

हरियाणा के बल्लभगढ़ में वायु गुणवत्ता सूचकांक देश के अन्य शहरों के मुकाबले सबसे अधिक (एक्यूआई) 409 पहुंच गया, जिससे यहां की हवा ‘गंभीर’ श्रेणी में आ गई। वहीं, राजधानी दिल्ली सहित 19 अन्य शहरों में हवा ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज की गई।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 7 नवंबर 2026 को शाम चार बजे जारी बुलेटिन के मुताबिक राजधानी दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 369 दर्ज किया गया। हालांकि दिल्ली के 71 केंद्रों में से 21 केंद्रों पर वायु गुणवत्ता सूचकांक गंभीर श्रेणी (400 से ऊपर) पहुंच गया।
दिल्ली एक्यूआई पोर्टल के अनुसार जिन केंद्रों में एक्यूआई गंभीर हालत में पहुंच गया, उनमें आईआईटी दिल्ली (445), पंजाबी बाग (439), जहांगीरपुरी (429), विवेक विहार (426), रोहिणी (424), आर के पुरम (423), मुंडका (422), बवाना (420), सिरीफोर्ट (418), सोनिया विहार (418), डीटीयू (417), नरेला (416), नजफगढ़ (410), अलीपुर (409), डॉ. करणी सिंह शूटिंग रेंज (409), जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम (409), द्वारका-सेक्टर 8 (408), पूसा (408), आईटीओ (403) और ओखला फेज-2 (401) हैं।
बहुत खराब श्रेणी में जिन शहरों का एक्यूआई पहुंच गया, उनमें सिरसा (383), गजरौला (382), पंचगांव (377), बहादुरगढ़ (364), खोड़ा (352), बिलाईपाड़ा (350), गुरुग्राम और अनपरा (345-345), खैरथल (335), फरीदाबाद (336), ग्वालियर (333), रोहतक (320), भिवाड़ी (318), हिसार (316), जींद (310), हापुड़ और सोनीपत (307-307), भिवानी (307) तथा दिल्ली (369) शामिल हैं। इन सभी शहरों में एक्यूआई 301 से 400 के बीच दर्ज किया गया।
सीपीसीबी के 7 नवंबर 2026 को शाम चार बजे जारी बुलेटिन के मुताबिक, देश के 56 शहरों में वायु गुणवत्ता ‘खराब’ श्रेणी में दर्ज की गई। इस श्रेणी में 201 से 300 के बीच का एक्यूआई आता है। राज्यवार देखें तो राजस्थान के 15, उत्तर प्रदेश के 13, हरियाणा के 10, बिहार के 6, पंजाब के 4, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के 3-3 तथा हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु के एक-एक शहर की हवा खराब श्रेणी में रही। सबसे अधिक एक्यूआई नोएडा में 297 दर्ज किया गया।
इसके बाद दौसा और कैथल (289-289), बुलंदशहर (283), ग्रेटर नोएडा और मंडी गोबिंदगढ़ (281-281), पानीपत और मानेसर (279-279), गाजियाबाद (277), बीकानेर (271), करौली (267), मुजफ्फरनगर (263), चरखी दादरी (262), मोदीनगर (261), मंडीदीप (258), झुंझुनूं (256), नारनौल और सवाई माधोपुर (255-255) तथा करनाल (254) में एक्यूआई दर्ज किया गया।
इसके अलावा बागपत (249), सीकर (247), सासाराम (246), मेरठ (245), अंबाला, कुरुक्षेत्र और शामली (241-241), गुम्मिडिपूंडी (236), अलवर (232), जयपुर, कानपुर और सिंगरौली (231-231), टोंक और उज्जैन (230-230), खुर्जा और मालेगांव (228-228), नांदेड़ (226), बद्दी (224), जालौर और किउल (223-223), लुधियाना (222), फतेहाबाद (221), धौलपुर और गोपालगंज (219-219) में एक्यूआई दर्ज किया गया।
इससे कम एक्यूआई वाले शहरों में बड़ौत, भरतपुर और चित्तौड़गढ़ (214-214), मोतिहारी (212), पिंपरी-चिंचवड़ (211), चूरू (209), हाजीपुर (208), लखनऊ (207), जालंधर (205), पटियाला (204) और अररिया (202) शामिल रहे।
103 शहरों में मध्यम श्रेणी का एक्यूआई
सीपीसीबी के 7 नवंबर 2026 को शाम चार बजे जारी बुलेटिन के मुताबिक, देश के 100 शहरों में वायु गुणवत्ता ‘मध्यम’ श्रेणी में दर्ज की गई। राज्यवार देखें तो महाराष्ट्र के 20, राजस्थान के 18, बिहार और ओडिशा के 11-11, उत्तर प्रदेश, गुजरात और मध्य प्रदेश के 8-8, पश्चिम बंगाल के 6, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और हरियाणा के 2-2 तथा त्रिपुरा, असम, झारखंड और लद्दाख के एक-एक शहर में हवा मध्यम श्रेणी में रही।
इनमें सबसे अधिक एक्यूआई नागौर में 200 दर्ज किया गया। इसके बाद कटनी (198), हनुमानगढ़ (197), अगरतला (194), अंगुल (192), मुरादाबाद (190), भोपाल (187), हावड़ा और सिवान (182-182), अहमदाबाद (176), वाराणसी (175), जमुई (174), आगरा (173), प्रयागराज (171), पीथमपुर (170), अम्बरनाथ, देवास और पाली (166-166), कोलकाता, नागपुर और यमुनानगर (165-165), भीलवाड़ा (164), बूंदी, डीग, झालावाड़ और सुआकाटी (161-161) में एक्यूआई रहा।शहरों क
इसके अलावा देश के 82 शहरों की हवा संतोषजनक और 18 शहरों की हवा अच्छी श्रेणी में रही। संतोषजनक से आशय वायु गुणवत्ता सूचकांक 51 से 100 और अच्छी श्रेणी से आशय 50 से कम माना जाता है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के मुताबिक, वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) को छह श्रेणियों में बांटा गया है। शून्य से 50 तक एक्यूआई को अच्छा, 51 से 100 तक संतोषजनक, 101 से 200 तक मध्यम, 201 से 300 तक खराब, 301 से 400 तक बहुत खराब और 401 से 500 तक गंभीर श्रेणी में रखा जाता है।
अच्छी श्रेणी की हवा का स्वास्थ्य पर न्यूनतम प्रभाव पड़ता है, जबकि संतोषजनक श्रेणी में संवेदनशील लोगों को सांस लेने में मामूली परेशानी हो सकती है। मध्यम श्रेणी की हवा फेफड़ों की बीमारी, अस्थमा और हृदय रोग से पीड़ित लोगों के लिए परेशानी पैदा कर सकती है। खराब श्रेणी में लंबे समय तक रहने से अधिकांश लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो सकती है।
बहुत खराब श्रेणी की हवा में लंबे समय तक रहने से श्वसन संबंधी बीमारियां हो सकती हैं, जबकि गंभीर श्रेणी की हवा स्वस्थ लोगों को भी प्रभावित करती है और पहले से बीमार लोगों की स्थिति को और गंभीर बना सकती है।