

चेन्नई के अडयार बीच पर स्थित मद्रास ट्रांसपोर्ट कारर्पोरेशन यानी एमटीसी के बस स्टॉप के पास चिलचिलाती धूप में 75 वर्षीय उर्दवला माला गूथने में व्यस्त हैं। उन्होंने डाउन टू अर्थ को बताया कि पता नहीं क्यों पिछले डेढ़–दो सालों से मुझे यह तेज धूप कम महसूस हो रही है, नहीं तो पहले तो यह असहनीय थी और शरीर भी जलने लगता था।
वह बताती हैं कि पहले यहां पर धुआं इतना अधिक होता था कि सांस लेना मुश्किल हो जाता था लेकिन अब मालूम नहीं ये कौन सी भुतही बसें आने लगी हैं जो न तो शोर मचाती हैं और न ही धुंआ उगलती हैं। उर्दवला की भुतही बसों का मतलब है इलेक्ट्रीक बसें यानी ईवी।
वास्तव में उन्हें यह पता नहीं है कि पहले जो बसें इस स्टॉप पर आकर खड़ी होती थीं, वह डीजल चलित बसें थीं और अब यहां ईवी बसें आकर रुकती हैं। डीजल चलित बसों के कारण स्टॉप पर वायु प्रदूषण अधिक रहता था, यही कारण है कि उर्दवला को अधिक गर्मी व जलन का अहसास होता था लेकिन पिछले नौ वर्ष में एमटीसी के बसों के बेड़े में 30 प्रतिशत से अधिक ईवी बसों के शामिल होने के कारण अब उर्दवला को कम शोर और धुआं रहित बसों के कारण गर्मी का अहसास भी कम होने लगा है।
पर्यावरण संबंधी शोध संस्था क्लाइमेट ट्रेंड्स के अनुसार राज्य में पांच वर्षों की अवधि में सूक्ष्म कणों में 22 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार राज्य के तीन शहरों चेन्नई, त्रिरुची और मदुरै ऐसे शहर हैं जहां राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम यानी एसीएपी की गतिविधियां चल रही हैं। एसीएपी की संचालन समिति के अनुसार एनसीएपी के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार 2019 से 2026 तक वायु प्रदूषण में अनुमानित कमी 40 प्रतिशत तक का रखा गया है।
ध्यान रहे कि 2026 के मार्च तक एमटीसी के पास 4,130 बसों का बेड़ा है। इसमें ईवी की 255 बसें दो डिपों से और 125 तीसरे डिपो से संचालित हो रही हैं। इसके अलावा 500 ईवी बसों को शामिल करने की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है। इसके अलावा 1,520 ईवी बसों का टेंडर जुलाई के अंतिम सप्ताह तक जारी किया जाने वाला है।
चेन्नई के ऑटोमोबाइल विशेषज्ञ सुशील मेहता कहते हैं कि इलेक्ट्रिक वाहनों से टेलपाइप उत्सर्जन (गाड़ी के साइलेंसर से निकलने वाला धुआं) बिल्कुल नहीं होता, जिससे स्थानीय हवा की गुणवत्ता बेहतर होती है।
साथ ही उनका कहना है कि शोर का प्रदूषण भी कम करते हैं। हालांकि पर्यावरण को होने वाला कुल लाभ इस बात पर निर्भर करते है कि बिजली कैसे पैदा की जाती है। जैसे-जैसे भारत का पावर ग्रिड रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) के अधिक इस्तेमाल से साफ होता जाएगा और ईवी से जलवायु को होने वाले लाभ भी बढ़ते जाएंगे।
हालांकि मद्रास आईआईटी से पासआउट तकनीकी विशेषज्ञ एस षणमुगा कहते हैं कि भारत सहित तमिलनाडु में वायु प्रदूषण को रोकने और स्वच्छ ऊर्जा के नाम पर ईवी को बढ़ावा दिया जाना वर्तमान परिवेश के हिसाब से अधिक कारगर साबित नहीं होने वाला क्योंकि वर्तमान में जो नीति अपनाई जा रही है वह बस वायु प्रदूषण को एक राज्य से दूसरे राज्य में स्थानांतरित करने भर की तरकीब बन कर रह जाने वाली है।
वह कहते हैं कि सरकारों को कोई भी नीति बनाने से पूर्व उसकी लागत का विश्लेषण करना और आमजन के लिए उस खर्च को वाहन करने की क्षमता को आधार बनाना बहुत जरूरी है और साथ ही आज जरूरत है कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बेहतर, पर्याप्त और सुविधाजनक बनाने की जरूरत है ताकि अधिक से अधिक लोग निजी वाहनों का मोह त्याग सकें।
दूसरी ओर राज्य सरकार ने अगस्त 2026 के अपने बजट में ईवी सेक्टर में रोजगार के अवसर भी खोलने की तैयारी में है। यही कारण है कि राज्य सरकार ने अगस्त 2026-27 के अपने संशोघित बजट में इस पहल की घोषणा की है। इस पहल के लिए मौजदा वित्त वर्ष में तीन करोड़ रुपए आबंटित किए गए हैं।
इसके तहत अगले पांच सालों में 22,500 लोगों को प्रशिक्षण देने के लिए एक विशेष स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम शुरू किया जाएगा। इसका मुख्य मकसद है उन मैकेनिक को जरूरी तकनीकी स्किल सिखाना है जो अभी पेट्रोल व डीजल गाड़ियों की सर्विस पर निर्भर हैं ताकि वे ईवी और उसकी बेटरी सिस्टम की मरम्मत और रखरखाव कर सकें।