

इस वर्ष प्याज उत्पादन में लगभग 27% की बंपर वृद्धि से बाजार में आपूर्ति बढ़ गई है, जिससे कीमतों में भारी गिरावट आई है।
किसानों ने पिछले साल अच्छे भाव मिलने पर अधिक बुआई की थी, लेकिन इस बार कम कीमतों से वे निराश हैं।
कोल्ड स्टोरेज की कमी और अनिश्चित बाजार भाव के कारण कई किसान प्याज की खेती छोड़ रहे हैं।
प्याज के उत्पादन में इस वर्ष उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी जा रही है। पिछले वर्ष 242.67 लाख टन के मुकाबले इस वर्ष 307.89 लाख टन उत्पादन का अनुमान है। यानी कुल उत्पादन में 65.22 लाख टन की बढ़ोतरी हो सकती है।
प्रतिशत के रूप में देखें तो यह वृद्धि लगभग 26.9 प्रतिशत है। विशेषेज्ञों का कहना है कि पिछले साल कीमतें अधिक होने के कारण किसानों ने प्याज अधिक लगाई थी। साथ ही बारिश व मौसम साथ दिया, जिसके चलते प्याज का उत्पादन अधिक हो रहा है।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 25 नवंबर 2025 को वर्ष 2024-25 के लिए बागवानी फसलों के क्षेत्रफल व उत्पादन के तृतीय अग्रिम अनुमान जारी किए। आंकड़े बताते हैं कि प्याज के उत्पादन में भारी वृद्धि का अनुमान है।
इस बारे में प्याज व लहसुन अनुसंधान निदेशालय, पुणे के निदेशक डॉ. विजय महाजन ने डाउन टू अर्थ को बताया कि गत वर्ष किसानों को प्याज की कटाई कुछ समय बाद मंडी में अच्छा भाव मिला था, इस वजह से किसानों ने इस साल प्याज की बुआई अधिक की, इसके अलावा जलवायु व बारिश ने भी किसानों का साथ दिया। उन्होंने कहा, “सबसे अधिक प्याज की बुआई व उत्पादन महाराष्ट्र के किसानों ने किया।”
बंपर उत्पादन के कारण इस साल प्याज की कीमतें बढ़ने की बजाय घट रहे हैं। सरकारी वेबसाइट एगमार्केट के अनुसार 25 नवंबर 2025 को प्याज की कीमत 1,222 रुपए प्रति क्विंटल, जो 24 नवंबर 2025 को 938 रुपए क्विंटल थी। इसका मतलब है कि प्याज सरकारी मार्केट में 1.22 रुपए प्रति किलो बिक रहा है। प्याज की कीमतों में गिरावट के कारण किसान काफी निराश हैं।
महाजन भी मानते हैं कि प्याज की आवक अधिक होने से बाजार में भाव कम हो गए हैं। देश में प्याज के कोल्ड स्टॉरेज की कमी के कारण इस तरह की समस्या उत्पन्न होती है। प्याज का सबसे बड़ा स्टोरेज नासिक में है। अब दिल्ली में बन रहा है, जिनमें उचित तापमान व नमी रखकर प्याज को 5-6 महीने तक सुरक्षित रखा जा सकता है, इसमें अधिकतम 15 प्रतिशत तक प्याज का नुकसान होता है। संग्रहण करने से प्याज की निर्यात व उत्पाद तैयार करने में प्याज का महत्व बढ़ जाता है।
छोड़ रहे हैं खेती
कीमतों में अनिश्चितता के कारण कई किसान प्याज की खेती से दूरी बना रहे हैं। मध्यप्रदेश के इंदौर के रहने वाले किसान बबलू जाधव ने बताया कि मंडी में अच्छे भाव न मिलने के कारण उन्होंने पिछले दो वर्ष से प्याज की खेती करना बंद कर दिया है। एक बीघे में प्याज उत्पादन करने में 45 से 50 हजार रुपए का खर्चा आता है, लेकिन मंडी में उचित मूल्य न मिलने के कारण 25 से 30 हजार रुपए का नुकसान होता है।
बागवानी की फसलों में वृद्धि का अनुमान
सरकार ने बागवानी की विभिन्न फसलों के क्षेत्रफल में 4 लाख हेक्टेयर में वृद्धि होने का अनुमान लगाया है, जो 2023-24 की तुलना में 290.86 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 294.88 लाख हेक्टेयर है। फसल उत्पादन में भी गत वर्ष की तुलना में 143.11 लाख टन की वृद्धि के साथ 3690.55 लाख टन का अनुमान है।
आंकड़े बताते हैं कि सब्जियों का उत्पादन 4.09 प्रतिशत (84.76 लाख टन) बढ़कर 2156.84 लाख टन होने का अनुमान है। आलू का उत्पादन 1.85 प्रतिशत की बढ़त के साथ 581.08 लाख टन की उम्मीद है। सब्जियों के अलावा फल उत्पादन में गत वर्ष की तुलना में 5.12 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1187.60 लाख टन का अनुमान है, इसमें केला, आम, तरबूज, पपीता, अमरूद, मंदारिन व कटहल का अहम योगदान है।
सुगंधित और औषधीय पौधो का उत्पादन 7.26 लाख टन से बढ़कर 7.81 लाख टन तक होने का अनुमान है। वही मसाला उत्पादन 124.84 लाख टन से बढ़कर लगभग 125.03 लाख टन अनुमानित है, जिसमें लहसुन, अदरक, हल्दी के उत्पादन में वृद्धि हुई है। टमाटर उत्पादन में 194.68 लाख टन होने की उम्मीद है।
लहसुन का रकबा भी बढ़ने का अनुमान लगाया है। राजस्थान में कोटा जिले के रामगंज मंडी के किसान निवास कुमार हर वर्ष 4 बीघा में लहसुन की खेती करते है, लहसुन लगाते रहने की वजह अन्य फसलों में सही भाव न मिलना बताया। पिछले वर्ष लहसुन में प्रति किवंटल 7 से 12 हजार तक भाव मिला जो कि मुनाफे की खेती का संकेत है। इस साल अच्छा भाव होने के कारण इस सीजन में कोटा क्षेत्र में अधिकतर किसान लहसुन की खेती कर रहे है।