बैठे ठाले: भाग कोलंबस! भाग!

कोलंबस बोला, “जिस देश में साफ हवा में सांस लेने की बात करने पर पुलिस पकड़ लेती है, वहां से जितनी जल्दी हो सके भाग जाना चाहिए”
बैठे ठाले: भाग कोलंबस! भाग!
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जहाज के बाकी नाविकों के फोन पर यूट्यूब से लेकर, फेसबुक, टेलीग्राम, अमेजन प्राइम, नेटफ्लिक्स इत्यादि कुछ भी नहीं चल रहे थे क्योंकि बहुतेरे लोगों की तरह नाविकों को यह पता नहीं था कि महासागरों में इंटरनेट काम नहीं करता। पर एक मंझे हुए नाविक होने के नाते कोलंबस को यह बात पता थी और इसीलिए वह अपने साथ रिकॉर्ड प्लेयर लेकर चला था।

कोलंबस ने गाना चला दिया,

“मेरी सांसों में बसा है तेरा ही इक नाम/ तेरी याद हमसफर सुबहो शाम।”

कोलंबस को यह गीत बहुत पसंद था। उसे लगता था कि जावेद अख्तर ने यह गाना उसके “डिस्कवरी ऑफ इंडिया” अभियान के लिए ही लिखा है।

अचानक उसके केबिन की खिड़की से झाग का सैलाब अंदर आ गया। उसने बाहर देखा जहां दूर-दूर तक झाग ही झाग भरा था।

कोलंबस हड़बड़ा कर बाहर निकला और पूछा, “ये कहां आ गए हम, यूं ही साथ चलते-चलते? चारों ओर यह झाग कैसा है? लगता है हम इंडिया पहुंच गए हैं और हम यमुना नदी पर हैं!”

उनमें से एक नाविक चीखकर बोला, “वह रहा इंडिया गेट! हुर्रे आखिरकार हम इंडिया पहुंच ही गए!”

अगले ने उसे डांटते हुए कहा, “बहुत स्मार्ट मत बनो! इंडिया गेट तो बासमती के कट्टे पर भी लिखा होता है!”

जल्द ही उनका जहाज राजघाट के घाट से जा टकराया। वहां पहुंचते ही कोलंबस समेत सारे नाविक बुरी तरह खांसने लगे। जल्द ही वे लोग इंडिया गेट जा पहुंचे। वहां बड़ी भीड़ थी। हजारों लोग हाथों में तरह-तरह की तख्तियां लेकर खड़े थे। कुछ लोग नारे लगा रहे थे।

कोलंबस ने पास खड़े एक आदमी से पूछा, “सर जी, क्या आज यहां रावण जलने वाला है? आखिर इतनी भीड़ क्यों है और आप लोग हाथों में तख्तियां लेकर क्यों खड़े हैं?”

वह आदमी कोलंबस को घूरता हुआ बोला, “सर पर टोपी! नीली-लाल ड्रेस! किसी बैंड बाजा ग्रुप से हो क्या? तुम्हें इतना भी नहीं पता कि दिल्ली की हवा बेहद खतरनाक हो गई है। हमें सांस लेने में दिक्कत हो रही है और उसी का विरोध करने आज हम दिल्ली वाले सपरिवार इंडिया गेट पर इकट्ठा हुए हैं। हम सरकार से मांग कर रहे हैं कि शहर की हवा साफ करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं....”

इससे पहले वह आदमी अपनी बात पूरी करता अचानक पूरी जगह को पुलिस ने घेर लिया और लोगों को जबरन बसों में बैठाने लगे। चारों ओर अफरातफरी फैल गई। इससे पहले कि पुलिस उनको पकड़ती कोलंबस ने आंखों से इशारा किया और वे लोग इस भीड़ से कट कर जहाज पर वापस जा पहुंचे।

कोलंबस ने जहाजों को वापस मोड़ने का हुक्म दिया। नाविक उसके इस आदेश से हैरान रह गए। एक ने पूछा, “इतने दिन की मेहनत के बाद हमने इंडिया को खोजा और आप हमें लौटने को कह रहे हो! वापस देश पहुंचकर हम राजा फर्डिनंड और रानी इसाबेला को क्या जवाब देंगे कि हम लाखों रुपए खर्च कर इंडिया पहुंचे और बगैर रुके वापस आ गए?”

कोलंबस बोला, “जिस देश में साफ हवा में सांस लेने की बात करने पर पुलिस पकड़ लेती है, वहां से जितनी जल्दी हो सके भाग जाना चाहिए। हमारे इंडिया पहुंचने की बात किसी को पता न चले। रही बात राजा-रानी को बताने की तो हम कह देंगे कि हम इंडिया को नहीं खोज सके। उनकी फंडिंग को हम बहामास द्वीप ढूढ़कर पूरा कर देंगे।”

इतना कहते हुए कोलंबस अपने केबिन में आ गया और उसने रिकॉर्ड प्लेयर पर गाना चला दिया “सांसों जी जरूरत है जैसे..…. जिंदगी के लिए... 

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