटे, जलवायु परिवर्तन और ईएनएसओ मुख्य कारण बताए गए फोटो साभार: आईस्टॉक
जलवायु

गैलापागोस के गहरे समुद्री मूंगे: 1000 साल गायब होकर लौटे, वैज्ञानिकों ने बताई चौंकाने वाली वजह

शोध में पता चला कि गैलापागोस के गहरे समुद्री मूंगे लंबे समय तक लुप्त रहे, इसमें जलवायु में बदलाव ने निभाई अहम भूमिका

Dayanidhi

  • गैलापागोस के गहरे समुद्री मूंगे 1000 साल गायब रहे, फिर लौटे, जलवायु परिवर्तन और ईएनएसओ मुख्य कारण बताए गए

  • अध्ययन में खुलासा हुआ कि गहरे समुद्री मूंगे लंबे समय तक लुप्त रहे, बाद में प्राकृतिक रूप से दोबारा प्रकट हुए

  • वैज्ञानिकों ने पाया कि गैलापागोस क्षेत्र में समुद्री मूंगे जलवायु बदलाव के कारण हजारों वर्षों तक प्रभावित रहे

  • शोध से पता चला कि ईएनएसओ प्रणाली में बदलाव ने गहरे समुद्री मूंगों के जीवन और अस्तित्व को गंभीर रूप से प्रभावित किया

  • गहरे समुद्र के मूंगे अत्यधिक जलवायु संवेदनशील निकले, लेकिन लंबे समय बाद पारिस्थितिकी तंत्र में उनकी वापसी संभव हुई

वैज्ञानिकों ने एक नए शोध में यह पाया है कि गैलापागोस क्षेत्र में पाए जाने वाले गहरे समुद्र के मूंगे (डीप-सी कोरल ) एक समय पर लगभग 1000 सालों तक गायब हो गए थे। यह अध्ययन अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की टीम ने किया है, जिसका नेतृत्व यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल के शोधकर्ताओं ने किया। यह शोध प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका पीएनएएस में प्रकाशित किया गया है।

इस शोध ने यह दिखाया कि समुद्र की गहराई में रहने वाले मूंगे भी जलवायु परिवर्तन से बहुत प्रभावित हो सकते हैं, जबकि पहले ऐसा माना जाता था कि वे अपेक्षाकृत सुरक्षित हैं।

वैज्ञानिकों ने कैसे किया शोध

वैज्ञानिकों ने गैलापागोस क्षेत्र के समुद्र की गहराई से लगभग 900 मूंगे के जीवाश्म एकत्र किए। ये मूंगे लगभग 1000 मीटर गहराई तक पाए गए थे। इन नमूनों की उम्र जानने के लिए उन्होंने एक खास तकनीक का उपयोग किया, जिसे यूरेनियम-थोरियम डेटिंग कहा जाता है।

इस तकनीक की मदद से उन्होंने पिछले लगभग एक लाख 17 हजार साल का एक विस्तृत इतिहास तैयार किया। यह अब तक गहरे समुद्री मूंगों पर किए गए सबसे विस्तृत अध्ययनों में से एक माना जा रहा है।

हजार साल का रहस्यमय गायब होना

शोध में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि लगभग 5000 साल पहले इन मूंगों की संख्या अचानक खत्म हो गई थी। इसके बाद लगभग 1000 साल तक इनके कोई निशान नहीं मिले। फिर धीरे-धीरे ये मूंगे दोबारा इस क्षेत्र में दिखाई देने लगे।

वैज्ञानिकों के अनुसार यह कोई सामान्य घटना नहीं थी, बल्कि यह एक बड़े जलवायु बदलाव का परिणाम था। इस समय समुद्र के वातावरण में बड़ा परिवर्तन हुआ, जिससे इन मूंगों के लिए जीवन कठिन हो गया।

जलवायु परिवर्तन और ईएनएसओ का संबंध

शोध में बताया गया कि इस घटना का संबंध ईएनएसओ यानी एल नीनो-दक्षिणी दोलन नामक जलवायु प्रणाली से था। यह प्रणाली प्रशांत महासागर में हवाओं और समुद्र के तापमान में बदलाव के कारण बनती है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि उस समय लंबे समय तक ला नीना जैसी स्थिति बनी रही। इस कारण समुद्र की गहराई से ठंडा और पोषक तत्वों से भरपूर पानी ऊपर आ गया। इससे गहरे समुद्र में ऑक्सीजन की कमी हो गई, जिससे मूंगों का जीवन मुश्किल हो गया।

शोध पत्र में शोधकर्ता के हवाले से बताया कि भले ही एल नीनो घटनाएं सतही समुद्र को प्रभावित करती हैं, लेकिन लंबे समय तक चलने वाली ला नीना स्थितियां गहरे समुद्र के लिए अधिक खतरनाक हो सकती हैं।

भविष्य के लिए संकेत

वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि भविष्य में जलवायु परिवर्तन के कारण ईएनएसओ पैटर्न बदल सकता है। इसका असर गहरे समुद्री जीवन पर भी पड़ेगा। यह अध्ययन दिखाता है कि समुद्र की गहराई में रहने वाले जीव भी जलवायु बदलाव के प्रति बहुत संवेदनशील हैं।

शोधकर्ताओं का कहना है कि यह जानकारी भविष्य में समुद्री संरक्षण योजनाओं को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां समुद्री जैव विविधता बहुत अधिक है।

संरक्षण और पुनर्प्राप्ति की संभावना

अध्ययन में यह भी पाया गया कि भले ही मूंगे एक समय पर खत्म हो गए थे, लेकिन वे बाद में फिर से लौट आए। इसका मतलब है कि समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र में पुनर्प्राप्ति की क्षमता होती है, लेकिन इसमें हजारों साल लग सकते हैं। चार्ल्स डार्विन फाउंडेशन और गैलापागोस नेशनल पार्क डायरेक्टरेट जैसे संगठन अब इन क्षेत्रों के संरक्षण पर काम कर रहे हैं।

वैज्ञानिकों ने यह भी बताया कि गहरे समुद्र के अध्ययन के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया, जैसे मानव द्वारा संचालित पनडुब्बी एल्विन और रोबोटिक वाहन सुबास्टियन। इन उपकरणों को रिसर्च जहाजों एटलांटिस और फाल्कोर से संचालित किया गया।

यह अध्ययन हमें यह समझने में मदद करता है कि समुद्र की गहराई में छिपी दुनिया भी जलवायु परिवर्तन से सुरक्षित नहीं है। गैलापागोस के मूंगों का इतिहास दिखाता है कि प्रकृति में बड़े बदलाव धीरे-धीरे लेकिन बहुत गहरे प्रभाव डालते हैं। हालांकि दोबारा बहाली संभव है, लेकिन इसके लिए बहुत लंबा समय और सही संरक्षण नीतियों की जरूरत होती है।