राजस्थान: सामान्य से 5 डिग्री ऊपर पहुंच रहा है ताप, गेहूं को नुकसान के अंदेशे से परेशान किसान

राजस्थान के हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जिलों में तापमान सामान्य से 5-6 डिग्री ऊपर पहुंच गया है
बढ़ते तापमान से परेशान किसानों ने श्रीगंगानगर में बैठक की। फोटो: रामकिशन शर्मा
बढ़ते तापमान से परेशान किसानों ने श्रीगंगानगर में बैठक की। फोटो: रामकिशन शर्मा
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सारांश
  • हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर में असमय गर्मी से रबी फसलों को खतरा है

  • यह इलाका ‘राजस्थान का अन्न का टोकरा’ कहलाता है लेकिन अनिश्चित मौसम से रबी फसलों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं

  • तापमान में वृद्धि से गेहूं और जौ की फसलें प्रभावित हो सकती हैं। सिंचाई की कमी से किसानों की चिंता बढ़ रही है

  • किसानों ने कहा कि गंग नहर परियोजना क्षेत्र में कम से कम 1500 क्यूसेक पानी की जरूरत है, तभी फसलों का काम चल पाता है

राजस्थान के कृषि बहुल हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जिलों में फरवरी के दूसरे पखवाड़े में ही मौसम ने किसानों की नींद उड़ा दी है।

यहां अधिकतम तापमान सामान्य से पांच से छह डिग्री तक ऊपर चला गया है। हनुमानगढ़ में कल अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस, संगरिया में 28.2 और श्रीगंगानगर में 30.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। खेतों में खड़ी रबी की फसलें असमय ही गर्मी की चपेट में हैं और गांव-ढाणियों में चिंता की लकीरें गहराने लगी हैं।

यह इलाका ‘राजस्थान का अन्न का टोकरा’ कहलाता है लेकिन अनिश्चित मौसम से रबी फसलों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

हनुमानगढ़ जिले के लम्बी ढाब गांव के किसान रघुवीर सिंह कहते हैं कि अगर तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो रबी की फसलों को नुकसान होना तय है। उनकी चिंता खास तौर पर गेहूं को लेकर है।

रघुवीर सिंह ने अपनी 13 बीघा जमीन में से 11 बीघा में गेहूं और दो बीघा में चारा बो रखा है। वे बताते हैं कि इस समय गेहूं की फसल दानों में दूध बनने की अवस्था में है। इस वक्त मौसम सामान्य रहना चाहिए था लेकिन जिस तरह तापमान बढ़ रहा है, उससे डर लगने लगा है।

आंकड़े बताते हैं कि यह चिंता केवल कुछ किसानों तक सीमित नहीं है। हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर दोनों जिलों में कुल 7 लाख 14 हजार 680 हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसलों की बुवाई हुई है। इनमें गेहूं और सरसों का रकबा सबसे ज्यादा है।

अकेले गेहूं की फसल 4 लाख 80 हजार 900 हेक्टेयर क्षेत्र में खड़ी है। तापमान में आई इस अचानक तेजी से इतने बड़े इलाके की फसल प्रभावित होने का अंदेशा किसानों और कृषि विशेषज्ञों दोनों को सता रहा है।

हनुमानगढ़ जिले में संगरिया स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अनूप कुमार कहते हैं कि तापमान में बढ़ोतरी से गर्मी बढ़ रही है और यह स्थिति फसलों के लिए नुकसानदेह है। नुकसान सरसों में भी होगा लेकिन गेहूं में असर ज्यादा दिखेगा। ये फसलें अभी प्रारंभिक अवस्था पर हैं और दाना बनने की प्रक्रिया शुरू हो रही है।

मेहरवाला गांव के किसान गुरचरण सिंह भी बढ़ती गर्मी से बेचैन हैं। उन्होंने नौ बीघा में सरसों और चार बीघा में गेहूं की बुवाई की है। उनका कहना है कि अभी कम से कम एक महीने तक सामान्य मौसम की जरूरत है लेकिन इसके उलट अचानक गर्मी बढ़ रही है।

श्रीगंगानगर में कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक सुरजीत बिश्नोई के अनुसार तापमान सामान्य से अधिक हो चुका है और इसका सीधा असर फसलों पर पड़ रहा है। बढ़ते तापमान से फसलें समय से पहले पकाव की ओर बढ़ सकती हैं।

सरसों की फसल परिपक्व अवस्था में पहुंच चुकी है, इसलिए तापमान में अचानक हुई बढ़ोतरी से उसमें ज्यादा नुकसान की आशंका नहीं है लेकिन गेहूं और जौ की फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकती हैं। बिश्नोई के अनुसार गेहूं और जौ अभी दूधिया अवस्था में हैं और यदि तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो दाने सिकुड़ जाएंगे, जिससे उत्पादन घटेगा।

कृषि विभाग की राय है कि मौजूदा हालात में सिंचाई ही फसलों को कुछ हद तक राहत दे सकती है। संयुक्त निदेशक बिश्नोई कहते हैं कि गेहूं और जौ को नुकसान से बचाने के लिए किसानों को सिंचाई करनी चाहिए क्योंकि पानी देने से गर्मी का असर कम किया जा सकता है लेकिन सच्चाई यह है कि श्रीगंगानगर जिले के अधिकांश किसान सिंचाई करने की स्थिति में ही नहीं हैं।

नहरी पानी की भारी कमी के कारण ज्यादातर नहरें बंद पड़ी हैं। बढ़ते तापमान और पानी की इस किल्लत से पैदा हालात पर विचार करने के लिए आज दोपहर श्रीगंगानगर में संयुक्त किसान संघर्ष मोर्चा के तत्वावधान में दिलबाग सिंह की अध्यक्षता में किसानों की बैठक हुई।

बैठक में किसानों ने कहा कि गंग नहर परियोजना क्षेत्र में कम से कम 1500 क्यूसेक पानी की जरूरत है, तभी फसलों का काम चल पाता है। इसके विपरीत फिलहाल केवल 970 क्यूसेक पानी ही मिल रहा है। इसका नतीजा यह है कि परियोजना की 23 नहरों में से सिर्फ तीन छोटी नहरें ही चल पा रही हैं।

संयुक्त किसान संघर्ष मोर्चा के प्रवक्ता एडवोकेट सुभाष सहगल ने बताया कि फिरोजपुर फीडर की रीलाइनिंग के लिए सरकार ने पुरानी बीकानेर कैनाल से गंग नहर परियोजना को पानी देना शुरू किया। किसानों को 1500 क्यूसेक पानी पहुंचाने का वादा किया गया लेकिन 21 जनवरी से अब तक एक भी दिन इतना पानी नहीं मिला।

सहगल कहते हैं कि एक तरफ सिंचाई के लिए पानी नहीं है और दूसरी तरफ तापमान लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में फसलों की बर्बादी तय लग रही है। उन्होंने बताया कि पूरा पानी देने की मांग को लेकर किसान 20 फरवरी को श्रीगंगानगर और पदमपुर तहसील में चक्का जाम करेंगे।

यह इलाका फरवरी में इस तरह की गर्मी पहली बार नहीं झेल रहा है। पिछले पांच वर्षों में अधिकांश बार इसी समय तापमान में तेज बदलाव देखा गया है। वर्ष 2022 में तो भीषण गर्मी ने गेहूं की फसल को बुरी तरह प्रभावित किया था। उस साल दाने बहुत हल्के और छोटे रह गए थे।

नतीजतन प्रति बीघा औसतन 12 से 16 क्विंटल रहने वाली पैदावार घटकर 6 से 9 क्विंटल प्रति बीघा रह गई। इसका असर तूड़ी के उत्पादन पर भी पड़ा। वर्ष 2021 में जहां तूड़ी 200 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से मिल जाती थी, वहीं 2022 में 1000 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर भी तूड़ी मिलना मुश्किल हो गया था। पशुपालकों के लिए यह स्थिति किसी झटके से कम नहीं थी।

संगरिया स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में दर्ज तापमान के आंकड़े भी मौसम के इस बदले मिजाज की कहानी बयान करते हैं। वर्ष 2022 में यहां 31 जनवरी को अधिकतम तापमान 23.2 डिग्री सेल्सियस था, जो 12 फरवरी को 24.8, 13 फरवरी को 26.3, 6 मार्च को 27.6, 8 मार्च को 29.7, 12 मार्च को 31.7, 17 मार्च को 38.6 और 28 मार्च को 41.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।

वर्ष 2023 में संगरिया में 28 जनवरी को 21.4, 2 फरवरी को 24.6, 5 फरवरी को 26.6, 20 फरवरी को 28.7, 25 फरवरी को 30.1 और 11 मार्च को 33.4 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। इसी तरह वर्ष 2024 में 8 फरवरी को 22.2, 9 फरवरी को 25.4, 16 फरवरी को 27.9, 19 मार्च को 30.5 और 25 मार्च को 33.2 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा।

श्रीगंगानगर जिले में भी तस्वीर कुछ अलग नहीं है। यहां वर्ष 2022 में 17 फरवरी को 27.2, 21 फरवरी को 30.7, 13 मार्च को 35.3, 20 मार्च को 39.5, 28 मार्च को 41.5 और 30 मार्च को 41.4 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।

वर्ष 2023 में 5 फरवरी को 27.4, 6 फरवरी को 29.5 और 7 फरवरी को 27.3 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा।

वर्ष 2024 में 5 फरवरी को 18.0, 6 फरवरी को 18.6 और 7 फरवरी को 21.1 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। वर्ष 2025 में 1 फरवरी को 24.1, 15 फरवरी को 28 और 23 मार्च को 36 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा। इस वर्ष 2026 में 1 फरवरी को 21.4, 10 फरवरी को 25.7 और 15 फरवरी को 30.4 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया है।

संगरिया स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अनूप कुमार का कहना है कि यह पूरा परिदृश्य जलवायु परिवर्तन से जुड़ा हुआ है। पिछले कई वर्षों से जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम की अनिश्चितता बढ़ती जा रही है। तापमान का यह उतार-चढ़ाव अब अपवाद नहीं, बल्कि धीरे-धीरे सामान्य बनता जा रहा है।

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