संसद में आज: 31 जुलाई 2026 तक 70,495 व्यावसायिक और 3,96,486 निजी यात्री वाहन हुए स्क्रैप

संसद में आज, पांच अगस्त, 2026 को एआई आधारित एल नीनो पूर्वानुमान, पर्यावरण अनुकूल डेटा सेंटर, ग्रीन हाइड्रोजन हब समेत कई मुद्दों पर सवाल खड़े किए गए, जिसका सरकार के विभिन्न मंत्रालयों द्वारा जवाब दिया गया
संसद में आज: 31 जुलाई 2026 तक 70,495 व्यावसायिक और 3,96,486 निजी यात्री वाहन हुए स्क्रैप
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सारांश
  • एआई आधारित एल नीनो पूर्वानुमान प्रणाली से भारत को मानसून, कृषि और आपदा प्रबंधन में अधिक सटीक एवं समय पर सहायता मिलेगी।

  • भारत एआई मिशन, ग्रीन हाइड्रोजन हब और रूफटॉप सोलर जैसी पहलें स्वच्छ ऊर्जा तथा डिजिटल विकास को नई गति देंगी।

  • राजस्थान के 98.40 प्रतिशत गांवों में मोबाइल इंटरनेट और सभी जिलों में 5जी सेवा से डिजिटल समावेशन मजबूत हुआ।

  • ग्रीन हाईवे नीति, देशी वृक्षारोपण और वाहन स्क्रैपिंग कार्यक्रम पर्यावरण संरक्षण तथा प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं।

  • एआई आधारित तकनीक से राष्ट्रीय राजमार्गों पर 6,358 ब्लैक स्पॉट कॉरिडोर चिन्हित कर सड़क सुरक्षा सुधारने की प्रक्रिया तेज हुई।

एल नीनो का प्रभाव और भारत की नई भविष्यवाणी प्रणाली

सदन में पूछे गए एक प्रश्न का लिखित उत्तर देते हुए आज, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में बताया कि मंत्रालय ने मौसम और जलवायु की बेहतर भविष्यवाणी के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस मंत्रालय के अधीन भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) पर आधारित एक स्वदेशी एल नीनो सदर्न ऑसिलेशन (ईएनएसओ) पूर्वानुमान प्रणाली विकसित की है। यह प्रणाली केवल मौसम का अनुमान ही नहीं लगाती, बल्कि यह भी बताती है कि अनुमान कितना विश्वसनीय है।

सिंह ने कहा कि नवीनतम समुद्री आंकड़ों और आईएनसीओआईएस-जीओडीएएस प्रणाली के आधार पर मई 2026 में एल नीनो की स्थिति विकसित हुई है। अनुमान है कि जून 2026 से फरवरी 2027 तक एल नीनो बने रहने के 70 से 90 प्रतिशत तक आसार हैं। यह प्रणाली किसानों, जल संसाधन प्रबंधन, आपदा प्रबंधन और मानसून की तैयारी में बहुत उपयोगी होगी। इससे समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकेंगे।

एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर का पर्यावरण अनुकूल विस्तार

एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर को लेकर सदन में उठाए गए एक सवाल के जवाब में आज, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में कहा कि देश में डिजिटल सेवाओं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का तेजी से विस्तार हो रहा है। इस दिशा में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय भारतएआई मिशन के तहत एक मजबूत और स्वदेशी एआई व्यवस्था तैयार कर रहा है। इसमें कंप्यूटिंग क्षमता, भारतीय एआई मॉडल और देश की जरूरतों के अनुसार एआई आधारित सेवाओं का विकास किया जा रहा है।

प्रसाद ने बताया कि भारत में डेटा सेंटर की क्षमता वर्ष 2020 में 375 मेगावाट थी, जो बढ़कर लगभग 1575 मेगावाट हो गई है। बढ़ती एआई और हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग की मांग को देखते हुए आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल कूलिंग तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इनमें डायरेक्ट-टू-चिप लिक्विड कूलिंग, इमर्शन कूलिंग, एडियाबैटिक कूलिंग और क्लोज्ड-लूप लिक्विड कूलिंग शामिल हैं। इसके साथ ही हाई डेंसिटी रैक लगाए जा रहे हैं, जिससे बिजली और पानी की खपत कम होती है। इन प्रयासों से ऊर्जा दक्षता बढ़ेगी और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी।

ग्रीन हाइड्रोजन हब की स्थापना

सदन में उठे एक प्रश्न का उत्तर देते हुआ आज, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा तथा विद्युत राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने लोकसभा में बताया कि भारत स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी उद्देश्य से सरकार राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (एनजीएचएम) लागू कर रही है। इसका लक्ष्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है।

नाइक ने कहा कि सरकार ने गुजरात के कांडला स्थित दीनदयाल बंदरगाह, तमिलनाडु के तूतीकोरिन स्थित वी. ओ. चिदंबरनार बंदरगाह और ओडिशा के पारादीप बंदरगाह को ग्रीन हाइड्रोजन हब के रूप में चुना है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश के पुडीमडका में एनटीपीसी द्वारा ग्रीन हाइड्रोजन हब स्थापित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं से स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटेगी और नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल इंटरनेट सुविधा

ग्रामीण इलाकों में मोबाइल इंटरनेट को लेकर उठाए गए एक सवाल के जवाब में आज, संचार तथा ग्रामीण विकास राज्य मंत्री पेम्मासानी चंद्रशेखर ने लोकसभा में जानकारी देते हुए कहा कि डिजिटल इंडिया अभियान के तहत ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट पहुंचाने का कार्य तेजी से चल रहा है। मंत्रालय इस दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है।

चंद्रशेखर ने बताया कि जून 2026 तक राजस्थान के कुल 46,077 गांवों में से 45,341 गांवों में मोबाइल इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध हो चुकी है। यह कुल गांवों का लगभग 98.40 प्रतिशत है। उन्होंने यह भी बताया कि राजस्थान के सभी जिलों में 5जी सेवा उपलब्ध करा दी गई है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, ऑनलाइन सेवाओं और डिजिटल लेनदेन को बड़ा फायदा मिलेगा।

सरकारी भवनों पर रूफटॉप सोलर प्रणाली

सदन में पूछे गए एक और प्रश्न के उत्तर में आज, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा तथा विद्युत राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने लोकसभा में बताया कि सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय लगातार कार्य कर रहा है। हालांकि अभी सरकार ने सभी सरकारी भवनों पर रूफटॉप सोलर लगाना अनिवार्य नहीं किया है, लेकिन सभी केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों तथा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से खाली छतों का उपयोग सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए करने का अनुरोध किया गया है।

नाइक ने कहा कि केंद्र सरकार की 41,972 इमारतों के लिए कार्ययोजना प्राप्त हुई है। इनमें से 24,376 भवनों पर रूफटॉप सोलर प्रणाली लगाई जा चुकी है, जिसकी कुल क्षमता लगभग 854 मेगावाट है। चंडीगढ़, दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव तथा लद्दाख जैसे केंद्र शासित प्रदेशों ने सरकारी भवनों के सौरकरण का लक्ष्य लगभग पूरा कर लिया है। इससे स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग बढ़ेगा और बिजली की बचत होगी।

राष्ट्रीय राजमार्गों पर पर्यावरण संरक्षण

सदन में सवालों का सिलसिला जारी रहा, इसी बीच सदन में ऊठे एक सवाल के जवाब में आज, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन जयराम गडकरी ने राज्यसभा में बताया कि सड़क निर्माण के साथ पर्यावरण संरक्षण भी सरकार की प्राथमिकता है। मंत्रालय ने साल 2015 में ग्रीन हाईवे नीति लागू की थी। इस नीति के तहत राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे हरित पट्टियां विकसित की जा रही हैं।

गडकरी ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) स्थानीय जलवायु के अनुसार देशी प्रजातियों के पेड़ लगा रहा है। इसके साथ ही मधुमक्खी गलियारे (बी कॉरिडोर) और आरोग्य वन भी विकसित किए जा रहे हैं। इन प्रयासों से जैव विविधता का संरक्षण होगा, प्रदूषण कम होगा और पर्यावरण संतुलन मजबूत होगा।

वाहन स्क्रैपिंग नीति और सड़क सुरक्षा

वाहन स्क्रैपिंग को लेकर सदन में पूछे गए एक अन्य प्रश्न का उत्तर देते हुआ आज, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन जयराम गडकरी ने राज्यसभा में कहा कि पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को हटाने के लिए सरकार स्वैच्छिक वाहन बेड़ा आधुनिकीकरण कार्यक्रम चला रही है। इसके तहत पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग केंद्रों की स्थापना की जा रही है।

गडकरी ने बताया कि 31 जुलाई 2026 तक 70,495 व्यावसायिक वाहन और 3,96,486 निजी यात्री वाहन स्क्रैप किए जा चुके हैं। सरकार ने वाहन निर्माताओं द्वारा दिए जाने वाले विशेष छूट का रिकॉर्ड रखने के लिए एक पोर्टल भी बनाया है। 27 जुलाई 2026 तक 1,39,850 वाहन मालिक इस छूट का फायदा उठा चुके हैं। देश के 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 153 पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग केंद्र संचालित हो रहे हैं। इस नीति से प्रदूषण कम होगा, सड़क सुरक्षा बढ़ेगी और वाहन पुनर्चक्रण को बढ़ावा मिलेगा।

राष्ट्रीय राजमार्गों पर हाई-रिस्क सड़क कॉरिडोर

सदन में उठाए गए एक और सवाल के जवाब में आज, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन जयराम गडकरी ने राज्यसभा में बताया कि सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए सरकार आधुनिक तकनीक का उपयोग कर रही है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर द्वारा विकसित कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणाली की मदद से राष्ट्रीय राजमार्गों पर दुर्घटना की आशंका वाली जगहों की पहचान की है।

गडकरी ने बताया कि साल 2023 से 2025 के बीच के इलेक्ट्रॉनिक डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट (ईडीएआर) के आंकड़ों के आधार पर देशभर में 6,358 ब्लैक स्पॉट कॉरिडोर की पहचान की गई है। इन जगहों पर सुधार कार्य किए जाएंगे ताकि सड़क दुर्घटनाओं और मृत्यु की घटनाओं में कमी लाई जा सके। आधुनिक तकनीक का उपयोग सड़क सुरक्षा को और अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

भारत सरकार पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल विकास, आधुनिक तकनीक और सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में लगातार नए कदम उठा रही है। एआई आधारित एल नीनो पूर्वानुमान प्रणाली, पर्यावरण अनुकूल डेटा सेंटर, ग्रीन हाइड्रोजन हब, ग्रामीण इंटरनेट विस्तार, सरकारी भवनों पर सौर ऊर्जा, ग्रीन हाईवे नीति, वाहन स्क्रैपिंग कार्यक्रम और एआई आधारित ब्लैक स्पॉट पहचान जैसी पहलें देश के सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास हैं। इन योजनाओं से पर्यावरण संरक्षण, आर्थिक विकास, डिजिटल सशक्तिकरण और नागरिकों की सुरक्षा को एक साथ बढ़ावा मिलेगा।

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